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Sirsa News: न एमई, न एक्सईएन, जेई ने निकाला ड्रा, मौके पर बदल दिए नियम, विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Fri, 27 Mar 2026 11:17 PM IST
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सिरसा नगर परिषद कार्यालय में पार्क का ड्रा निकलवाते हुए जेई राहुल व पार्षद अंग्रेज बटला और मौके
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सिरसा। शहर के पार्कों को कुछ सोसायटियों ने बिजनेस बना दिया गया है। शुक्रवार को नियमित रूप से पार्क लेने वाली संस्था के लोग नई नई सोसायटी लेकर मैदान में उतरे। हैरानी की बात रही है कि महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप से लेकर योग समितियां तक पार्क गोद लेने के आवेदन करती नजर आई और ड्रा में पार्क भी उन्हें दिए गए है। अहम बात यह रही कि न एमई और न ही एक्सईएन ड्रा के दौरान मौजूद रहें।
इतना ही नहीं, कार्यकारी अधिकारी से लेकर चेयरमैन तक ड्रा से दूरी बनाए हुए रहें। विवाद की स्थिति उस समय उत्पन्न हो गई, जब पांच पार्कों की जगह संस्थाओं को तीन पार्क गोद देने के ऑन द स्पॉट आदेश जारी कर दिए गए। जिला नगर आयुक्त का हवाला देते हुए इन आदेशों को जारी किया गया। जिसका संस्थाओं ने विरोध किया। लेकिन मौजूद पार्षदों ने उन्हें समझा दिया। इसके बाद 52 पार्कों का ड्रा किया गया। कई संस्थाओं को एक भी पार्क नहीं मिला और कई संस्थाओं को तीन-तीन पार्क दे दिए गए।
डीएमसी के आदेशों की कॉपी नहीं की सार्वजनिक, न ही पार्षदों को अवगत करवाया
नगर परिषद ने ड्रा के समय समिति सदस्यों को अवगत कराया कि एक संस्था को तीन पार्क दिए जाएंगे। इस पर संस्थाओं ने आपत्ति जताते हुए कहा कि आप आज तीन पार्क गोद दे रहे हैं। जबकि नवंबर माह में संस्थाओं को गुपचुप तरीके से 5 से 8 तक पार्क दे दिए गए हैं। उनके पार्क भी कैंसिल किए जाने चाहिए। जेई राहुल ने कहा कि उनको भी तीन पार्क ही दिए जाएंगे, जिसको लेकर उच्चाधिकारी निर्णय लेंगे। वहीं, संस्था प्रतिनिधियों ने कहा कि आज ही उनके कम किए गए पार्कों का ड्रा होना चाहिए थे। जो नहीं किया गया है। सीधेतौर पर अधिकारी उनको लाभ पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
32 संस्थाओं ने किए आवेदन, शहर के अलग-अलग कोने के दिए पार्क
पार्क गोद लेने के लिए शहर के अलावा आसपास के गांवों और कस्बों से भी संस्थाओं ने आवेदन किया हुआ था। जबकि मुख्यालय के सख्त निर्देश है कि उन संस्थाओं को पार्क गोद दिए जाएंगे, जो संस्था उन पार्कों के आसपास रहती हो। ड्रा के अंदर संस्थाओं को एक पार्क शहर के बीच तो एक सेक्टर में दे दिया गया। इस कारण कई संस्थाओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा और पार्कों के रखरखाव में दिक्कत आएगी।
मुख्यालय के आदेशों को ही किया हवा
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के स्पष्ट आदेश है कि पहले रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन को पार्क गोद दिए जाएंगे। क्योंकि ये उन एरिया में रहने वाले लोगों की बनाई गई सोसायटी है। मगर, नगर परिषद के अधिकारियों ने उन्हें भी ड्रा के माध्यम से पार्क दिए जो सीधेतौर पर मुख्यालय के आदेशों की अवहेलना बनती हैं। इतना नहीं, भंडारा लगाने वाली संस्थाओं से लेकर धार्मिक संस्थाओं को बड़े स्तर पर पार्क आवंटित किए गए। हैरानी की बात रही है कि एक वार्ड की रेजिडेंस वेलफेयर ट्रस्ट को दूसरे वार्डों के पार्क दे दिए गए, जो नियमानुसार गलत है। ऐसा नहीं किया जा सकता है।
इन नियमों की हुई अवहेलना
- पार्कों की सूची नहीं की नोटिस बोर्ड पर जारी।
- नवंबर माह में संस्थाओं को दिए गए पार्कों की सूची जारी नहीं की गई।
- तीन पार्क एक संस्था को देने का नोटिफिकेशन सार्वजनिक नहीं किया गया।
- शहर के बाहर की संस्थाओं को पार्क देने के लिए योग्य माना गया।
- ट्रस्टों का मौजूदा स्टेटस रिपोर्ट नहीं जांचा गया। तीन साल के रिकॉर्ड की जांच होना जरूरी है।
- संस्थाओं के संविधान की जांच नहीं की गई। उन संस्थाओं को क्या क्या कार्य करने के अधिकारी है।
