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Sirsa News: एसआईटी ने पूरी की जांच, सहायक रजिस्ट्रार को सौंपी रिपोर्ट
Thu, 13 Aug 2026 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 13 Aug 2026 12:15 AM IST
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ओढ़ां। फोटो : अलीकां पैक्स का दृश्य। संवाद
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अलीकां पैक्स गबन मामला : करीब 56 लाख रुपये का गबन व अवैध नियुक्तियां आईं सामने
फोटो-- 30
राजू
ओढ़ां। गांव अलीकां की दी बहुउद्देशीय कृषि सहकारी समिति में तत्कालीन पैक्स प्रबंधक सोहन लाल के कार्यकाल में हुए गबन के मामले की चल रही जांच एसआईटी ने पूरी कर ली है। एसआईटी ने जांच रिपोर्ट सहायक रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां), डबवाली को सौंप दी है।
जांच में खाद, नकद राशि और कर्मचारियों की अवैध नियुक्तियां कर उन्हें वेतन एवं एरियर देने के मामले में करीब 56 लाख रुपये का गबन सामने आया है। विभाग ने अब आरोपियों से राशि की वसूली और सरचार्ज की कार्रवाई शुरू कर दी है।
मामला सामने आने के बाद कुछ समय पूर्व ही सहायक रजिस्ट्रार डबवाली संजीव कौशिक ने सोहन लाल के कार्यकाल में आम सभा में पारित किए गए सभी प्रस्ताव रद्द कर दिए थे। एसआईटी ने करीब सात माह तक जांच की। आम सभा की बैठक के आधार पर नियुक्त किए गए कर्मचारियों से पूछताछ कर उनके बयान भी दर्ज किए गए।
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जांच में सामने आया कि एक सेल्समैन को 7 लाख 60 हजार रुपये का एरियर दिए जाने का कोई लेखा-जोखा नहीं मिला। संबंधित व्यक्ति ने भी एसआईटी के समक्ष कहा कि उसने पैक्स से कोई राशि नहीं ली और न ही उसकी कोई नियुक्ति हुई थी।
पैक्स प्रबंधक सोहन लाल का कहना है कि उसने उक्त सेल्समैन को राशि का भुगतान किया था। वर्ष 2024 की आम सभा की बैठक में सोहन लाल ने प्रस्ताव रखा था कि उक्त व्यक्ति को वर्ष 2007 से सेल्समैन माना जाए। इसके बाद उसे 7 लाख 60 हजार रुपये का एरियर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की जांच में कुछ कर्मचारियों को विभागीय नियमों के विरुद्ध करीब साढ़े सात लाख रुपये वेतन दिए जाने की बात भी सामने आई है।
इस मामले में आरोपी पैक्स प्रबंधक सोहन लाल का कहना है कि उसके पास एक साथ अलीकां और डबवाली दोनों पैक्सों का कार्यभार था। अलीकां पैक्स में खाद वितरण और अन्य लेखा-जोखा सेल्समैन अरुण और जगदीश के पास था। उसका कहना है कि अलीकां पैक्स में हुआ गबन उसने नहीं बल्कि उक्त दोनों सेल्समैन ने किया।
सेल्समैन अरुण कुमार की वर्ष 2017 में अलीकां पैक्स में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में संलिप्तता सामने आई थी। इसके बाद उसे पैक्स से हटा दिया गया था। हालांकि, कुछ वर्ष बाद उसे दोबारा सेल्समैन रख लिया गया।
पैक्स प्रबंधक सोहन लाल ने आम सभा में प्रस्ताव डालकर उसकी नियुक्ति सेल्समैन एवं सेवादार के रूप में कर दी। सहायक रजिस्ट्रार ने हाल ही में ये प्रस्ताव रद्द कर दिए हैं। इसके बाद जगदीश, अरुण और रानी देवी की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
डबवाली पैक्स में 47 लाख रुपये का घोटाला
तत्कालीन पैक्स प्रबंधक सोहन लाल के खिलाफ गबन के मामलों की फेहरिस्त लंबी है। वर्ष 2023-24 में डबवाली में पैक्स प्रबंधक रहते हुए खाद, नकद राशि और फर्जी ऋण के मामले में करीब 47 लाख रुपये का घोटाला सामने आया था। एसआईटी की जांच में यह गबन उजागर हुआ। गबन के आरोपी पैक्स प्रबंधक सोहन लाल और सेल्समैन संदीप ने करीब डेढ़ माह पूर्व दबाव के चलते 47 लाख रुपये की राशि रिकवरी के रूप में जमा करवाई थी। हालांकि, आरोपियों ने मूल राशि पर ब्याज अभी जमा नहीं करवाया है।
गबन करो और पकड़े जाने पर राशि भरकर बच जाओ
जिले में डबवाली, अलीकां, शाहपुर बेगू, पनिहारी, देसूजोधा, बिज्जूवाली, गोरीवाला और चौटाला सहित अनेक पैक्सों में बड़े गबन सामने आ चुके हैं। आरोप है कि कई मामलों में गबनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने या उनकी सेवाएं समाप्त करने के बजाय केवल गबन की राशि की वसूली कर उन्हें दोबारा बहाल कर दिया गया। यही कारण माना जा रहा है कि पैक्सों में लगातार घोटाले सामने आ रहे हैं।
