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Sonipat News: जून में जिले में हेपेटाइटिस सी और बी के 59 मरीज मिले
Tue, 28 Jul 2026 08:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 28 Jul 2026 08:02 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस के मरीजों की पहचान के लिए तीव्र निदान जांच की सुविधा उपलब्ध है। यदि जांच में रिपोर्ट सकारात्मक आती है, तो मरीज का नमूना वायरल लोड जांच के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल खानपुर कलां भेजा जाता है। जांच रिपोर्ट के बाद जिला अस्पताल से मरीजों को मुफ्त दवाएं दी जाती हैं। हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया) और हेपेटाइटिस बी के मरीजों को एक बार में तीन माह की दवा मिलती है।
वायरल हेपेटाइटिस-बी और सी से पीड़ित मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी) चलाया जा रहा है। प्रत्येक गर्भवती महिला की हेपेटाइटिस-बी जांच कराना आवश्यक है, ताकि संक्रमण मां से नवजात तक न पहुंचे। यदि गर्भवती संक्रमित पाई जाती है, तो नवजात को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी इम्यूनोग्लोब्युलिन और हेपेटाइटिस-बी का टीका लगाया जाता है। जिले में हेपेटाइटिस सी के मरीज अधिक हैं।
सिविल सर्जन कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में हेपेटाइटिस सी के मरीजों की पहचान के लिए 7733 लोगों की जांच की गई। इसमें से 48 मरीज हेपेटाइटिस सी के मिले। वहीं, हेपेटाइटिस बी के मरीजों की पहचान के लिए जून 2026 में 9554 लोगों की जांच की गई। इसमें से 11 मरीज हेपेटाइटिस बी के पाए गए। उप सिविल सर्जन डॉ. स्वराज चौधरी ने बताया कि हेपेटाइटिस जांच के लिए लगातार स्क्रीनिंग जारी है।
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हेपेटाइटिस के लक्षण और इलाज
यह बीमारी किसी भी उम्र में और किसी को भी हो सकती है, लेकिन बच्चों में इसके होने की आशंका अत्यधिक प्रबल मानी जाती है। इसमें मुख्य रूप से रोगी का यकृत प्रभावित होता है। हेपेटाइटिस के लक्षणों में त्वचा और आंखों का पीला होना शामिल है। मूत्र का रंग गहरा पीला हो जाना, अत्यधिक थकान और उल्टी आना भी इसके लक्षण हैं। पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, भूख कम लगना और बुखार भी इसके संकेत हैं। हेपेटाइटिस सी का उपचार तीन माह तक चलता है।
हेपेटाइटिस बी की जटिलताएं और गर्भवती का टेस्ट
हेपेटाइटिस बी में कई जटिलताएं हैं। यदि वायरल लोड 20 हजार से कम हो या यकृत खराब हो, तो उपचार लंबा चलता है। हेपेटाइटिस का वायरस संक्रमित स्त्री के गर्भस्थ शिशु में भी फैल सकता है। सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए हेपेटाइटिस टेस्ट अनिवार्य कर रखा है। यह सुनिश्चित करता है कि मां से बच्चे में संक्रमण न फैले।
बचाव के प्रमुख उपाय
हेपेटाइटिस से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, खासकर शौचालय के उपयोग के बाद। दूषित पानी पीने से बचें। टैटू के लिए कीटाणु रहित सुई का इस्तेमाल करें और सुरक्षित शारीरिक संबंध बनाएं। अपने दांतों का ब्रश और उस्तरा किसी के साथ साझा न करें। डॉक्टर की दी हुई दवाइयों का अधिक खुराक न लें; शराब, तंबाकू और धूम्रपान की लत से बचें। पौष्टिक और सुपाच्य आहार लें, वजन नियंत्रित रखें तथा यकृत का भी ध्यान रखें। योग, व्यायाम और टहलने की आदत डालें।
वर्जन
जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस की पहचान करने के लिए मरीज का रेपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किया जाता है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसके खून का सैंपल वायरल लोड जांच के लिए मेडिकल कॉलेज में भेजा जाता है। हेपेटाइटिस जांच के लिए लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है। - डॉ. स्वराज चौधरी, उप सिविल सर्जन
