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Sirsa News: सेम की कहानी..सरकारी स्कूल और आईटीआई में भर जाता है पानी
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 22 Mar 2026 11:46 PM IST
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चौधरी देवीलाल राजकीय बहुत तकनीकी संस्थान में भरा पानी। फाइल फोटो।
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सेम का दंश लोगो
मंदिरों व पंचायती शेड के नीचे लगती हैं कक्षाएं, कई दिनों तक चोपटा से जोड़ने वाला रोड हो जाता है बंद
- 10 से 15 किलोमीटर घूमकर आना पड़ता है चोपटा
- 40 दिन वर्ष 2025 में बंद था सिरसा, भादरा रोड
- 04 फीट तक आईटीआई में भर गया था पानी
फोटो- 27, 28, 29
नरेश बैनीवाल
चोपटा। चोपटा क्षेत्र में हर साल सरकारी स्कूल और आईटीआई जैसे संस्थानों में मानसून के समय में तीन से चार फीट पानी भर जाता है। सेम के कारण यह पानी कई कई दिनों तक सूखता ही नहीं है। हालात ये हो जाते हैं कि मंदिरों व चौपालों पर बच्चों की कक्षाएं लगानी पड़ती हैं। इतना ही नहीं, सरकारी संपत्ति का भी नुकसान होता है।
सिरसा से भादरा को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर तीन से चार फीट पानी देखने को मिलता है। इसके परिणामस्वरूप कई दिनों तक आवागमन बंद हो जाता है। सिरसा से कई गांवों का जुड़ाव टूट जाता है। वहीं, उच्चशिक्षा के लिए सिरसा आने वाले विद्यार्थियों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। सेम का प्रभाव सरकारी स्कूल और आईटीआई जैसे संस्थान पर देखने को मिलता है।
मंदिरों और पंचायती शेड के नीचे लगते हैं स्कूल
गांव शक्कर मंदोरी में तीन सरकारी स्कूल राजकीय कन्या मिडिल स्कूल, राजकीय कन्या प्राथमिक स्कूल और राजकीय प्राथमिक स्कूल हैं। तीनों मानसून में बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। स्कूलों में तीन से चार फीट तक पानी भरा हुआ है जिससे पढ़ाई ठप हो गई है। बरसात और सेम के पानी ने स्कूल प्रांगण को तालाब बना दिया है। शौचालयों की गंदगी बरसाती पानी के साथ कक्षाओं और प्रांगण में घुस जाती है। इससे सड़ांध फैलती है। इन स्कूलों में 150 से अधिक बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं।
स्कूल इंचार्ज राजेश महिया की मानें तो गांव के तीनों स्कूल मानसून और सेम से परेशान हैं। स्कूल भवनों की नींव तक जर्जर होने का खतरा बना रहता है। मानसून के समय में ग्राम पंचायत और ग्रामीणों के सहयोग से पानी निकाला जाता है। बच्चों की पढ़ाई गांव के मंदिरों या शेड में शिफ्ट करनी पड़ती है। यह हर साल की कहानी है। प्रशासन को सेम की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए योजना बनानी चाहिए। संवाद
बॉक्स
इन क्षेत्रों से रूट होता है डायवर्ट
ग्रामीणों के अनुसार, सिरसा भादरा रोड पर तकरीबन तीन से चार फीट तक पानी भर जाता है। ऐसे में नाथूसरी चोपटा से दड़बा कलां तक यातायात को डायवर्ट करना पड़ता है। दो महीने तक यही हालात बने रहते हैं। बारिश और सेम के कारण ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। वाहन चालकों को करीब 15 किलोमीटर अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ती है। सिरसा से भादरा की तरफ आने वाले वाहन चालकों को दड़बा कलां से रुपाणा खुर्द, लुदेसर होते हुए नाथूसरी चोपटा आना पड़ता है।
