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Sirsa News: सीडीएलयू में स्वच्छता की पहल...पूजा वेस्ट मैनेजमेंट से करार किया, कैंपस बनेगा हराभरा
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सिरसा में सीडीएलयू पूजा वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, रोहतक व सीडीएलयू के बीच एमओयू साइन कर
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सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू) ने अपने परिसर को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय और पूजा वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, रोहतक के बीच ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर एक साझा करार पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के तहत किया गया है, जिसके तहत विश्वविद्यालय परिसर में उत्पन्न होने वाले कचरे का संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा।
एमओयू के अनुसार, विश्वविद्यालय में उत्पन्न गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र किया जाएगा। पूजा वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कचरे के उठान और निस्तारण की जिम्मेदारी संभालेगा। भुगतान व्यवस्था कचरे की मात्रा के आधार पर तय की गई है, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी और अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, यह अनुबंध पिछले लगभग दो वर्षों के प्रयास के बाद साकार हुआ है। लंबे समय से परिसर में कचरा प्रबंधन के स्थायी और वैज्ञानिक समाधान पर विचार किया जा रहा था, और अब इस करार के बाद इसे एक संगठित और दीर्घकालिक समाधान मिल जाएगा।
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता
सीडीएलयू के कुलपति प्रो. विजय कुमार ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय न केवल शैक्षणिक गतिविधियों में ही व्यस्त नहीं है, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो विश्वविद्यालय को एक आदर्श हरित कैंपस में बदलने के लिए मार्गदर्शन करेगी। कुलपति ने कहा कि ठोस कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन न केवल स्वच्छता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह विद्यार्थियों और कर्मचारियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय की यह पहल अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक उदाहरण बनेगी।
तीन वर्षों का करार
समझौता प्रारंभ में तीन वर्षों के लिए है, और कार्य निष्पादन एवं संतोषजनक परिणामों के आधार पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार और पूजा वेस्ट मैनेजमेंट के प्रतिनिधि संदीप ने इस अवसर पर एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत विश्वविद्यालय में उत्पन्न सभी प्रकार के ठोस कचरे का नियमित उठान सुनिश्चित किया जाएगा।
कचरे के पृथक्करण पर जागरूकता अभियान
कुलपति ने बताया कि गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और अन्य स्टाफ को कचरे के पृथक्करण के तरीके समझाए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि जब तक सभी की सहभागिता नहीं होगी, तब तक स्वच्छता का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। कचरा प्रबंधन कार्य की निगरानी विश्वविद्यालय की कंस्ट्रक्शन शाखा द्वारा की जाएगी। इस अवसर पर कार्यकारी अभियंता राकेश गोदारा, अधीक्षक रामचंदर मौर्य, हरमीत आदि मौजूद रहे।
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एमओयू के अनुसार, विश्वविद्यालय में उत्पन्न गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र किया जाएगा। पूजा वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कचरे के उठान और निस्तारण की जिम्मेदारी संभालेगा। भुगतान व्यवस्था कचरे की मात्रा के आधार पर तय की गई है, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी और अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, यह अनुबंध पिछले लगभग दो वर्षों के प्रयास के बाद साकार हुआ है। लंबे समय से परिसर में कचरा प्रबंधन के स्थायी और वैज्ञानिक समाधान पर विचार किया जा रहा था, और अब इस करार के बाद इसे एक संगठित और दीर्घकालिक समाधान मिल जाएगा।
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स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता
सीडीएलयू के कुलपति प्रो. विजय कुमार ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय न केवल शैक्षणिक गतिविधियों में ही व्यस्त नहीं है, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो विश्वविद्यालय को एक आदर्श हरित कैंपस में बदलने के लिए मार्गदर्शन करेगी। कुलपति ने कहा कि ठोस कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन न केवल स्वच्छता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह विद्यार्थियों और कर्मचारियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय की यह पहल अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक उदाहरण बनेगी।
तीन वर्षों का करार
समझौता प्रारंभ में तीन वर्षों के लिए है, और कार्य निष्पादन एवं संतोषजनक परिणामों के आधार पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार और पूजा वेस्ट मैनेजमेंट के प्रतिनिधि संदीप ने इस अवसर पर एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत विश्वविद्यालय में उत्पन्न सभी प्रकार के ठोस कचरे का नियमित उठान सुनिश्चित किया जाएगा।
कचरे के पृथक्करण पर जागरूकता अभियान
कुलपति ने बताया कि गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और अन्य स्टाफ को कचरे के पृथक्करण के तरीके समझाए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि जब तक सभी की सहभागिता नहीं होगी, तब तक स्वच्छता का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। कचरा प्रबंधन कार्य की निगरानी विश्वविद्यालय की कंस्ट्रक्शन शाखा द्वारा की जाएगी। इस अवसर पर कार्यकारी अभियंता राकेश गोदारा, अधीक्षक रामचंदर मौर्य, हरमीत आदि मौजूद रहे।