चौटाला पैक्स में 3.23 करोड़ का गबन
जिले में चौटाला पैक्स में हुए करीब 3 करोड़ 23 लाख रुपये के गबन के मामले में ही गबनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर उनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं। अन्य पैक्सों में सामने आए मामलों में आरोपियों से केवल राशि की वसूली तक कार्रवाई सीमित रही है। कुछ मामलों में तो गबन की राशि पर लगने वाला ब्याज भी जमा नहीं करवाया गया। नियमों के अनुसार गबन की राशि 18 प्रतिशत ब्याज सहित वसूल की जाती है।
प्रबंधक कमेटियों पर भी उठ रहे सवाल
पैक्स का संचालन 11 सदस्यीय प्रबंधक कमेटी करती है। यदि किसी पैक्स में गबन या अनियमितता की आशंका होती है तो प्राथमिक स्तर पर जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी इसी कमेटी की होती है लेकिन कई पैक्सों में सामने आए घोटालों के मामलों में प्रबंधक कमेटियों की ओर से कार्रवाई नहीं किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे मामलों में महाप्रबंधक को हस्तक्षेप कर कार्रवाई करनी पड़ती है।
प्रबंधक कमेटियों की भूमिका पर भी सवाल
चौटाला पैक्स में प्रबंधक कमेटी ने कार्रवाई करते हुए दो दोषी कर्मचारियों श्रीपाल और प्रमोद कुमार की समिति में सेवाएं समाप्त कर दी थीं। वहीं, डबवाली पैक्स घोटाले के मामले में विकास अधिकारी की ओर से 48 लाख रुपये के गबन की जांच रिपोर्ट दिए जाने के बाद महाप्रबंधक ने डबवाली पैक्स की प्रबंधक कमेटी को कई बार पत्र लिखकर गबनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा लेकिन कमेटी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में प्रबंधक कमेटियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कोट्स
एसआईटी की जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट हमारे पास आ चुकी है। अब इस मामले में रिकवरी और सरचार्ज की कार्रवाई चल रही है। जो भी आरोपी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डबवाली पैक्स मामले में घोटाले की 47 लाख रुपये की राशि की रिकवरी पहले ही हो चुकी है जबकि ब्याज की राशि अब भी शेष है।
- संजीव कौशिक, सहायक रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां), डबवाली।
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राजू
ओढ़ां। गांव अलीकां की दी बहुउद्देशीय कृषि सहकारी समिति में तत्कालीन पैक्स प्रबंधक सोहन लाल के कार्यकाल में हुए गबन के मामले की चल रही जांच एसआईटी ने पूरी कर ली है। एसआईटी ने जांच रिपोर्ट सहायक रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां), डबवाली को सौंप दी है।
जांच में खाद, नकद राशि और कर्मचारियों की अवैध नियुक्तियां कर उन्हें वेतन एवं एरियर देने के मामले में करीब 56 लाख रुपये का गबन सामने आया है। विभाग ने अब आरोपियों से राशि की वसूली और सरचार्ज की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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मामला सामने आने के बाद कुछ समय पूर्व ही सहायक रजिस्ट्रार डबवाली संजीव कौशिक ने सोहन लाल के कार्यकाल में आम सभा में पारित किए गए सभी प्रस्ताव रद्द कर दिए थे। एसआईटी ने करीब सात माह तक जांच की। आम सभा की बैठक के आधार पर नियुक्त किए गए कर्मचारियों से पूछताछ कर उनके बयान भी दर्ज किए गए।
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जांच में सामने आया कि एक सेल्समैन को 7 लाख 60 हजार रुपये का एरियर दिए जाने का कोई लेखा-जोखा नहीं मिला। संबंधित व्यक्ति ने भी एसआईटी के समक्ष कहा कि उसने पैक्स से कोई राशि नहीं ली और न ही उसकी कोई नियुक्ति हुई थी।
पैक्स प्रबंधक सोहन लाल का कहना है कि उसने उक्त सेल्समैन को राशि का भुगतान किया था। वर्ष 2024 की आम सभा की बैठक में सोहन लाल ने प्रस्ताव रखा था कि उक्त व्यक्ति को वर्ष 2007 से सेल्समैन माना जाए। इसके बाद उसे 7 लाख 60 हजार रुपये का एरियर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की जांच में कुछ कर्मचारियों को विभागीय नियमों के विरुद्ध करीब साढ़े सात लाख रुपये वेतन दिए जाने की बात भी सामने आई है।