बहुतकनीकी संस्थान के पास से गुजरता ड्रेन बना आफत
राजकीय बहुतकनीकी संस्थान में तकरीबन 1000 विद्यार्थी विभिन्न कोर्सों में प्रशिक्षण लेते हैं। उनकी छुट्टियां कर दी जाती हैं और ऑनलाइन क्लास शिक्षक लेते हैं। खेतों से संस्थान की जमीन नीचे होने के कारण कई दिनों तक जलभराव रहता है। करीब 22 एकड़ में बने भवन में पानी भर जाता है। प्रबंधन के अनुसार, चौधरी देवीलाल राजकीय बहुतकनीकी संस्थान नाथूसरी-चोपटा-सिरसा-भादरा रोड पर स्थित है। इसके पास से हिसार घग्गर ड्रेन से नाला गुजरता है जिसका सीधा असर संस्थान पर पड़ता है। बारिश व सेम से ग्रस्त जमीन होने के कारण संस्थान के आसपास करीब 1000 हेक्टेयर जमीन में 2 से 3 फीट पानी जमा हो जाता है। बिल्डिंग हॉस्टल से लेकर कार्यालय तक में पानी जमा हो जाता है। विद्यार्थियों की छुट्टियां करनी पड़ती हैं। उनकी ऑनलाइन क्लास लगाई जाती है।
कोट्स
हिसार घग्गर ड्रेन के लिए विशेष प्लानिंग सरकार को बनानी चाहिए। यह किसानों की सबसे बड़ी चिंता है। इससे फसल से लेकर मकान तक खराब हो जाते हैं। मानसून के समय में हालात बदतर हो जाते हैं। दिन-रात मजदूरों के साथ मिलकर काम करवाना पड़ता है। डर बना रहता है कि कहीं टूट न जाए। सरकार को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।
-रीटा कासनिया, सरपंच, नाथूसरी कलां।
कोट्स
सेम के कारण भवन को हर साल नुकसान पहुंचता है। मानसून के समय 30 से 40 दिनों तक आईटीआई को बंद रखना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसलिए ऑनलाइन क्लास लेते हैं। सरकार को सेम की समस्या पर गंभीरता से काम करना चाहिए। जब तक विशेष प्रोजेक्ट के तहत काम नहीं होगा तब समस्या ज्यों की त्यों रहेगी। इस सेम नाले को पक्का बनाया जाए ताकि जमीनी सेम को खत्म किया जा सके।
-प्राचार्य विवेक वोहरा, आईटीआई
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मंदिरों व पंचायती शेड के नीचे लगती हैं कक्षाएं, कई दिनों तक चोपटा से जोड़ने वाला रोड हो जाता है बंद
- 10 से 15 किलोमीटर घूमकर आना पड़ता है चोपटा
- 40 दिन वर्ष 2025 में बंद था सिरसा, भादरा रोड
- 04 फीट तक आईटीआई में भर गया था पानी
फोटो- 27, 28, 29
नरेश बैनीवाल
चोपटा। चोपटा क्षेत्र में हर साल सरकारी स्कूल और आईटीआई जैसे संस्थानों में मानसून के समय में तीन से चार फीट पानी भर जाता है। सेम के कारण यह पानी कई कई दिनों तक सूखता ही नहीं है। हालात ये हो जाते हैं कि मंदिरों व चौपालों पर बच्चों की कक्षाएं लगानी पड़ती हैं। इतना ही नहीं, सरकारी संपत्ति का भी नुकसान होता है।
सिरसा से भादरा को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर तीन से चार फीट पानी देखने को मिलता है। इसके परिणामस्वरूप कई दिनों तक आवागमन बंद हो जाता है। सिरसा से कई गांवों का जुड़ाव टूट जाता है। वहीं, उच्चशिक्षा के लिए सिरसा आने वाले विद्यार्थियों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। सेम का प्रभाव सरकारी स्कूल और आईटीआई जैसे संस्थान पर देखने को मिलता है।
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मंदिरों और पंचायती शेड के नीचे लगते हैं स्कूल