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सोनीपत। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस के मरीजों की पहचान के लिए तीव्र निदान जांच की सुविधा उपलब्ध है। यदि जांच में रिपोर्ट सकारात्मक आती है, तो मरीज का नमूना वायरल लोड जांच के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल खानपुर कलां भेजा जाता है। जांच रिपोर्ट के बाद जिला अस्पताल से मरीजों को मुफ्त दवाएं दी जाती हैं। हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया) और हेपेटाइटिस बी के मरीजों को एक बार में तीन माह की दवा मिलती है।
वायरल हेपेटाइटिस-बी और सी से पीड़ित मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी) चलाया जा रहा है। प्रत्येक गर्भवती महिला की हेपेटाइटिस-बी जांच कराना आवश्यक है, ताकि संक्रमण मां से नवजात तक न पहुंचे। यदि गर्भवती संक्रमित पाई जाती है, तो नवजात को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी इम्यूनोग्लोब्युलिन और हेपेटाइटिस-बी का टीका लगाया जाता है। जिले में हेपेटाइटिस सी के मरीज अधिक हैं।
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सिविल सर्जन कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में हेपेटाइटिस सी के मरीजों की पहचान के लिए 7733 लोगों की जांच की गई। इसमें से 48 मरीज हेपेटाइटिस सी के मिले। वहीं, हेपेटाइटिस बी के मरीजों की पहचान के लिए जून 2026 में 9554 लोगों की जांच की गई। इसमें से 11 मरीज हेपेटाइटिस बी के पाए गए। उप सिविल सर्जन डॉ. स्वराज चौधरी ने बताया कि हेपेटाइटिस जांच के लिए लगातार स्क्रीनिंग जारी है।
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हेपेटाइटिस के लक्षण और इलाज
यह बीमारी किसी भी उम्र में और किसी को भी हो सकती है, लेकिन बच्चों में इसके होने की आशंका अत्यधिक प्रबल मानी जाती है। इसमें मुख्य रूप से रोगी का यकृत प्रभावित होता है। हेपेटाइटिस के लक्षणों में त्वचा और आंखों का पीला होना शामिल है। मूत्र का रंग गहरा पीला हो जाना, अत्यधिक थकान और उल्टी आना भी इसके लक्षण हैं। पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, भूख कम लगना और बुखार भी इसके संकेत हैं। हेपेटाइटिस सी का उपचार तीन माह तक चलता है।
हेपेटाइटिस बी की जटिलताएं और गर्भवती का टेस्ट
हेपेटाइटिस बी में कई जटिलताएं हैं। यदि वायरल लोड 20 हजार से कम हो या यकृत खराब हो, तो उपचार लंबा चलता है। हेपेटाइटिस का वायरस संक्रमित स्त्री के गर्भस्थ शिशु में भी फैल सकता है। सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए हेपेटाइटिस टेस्ट अनिवार्य कर रखा है। यह सुनिश्चित करता है कि मां से बच्चे में संक्रमण न फैले।
बचाव के प्रमुख उपाय
हेपेटाइटिस से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, खासकर शौचालय के उपयोग के बाद। दूषित पानी पीने से बचें। टैटू के लिए कीटाणु रहित सुई का इस्तेमाल करें और सुरक्षित शारीरिक संबंध बनाएं। अपने दांतों का ब्रश और उस्तरा किसी के साथ साझा न करें। डॉक्टर की दी हुई दवाइयों का अधिक खुराक न लें
वर्जन
जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस की पहचान करने के लिए मरीज का रेपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किया जाता है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसके खून का सैंपल वायरल लोड जांच के लिए मेडिकल कॉलेज में भेजा जाता है। हेपेटाइटिस जांच के लिए लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है। - डॉ. स्वराज चौधरी, उप सिविल सर्जन