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Sirsa News: जैन धर्म के 32 पवित्र आगमों की भव्य यात्रा निकाली
Sun, 25 Oct 2026 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 25 Oct 2026 11:21 PM IST
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रानियां। जैन धर्म के 32 पवित्र आगमों की यात्रा में लाल वस्त्रों में सजाए गए पवित्र ग्रंथों को स
चार राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु, पीले वस्त्रों में 32 श्रावक-श्राविकाओं ने सिर पर धारण किए पवित्र ग्रंथ
फोटो - 12,13
संवाद न्यूज एजेंसी
रानियां। रानियां में रविवार को जैन धर्म की आध्यात्मिक परंपरा का अनुपम दृश्य दिखा। एसएस जैन सभा रानियां और समस्त जैन समाज ने महासाध्वी श्री वृष्टि जी महाराज ठाणे-3 के पावन सानिध्य में यह भव्य यात्रा निकाली।
इसमें जैन धर्म के 32 पवित्र आगमों को शामिल किया गया जिसमें हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली से श्रद्धालु पहुंचे। आगम यात्रा सुबह आठ बजे एसएस जैन सभा से शुरू हुई। यह यात्रा बीडीओ कार्यालय रोड और नानुआना रोड से गुजरी।
शहर के प्रमुख बाजारों और भगत सिंह चौक से होते हुए जैन धर्मशाला पहुंची। रास्तेभर जैन धर्म के जयघोष और मंगलगान गूंजते रहे। भक्ति संगीत से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। बैंड-बाजे की धुनें भी यात्रा में शामिल थीं।
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श्रद्धालुओं ने पवित्र आगमों को सम्मान के साथ धर्मशाला तक पहुंचाया। यात्रा का विशेष आकर्षण 32 जैन श्रावक-श्राविकाओं द्वारा आगमों को धारण करना था। महिलाओं ने पीले वस्त्र पहनकर प्रत्येक आगम को लाल कपड़े में सजाया।
उन्होंने टोकरी में रखकर आगमों को अपने सिर पर धारण किया। पुरुष श्रद्धालु सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर यात्रा में शामिल हुए। वे संबंधित आगमों के नाम लिखी तख्तियां लेकर चल रहे थे।
आयोजन की मुख्य झलकियां
भजन, मंगलगान और नृत्य से श्रद्धालुओं ने अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त की। रविंद्र जैन रामा मंडी ने आयोजन की अध्यक्षता की। कृष्ण लाल जैन रामा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। धन्नजय चौधरी चौटाला ने यात्रा का स्वागत किया। शालू-तरसेम जैन ने ध्वजारोहण की रस्म निभाई। भगवान महावीर दरबार का अनावरण सरोज जैन मोगा ने किया। रूप दरबार का अनावरण केवल कृष्ण जैन मोगा ने किया। आचार्य शिव दरबार का अनावरण अजय जैन दिल्ली ने किया। रिबन काटने की रस्म उर्मिला-वेद चाचाण और पवन बंसल रानियां ने संपन्न की। श्रद्धालुओं को भगवान महावीर के अभिषेक का अवसर मिला। अभिषेक और चांदनी जैन सहित 32 जैन परिवारों ने अनुष्ठान में भाग लिया। पवित्र आगमों को सिर पर धारण करने वाली 32 बहनों को सुभाष सिंगला भदौड़ ने सम्मानित किया। संजीव जैन गोठी, सरदूलगढ़ ने कूपन पुरस्कार वितरित किए।
महासाध्वी वृष्टि जी महाराज का संदेश
जैन धर्मशाला में महासाध्वी श्री वृष्टि जी महाराज ने प्रवचन दिए। उन्होंने आगम साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डाला। जैन आगमों में भगवान महावीर स्वामी की शिक्षाएं और उपदेश मिलते हैं। इनमें अहिंसा, सत्य, तपस्या, संयम और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग वर्णित है। ये ग्रंथ मनुष्य को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने बताया कि जैन धर्म की मूल भावना प्राणी के प्रति करुणा है। जीवन में संयम और विचारों में पवित्रता बनाए रखना भी आवश्यक है। अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांत नैतिकता सिखाते हैं। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र मोक्ष प्राप्ति का आधार हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से इन सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मोहा मन