- एमई, एक्सईएन, कार्यकारी जैसे अधिकारी मौजूद नहीं रहे। उच्चाधिकारियों की ड्रा के दौरान मौजूदगी जरूरी है।
52 पार्कों को लेकर ड्रा निकाला गया है। प्रत्येक संस्था को तीन पार्क दिए गए है। संस्थाओं को वर्कऑर्डर जारी करने से पहले उनके दस्तावेजों की जांच की जाएगी। अधिकारी किन्हीं कारणों से ड्रा में मौजूद नहीं रह सके। ड्रा को लेकर अधिकारियों के आदेश ही फाइनल होंगे।
-राहुल कुमार, जेई, नगर परिषद
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इतना ही नहीं, कार्यकारी अधिकारी से लेकर चेयरमैन तक ड्रा से दूरी बनाए हुए रहें। विवाद की स्थिति उस समय उत्पन्न हो गई, जब पांच पार्कों की जगह संस्थाओं को तीन पार्क गोद देने के ऑन द स्पॉट आदेश जारी कर दिए गए। जिला नगर आयुक्त का हवाला देते हुए इन आदेशों को जारी किया गया। जिसका संस्थाओं ने विरोध किया। लेकिन मौजूद पार्षदों ने उन्हें समझा दिया। इसके बाद 52 पार्कों का ड्रा किया गया। कई संस्थाओं को एक भी पार्क नहीं मिला और कई संस्थाओं को तीन-तीन पार्क दे दिए गए।
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डीएमसी के आदेशों की कॉपी नहीं की सार्वजनिक, न ही पार्षदों को अवगत करवाया
नगर परिषद ने ड्रा के समय समिति सदस्यों को अवगत कराया कि एक संस्था को तीन पार्क दिए जाएंगे। इस पर संस्थाओं ने आपत्ति जताते हुए कहा कि आप आज तीन पार्क गोद दे रहे हैं। जबकि नवंबर माह में संस्थाओं को गुपचुप तरीके से 5 से 8 तक पार्क दे दिए गए हैं। उनके पार्क भी कैंसिल किए जाने चाहिए। जेई राहुल ने कहा कि उनको भी तीन पार्क ही दिए जाएंगे, जिसको लेकर उच्चाधिकारी निर्णय लेंगे। वहीं, संस्था प्रतिनिधियों ने कहा कि आज ही उनके कम किए गए पार्कों का ड्रा होना चाहिए थे। जो नहीं किया गया है। सीधेतौर पर अधिकारी उनको लाभ पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
32 संस्थाओं ने किए आवेदन, शहर के अलग-अलग कोने के दिए पार्क
पार्क गोद लेने के लिए शहर के अलावा आसपास के गांवों और कस्बों से भी संस्थाओं ने आवेदन किया हुआ था। जबकि मुख्यालय के सख्त निर्देश है कि उन संस्थाओं को पार्क गोद दिए जाएंगे, जो संस्था उन पार्कों के आसपास रहती हो। ड्रा के अंदर संस्थाओं को एक पार्क शहर के बीच तो एक सेक्टर में दे दिया गया। इस कारण कई संस्थाओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा और पार्कों के रखरखाव में दिक्कत आएगी।
मुख्यालय के आदेशों को ही किया हवा
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के स्पष्ट आदेश है कि पहले रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन को पार्क गोद दिए जाएंगे। क्योंकि ये उन एरिया में रहने वाले लोगों की बनाई गई सोसायटी है। मगर, नगर परिषद के अधिकारियों ने उन्हें भी ड्रा के माध्यम से पार्क दिए जो सीधेतौर पर मुख्यालय के आदेशों की अवहेलना बनती हैं। इतना नहीं, भंडारा लगाने वाली संस्थाओं से लेकर धार्मिक संस्थाओं को बड़े स्तर पर पार्क आवंटित किए गए। हैरानी की बात रही है कि एक वार्ड की रेजिडेंस वेलफेयर ट्रस्ट को दूसरे वार्डों के पार्क दे दिए गए, जो नियमानुसार गलत है। ऐसा नहीं किया जा सकता है।
इन नियमों की हुई अवहेलना
- पार्कों की सूची नहीं की नोटिस बोर्ड पर जारी।
- नवंबर माह में संस्थाओं को दिए गए पार्कों की सूची जारी नहीं की गई।
- तीन पार्क एक संस्था को देने का नोटिफिकेशन सार्वजनिक नहीं किया गया।
- शहर के बाहर की संस्थाओं को पार्क देने के लिए योग्य माना गया।
- ट्रस्टों का मौजूदा स्टेटस रिपोर्ट नहीं जांचा गया। तीन साल के रिकॉर्ड की जांच होना जरूरी है।
- संस्थाओं के संविधान की जांच नहीं की गई। उन संस्थाओं को क्या क्या कार्य करने के अधिकारी है।
- एमई, एक्सईएन, कार्यकारी जैसे अधिकारी मौजूद नहीं रहे। उच्चाधिकारियों की ड्रा के दौरान मौजूदगी जरूरी है।
52 पार्कों को लेकर ड्रा निकाला गया है। प्रत्येक संस्था को तीन पार्क दिए गए है। संस्थाओं को वर्कऑर्डर जारी करने से पहले उनके दस्तावेजों की जांच की जाएगी। अधिकारी किन्हीं कारणों से ड्रा में मौजूद नहीं रह सके। ड्रा को लेकर अधिकारियों के आदेश ही फाइनल होंगे।
-राहुल कुमार, जेई, नगर परिषद