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Sirsa News: आधी छोड़ पूरी पर धावै, आधी मिले न पूरी पावै

संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Mon, 04 May 2026 01:45 AM IST
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problem of installment of pm awas
गांव लकड़ावाली में बिना छत के अधर में पड़े मकान। संवाद
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गांव लकड़ांवाली के पीएम आवास के लाभार्थियों ने पुराने मकान तोड़े, किस्त के इंतजार में नया भी नहीं बन पा रहा
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417 लाभार्थी ओढ़ां खंड में हैं
243 लाभार्थी दूसरी किस्त से वंचित

65 मकान लकड़ांवाली में स्वीकृत
42 मकानों को मिली पहली किस्त
फोटो - 11
ओढ़ां। आधी छोड़ पूरी पर धावै, आधी मिले न पूरी पावै। यह कहावत ओढ़ां खंड के गांव लकड़ांवाली के प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) के लाभार्थियों पर सटीक बैठती है। लाभार्थी पुराने मकान तोड़कर सामान तंबुओं में डालकर रहने लगे। पहली किस्त से मकान का निर्माण कार्य शुरू कर दूसरी किस्त के इंतजार में हैं। स्थिति यह है पहले की छत टूट गई और नए की बन नहीं पाई। लाभार्थी सालभर से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। अब ये न घर के हैं न घाट के।

ग्रामीण मेजर सिंह, हरभजन सिंह, जनकराज, सुखदेव सिंह, हरजस सिंह, मेजर सिंह व बीकर सिंह आदि ने बताया कि सरकार की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उन्हें पक्के मकान आवंटित हुए थे। मार्च 2025 में पहली किस्त आई तो उन्होंने अपने पहले वाले मकान तोड़कर नए मकान का कार्य शुरू कर दिया था। विभागीय नियमानुसार, उन्होंने डोर लेंटर तक का निर्माण पूर्ण कर लिया। दूसरी किस्त अब तक नहीं आई।
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लाभार्थियों ने बताया कि वे दूसरी किस्त के लिए एक साल से अधिक समय से कभी सरपंच के पास तो कभी बीडीपीओ व कभी उपायुक्त कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। उन्हें एक ही जवाब मिलता है राशि ऊपर से नहीं आई। राशि कब आएगी। इस बारे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।

लाभार्थियों ने बताया कि किस्त के अभाव में उनके मकान अधर में हैं। उन्होंने मकान इस उम्मीद के साथ तोड़े थे कि जल्द उनके सिर पर पक्की छत होगी। उन्होंने अपना सामान तंबुओं में व किराए पर मकान लेकर रखा हुआ है। पंचायत के मुताबिक, गांव में वर्ष 2024-25 में 65 मकान स्वीकृत हुए थे। इनमें से 42 मकानों की पहली किस्त के रूप में 45 हजार रुपये व मजदूरी के 11 हजार रुपये ही आए हैं। 22 मकानों की तो पहली किस्त भी नहीं मिल पाई है।
सरपंच भीम सिंह का कहना है कि कई गांवों में सरपंचों ने लाभार्थियों को अपने स्तर पर निर्माण सामग्री उठवा दी लेकिन किस्त न आने से उनका पैसा फंस गया है। बीडीपीओ कार्यालय के कर्मचारी कहते हैं कि बजट नहीं आया। सरकार की लापरवाही से हम लोगों को ग्रामीणों को जवाब देते नहीं बन रहा है।
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत ओढ़ां खंड में वर्ष 2024-25 में 843 लाभार्थियों ने आवेदन किया था। सर्वे के दौरान विभाग ने 417 को योग्य पाया। 174 लाभार्थियों को अब तक पहली किस्त जारी नहीं हुई है। 243 लाभार्थी दूसरी किस्त के इंतजार में हैं। योजना के लाभार्थी को 1,38,000 रुपये मकान बनाने के लिए तीन किस्तों में मिलने हैं।
इसमें 45 हजार रुपये की पहली किस्त निर्माण शुरू करने के लिए, 60 हजार रुपये की दूसरी किस्त मकान का कार्य दरवाजे के ऊपर लेंटर तक पहुंच जाने के बाद। 33 हजार रुपये की अंतिम एवं तीसरी किस्त मकान पूर्ण होने के बाद दी जाती है।
गांव लकड़ांवाली में किसी का घर लेंटर तक पहुंचा है तो किसी की दीवारें अधर में हैं। लाभार्थी सुनीता देवी, रानी, अंगूरी देवी, कमलेश, शांति देवी, सुमन देवी व बलराम ने बताया कि उन्हें पहली किस्त के रूप में 45 हजार रुपये मिले। इससे उन्होंने निर्माण कार्य छत तक पहुंचा दिया लेकिन उसके बाद राशि न आने से उनके मकान बिना छत के पड़े हैं। संवाद

किस गांव में कितने लाभार्थी

ओढ़ां खंड में कुल 417 लाभार्थी हैं। इनमें गांव नुहियांवाली में 11, गांव ओढ़ां में 48, गांव देसू मलकाना में 57, गांव लकड़ांवाली में 38, गांव ख्योवाली में 06, गांव मलिकपुरा में 07, गांव मिठड़ी में 17, गांव किंगरे में 02, गांव जंडवाला जटान में 01, गांव जलालआना में 20, गांव चोरमारखेड़ा में 02, गांव टप्पी में 09, गांव जगमालवाली में 15, गांव घुकांवाली में 12, गांव सालमखेड़ा में 01, गांव रोहिड़ांवाली में 12, गांव हस्सू में 15, गांव चट्ठा में 06, गांव गदराना में 26, गांव कालांवाली में 08, गांव केवल में 15, गांव खोखर में 09, गांव खतरावां में 01, गांव माखा में 15, गांव नोरंग में 10, गांव पिपली में 04, गांव सिंघपुरा में 11, गांव तारुआना में 08, गांव तिगड़ी में 05 तथा गांव तिलोकेवाला में 01 लाभार्थी शामिल हैं।

खुले दरबार में उठा था मुद्दा

गांव लकड़ांवाली में 26 फरवरी को प्रशासन का खुला दरबार लगा था। इसमें गांव के साथ-साथ अन्य गांवों के लोगों ने भी मकान की किस्त जारी नहीं होने का मुद्दा उठाया था। इस पर जिला प्रशासन ने लाभार्थियों को 10 दिन में किस्त जारी होने का आश्वासन दिया था। अब तक किस्त जारी नहीं हुई।
कोट्स

बजट के अभाव में किस्त जारी नहीं हो रही है। मैं अपनी रिपोर्ट में रिमाइंडर डालता रहता हूं। जब बजट आएगा तभी किस्त जारी होगी।

- सुभाष, अकाउंटेंट, बीडीपीओ कार्यालय, ओढ़ां।
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