इस मामले में आरोपी पैक्स प्रबंधक सोहन लाल का कहना है कि उसके पास एक साथ अलीकां और डबवाली दोनों पैक्सों का कार्यभार था। अलीकां पैक्स में खाद वितरण और अन्य लेखा-जोखा सेल्समैन अरुण और जगदीश के पास था। उसका कहना है कि अलीकां पैक्स में हुआ गबन उसने नहीं बल्कि उक्त दोनों सेल्समैन ने किया।
सेल्समैन अरुण कुमार की वर्ष 2017 में अलीकां पैक्स में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में संलिप्तता सामने आई थी। इसके बाद उसे पैक्स से हटा दिया गया था। हालांकि, कुछ वर्ष बाद उसे दोबारा सेल्समैन रख लिया गया।
पैक्स प्रबंधक सोहन लाल ने आम सभा में प्रस्ताव डालकर उसकी नियुक्ति सेल्समैन एवं सेवादार के रूप में कर दी। सहायक रजिस्ट्रार ने हाल ही में ये प्रस्ताव रद्द कर दिए हैं। इसके बाद जगदीश, अरुण और रानी देवी की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
डबवाली पैक्स में 47 लाख रुपये का घोटाला
तत्कालीन पैक्स प्रबंधक सोहन लाल के खिलाफ गबन के मामलों की फेहरिस्त लंबी है। वर्ष 2023-24 में डबवाली में पैक्स प्रबंधक रहते हुए खाद, नकद राशि और फर्जी ऋण के मामले में करीब 47 लाख रुपये का घोटाला सामने आया था। एसआईटी की जांच में यह गबन उजागर हुआ। गबन के आरोपी पैक्स प्रबंधक सोहन लाल और सेल्समैन संदीप ने करीब डेढ़ माह पूर्व दबाव के चलते 47 लाख रुपये की राशि रिकवरी के रूप में जमा करवाई थी। हालांकि, आरोपियों ने मूल राशि पर ब्याज अभी जमा नहीं करवाया है।
गबन करो और पकड़े जाने पर राशि भरकर बच जाओ
जिले में डबवाली, अलीकां, शाहपुर बेगू, पनिहारी, देसूजोधा, बिज्जूवाली, गोरीवाला और चौटाला सहित अनेक पैक्सों में बड़े गबन सामने आ चुके हैं। आरोप है कि कई मामलों में गबनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने या उनकी सेवाएं समाप्त करने के बजाय केवल गबन की राशि की वसूली कर उन्हें दोबारा बहाल कर दिया गया। यही कारण माना जा रहा है कि पैक्सों में लगातार घोटाले सामने आ रहे हैं।
चौटाला पैक्स में 3.23 करोड़ का गबन
जिले में चौटाला पैक्स में हुए करीब 3 करोड़ 23 लाख रुपये के गबन के मामले में ही गबनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर उनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं। अन्य पैक्सों में सामने आए मामलों में आरोपियों से केवल राशि की वसूली तक कार्रवाई सीमित रही है। कुछ मामलों में तो गबन की राशि पर लगने वाला ब्याज भी जमा नहीं करवाया गया। नियमों के अनुसार गबन की राशि 18 प्रतिशत ब्याज सहित वसूल की जाती है।
प्रबंधक कमेटियों पर भी उठ रहे सवाल
पैक्स का संचालन 11 सदस्यीय प्रबंधक कमेटी करती है। यदि किसी पैक्स में गबन या अनियमितता की आशंका होती है तो प्राथमिक स्तर पर जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी इसी कमेटी की होती है लेकिन कई पैक्सों में सामने आए घोटालों के मामलों में प्रबंधक कमेटियों की ओर से कार्रवाई नहीं किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे मामलों में महाप्रबंधक को हस्तक्षेप कर कार्रवाई करनी पड़ती है।
प्रबंधक कमेटियों की भूमिका पर भी सवाल
चौटाला पैक्स में प्रबंधक कमेटी ने कार्रवाई करते हुए दो दोषी कर्मचारियों श्रीपाल और प्रमोद कुमार की समिति में सेवाएं समाप्त कर दी थीं। वहीं, डबवाली पैक्स घोटाले के मामले में विकास अधिकारी की ओर से 48 लाख रुपये के गबन की जांच रिपोर्ट दिए जाने के बाद महाप्रबंधक ने डबवाली पैक्स की प्रबंधक कमेटी को कई बार पत्र लिखकर गबनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा लेकिन कमेटी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में प्रबंधक कमेटियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कोट्स
एसआईटी की जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट हमारे पास आ चुकी है। अब इस मामले में रिकवरी और सरचार्ज की कार्रवाई चल रही है। जो भी आरोपी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डबवाली पैक्स मामले में घोटाले की 47 लाख रुपये की राशि की रिकवरी पहले ही हो चुकी है जबकि ब्याज की राशि अब भी शेष है।
- संजीव कौशिक, सहायक रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां), डबवाली।