गांव शक्कर मंदोरी में तीन सरकारी स्कूल राजकीय कन्या मिडिल स्कूल, राजकीय कन्या प्राथमिक स्कूल और राजकीय प्राथमिक स्कूल हैं। तीनों मानसून में बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। स्कूलों में तीन से चार फीट तक पानी भरा हुआ है जिससे पढ़ाई ठप हो गई है। बरसात और सेम के पानी ने स्कूल प्रांगण को तालाब बना दिया है। शौचालयों की गंदगी बरसाती पानी के साथ कक्षाओं और प्रांगण में घुस जाती है। इससे सड़ांध फैलती है। इन स्कूलों में 150 से अधिक बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं।
स्कूल इंचार्ज राजेश महिया की मानें तो गांव के तीनों स्कूल मानसून और सेम से परेशान हैं। स्कूल भवनों की नींव तक जर्जर होने का खतरा बना रहता है। मानसून के समय में ग्राम पंचायत और ग्रामीणों के सहयोग से पानी निकाला जाता है। बच्चों की पढ़ाई गांव के मंदिरों या शेड में शिफ्ट करनी पड़ती है। यह हर साल की कहानी है। प्रशासन को सेम की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए योजना बनानी चाहिए। संवाद
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इन क्षेत्रों से रूट होता है डायवर्ट
ग्रामीणों के अनुसार, सिरसा भादरा रोड पर तकरीबन तीन से चार फीट तक पानी भर जाता है। ऐसे में नाथूसरी चोपटा से दड़बा कलां तक यातायात को डायवर्ट करना पड़ता है। दो महीने तक यही हालात बने रहते हैं। बारिश और सेम के कारण ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। वाहन चालकों को करीब 15 किलोमीटर अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ती है। सिरसा से भादरा की तरफ आने वाले वाहन चालकों को दड़बा कलां से रुपाणा खुर्द, लुदेसर होते हुए नाथूसरी चोपटा आना पड़ता है।
बहुतकनीकी संस्थान के पास से गुजरता ड्रेन बना आफत
राजकीय बहुतकनीकी संस्थान में तकरीबन 1000 विद्यार्थी विभिन्न कोर्सों में प्रशिक्षण लेते हैं। उनकी छुट्टियां कर दी जाती हैं और ऑनलाइन क्लास शिक्षक लेते हैं। खेतों से संस्थान की जमीन नीचे होने के कारण कई दिनों तक जलभराव रहता है। करीब 22 एकड़ में बने भवन में पानी भर जाता है। प्रबंधन के अनुसार, चौधरी देवीलाल राजकीय बहुतकनीकी संस्थान नाथूसरी-चोपटा-सिरसा-भादरा रोड पर स्थित है। इसके पास से हिसार घग्गर ड्रेन से नाला गुजरता है जिसका सीधा असर संस्थान पर पड़ता है। बारिश व सेम से ग्रस्त जमीन होने के कारण संस्थान के आसपास करीब 1000 हेक्टेयर जमीन में 2 से 3 फीट पानी जमा हो जाता है। बिल्डिंग हॉस्टल से लेकर कार्यालय तक में पानी जमा हो जाता है। विद्यार्थियों की छुट्टियां करनी पड़ती हैं। उनकी ऑनलाइन क्लास लगाई जाती है।
कोट्स
हिसार घग्गर ड्रेन के लिए विशेष प्लानिंग सरकार को बनानी चाहिए। यह किसानों की सबसे बड़ी चिंता है। इससे फसल से लेकर मकान तक खराब हो जाते हैं। मानसून के समय में हालात बदतर हो जाते हैं। दिन-रात मजदूरों के साथ मिलकर काम करवाना पड़ता है। डर बना रहता है कि कहीं टूट न जाए। सरकार को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।
-रीटा कासनिया, सरपंच, नाथूसरी कलां।
कोट्स
सेम के कारण भवन को हर साल नुकसान पहुंचता है। मानसून के समय 30 से 40 दिनों तक आईटीआई को बंद रखना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसलिए ऑनलाइन क्लास लेते हैं। सरकार को सेम की समस्या पर गंभीरता से काम करना चाहिए। जब तक विशेष प्रोजेक्ट के तहत काम नहीं होगा तब समस्या ज्यों की त्यों रहेगी। इस सेम नाले को पक्का बनाया जाए ताकि जमीनी सेम को खत्म किया जा सके।
-प्राचार्य विवेक वोहरा, आईटीआई