धार्मिक आयोजन के दौरान बच्चों और महिलाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों में धार्मिक आस्था, संस्कार और जैन संस्कृति की झलक दिखी। कार्यक्रम के समापन पर सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं और समाज के सदस्यों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जैन समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। इनमें राजकुमार जैन, बहादुर जैन, सोम प्रकाश जैन, नरेश जैन और इंद्रजीत जैन शामिल थे। अनिल जैन, दिनेश जैन, विनोद जैन, जगदीप जैन और रविंद्र जैन भी उपस्थित थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रानियां। रानियां में रविवार को जैन धर्म की आध्यात्मिक परंपरा का अनुपम दृश्य दिखा। एसएस जैन सभा रानियां और समस्त जैन समाज ने महासाध्वी श्री वृष्टि जी महाराज ठाणे-3 के पावन सानिध्य में यह भव्य यात्रा निकाली।
इसमें जैन धर्म के 32 पवित्र आगमों को शामिल किया गया जिसमें हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली से श्रद्धालु पहुंचे। आगम यात्रा सुबह आठ बजे एसएस जैन सभा से शुरू हुई। यह यात्रा बीडीओ कार्यालय रोड और नानुआना रोड से गुजरी।
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शहर के प्रमुख बाजारों और भगत सिंह चौक से होते हुए जैन धर्मशाला पहुंची। रास्तेभर जैन धर्म के जयघोष और मंगलगान गूंजते रहे। भक्ति संगीत से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। बैंड-बाजे की धुनें भी यात्रा में शामिल थीं।
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श्रद्धालुओं ने पवित्र आगमों को सम्मान के साथ धर्मशाला तक पहुंचाया। यात्रा का विशेष आकर्षण 32 जैन श्रावक-श्राविकाओं द्वारा आगमों को धारण करना था। महिलाओं ने पीले वस्त्र पहनकर प्रत्येक आगम को लाल कपड़े में सजाया।
उन्होंने टोकरी में रखकर आगमों को अपने सिर पर धारण किया। पुरुष श्रद्धालु सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर यात्रा में शामिल हुए। वे संबंधित आगमों के नाम लिखी तख्तियां लेकर चल रहे थे।
आयोजन की मुख्य झलकियां
भजन, मंगलगान और नृत्य से श्रद्धालुओं ने अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त की। रविंद्र जैन रामा मंडी ने आयोजन की अध्यक्षता की। कृष्ण लाल जैन रामा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। धन्नजय चौधरी चौटाला ने यात्रा का स्वागत किया। शालू-तरसेम जैन ने ध्वजारोहण की रस्म निभाई। भगवान महावीर दरबार का अनावरण सरोज जैन मोगा ने किया। रूप दरबार का अनावरण केवल कृष्ण जैन मोगा ने किया। आचार्य शिव दरबार का अनावरण अजय जैन दिल्ली ने किया। रिबन काटने की रस्म उर्मिला-वेद चाचाण और पवन बंसल रानियां ने संपन्न की। श्रद्धालुओं को भगवान महावीर के अभिषेक का अवसर मिला। अभिषेक और चांदनी जैन सहित 32 जैन परिवारों ने अनुष्ठान में भाग लिया। पवित्र आगमों को सिर पर धारण करने वाली 32 बहनों को सुभाष सिंगला भदौड़ ने सम्मानित किया। संजीव जैन गोठी, सरदूलगढ़ ने कूपन पुरस्कार वितरित किए।
महासाध्वी वृष्टि जी महाराज का संदेश
जैन धर्मशाला में महासाध्वी श्री वृष्टि जी महाराज ने प्रवचन दिए। उन्होंने आगम साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डाला। जैन आगमों में भगवान महावीर स्वामी की शिक्षाएं और उपदेश मिलते हैं। इनमें अहिंसा, सत्य, तपस्या, संयम और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग वर्णित है। ये ग्रंथ मनुष्य को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने बताया कि जैन धर्म की मूल भावना प्राणी के प्रति करुणा है। जीवन में संयम और विचारों में पवित्रता बनाए रखना भी आवश्यक है। अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांत नैतिकता सिखाते हैं। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र मोक्ष प्राप्ति का आधार हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से इन सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मोहा मन
धार्मिक आयोजन के दौरान बच्चों और महिलाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों में धार्मिक आस्था, संस्कार और जैन संस्कृति की झलक दिखी। कार्यक्रम के समापन पर सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं और समाज के सदस्यों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जैन समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। इनमें राजकुमार जैन, बहादुर जैन, सोम प्रकाश जैन, नरेश जैन और इंद्रजीत जैन शामिल थे। अनिल जैन, दिनेश जैन, विनोद जैन, जगदीप जैन और रविंद्र जैन भी उपस्थित थे।