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Sonipat News: घेराव कार्यक्रम से एक दिन पहले उस पर रोक लगाई, यूनियन अड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 15 Jun 2026 08:59 PM IST
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फोटो : सोनीपत के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी), मुरथल में कर्मचारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 15 जून को एक सर्कुलर जारी कर सितंबर तक रैली, रोड शो और सार्वजनिक आयोजनों पर रोक लगाने की घोषणा की है।
वहीं, कर्मचारी यूनियन ने इस आदेश को कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश बताते हुए 16 जून को प्रस्तावित घेराव और ज्ञापन कार्यक्रम को हर हाल में आयोजित करने का एलान कर दिया है।
दीनबंधु छोटूराम कर्मचारी यूनियन के प्रधान सुरेश कुमार ने कुलसचिव को भेजे पत्र में कहा है कि यूनियन ने 3 जून को ही 16 जून के शांतिपूर्ण घेराव और ज्ञापन कार्यक्रम की लिखित सूचना प्रशासन को दे दी थी। इसके बावजूद कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले प्रतिबंधात्मक सर्कुलर जारी किया जाना प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
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यूनियन का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सरकार के निर्देशों की आड़ लेकर कर्मचारियों के आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी लंबित मांगों को लेकर 12 दिनों से प्रशासन ने किसी प्रकार का संवाद स्थापित करने की पहल नहीं की है।
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। प्रदर्शन के तहत लाइब्रेरी भवन के सामने से प्रशासनिक भवन तक पैदल मार्च निकाला जाएगा और ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसमें किसी प्रकार के वाहन या काफिले का इस्तेमाल नहीं होगा।
कर्मचारी नेताओं के अनुसार प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के स्थायी कर्मचारियों के अलावा एचकेआरएन कर्मी, डीसी रेट कर्मचारी, शिक्षक, छात्र तथा हॉस्टल कर्मचारी भी शामिल होंगे।
उनका कहना है कि सरकार के निर्देशों का उद्देश्य ईंधन और संसाधनों की बचत है जबकि प्रस्तावित कार्यक्रम पैदल आयोजित किया जा रहा है। ऐसे में इस पर प्रतिबंधात्मक सर्कुलर लागू नहीं होता।
यूनियन ने यह भी तर्क दिया कि प्रदर्शन के दौरान कार्यालयों और भवनों में बिजली व अन्य संसाधनों की खपत कम होगी, जिससे संसाधनों की बचत ही होगी। कर्मचारियों ने कहा कि अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत वे 16 जून का कार्यक्रम निर्धारित समय पर आयोजित करेंगे।
सर्कुलर की टाइमिंग पर उठाए सवाल
कर्मचारी यूनियन ने प्रशासन की ओर से जारी सर्कुलर के समय को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यूनियन का कहना है कि जब आंदोलन की सूचना 3 जून को ही दे दी गई थी तो कार्यक्रम से एक दिन पहले प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करना कर्मचारियों के आंदोलन को प्रभावित करने की कोशिश प्रतीत होता है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण घेराव और ज्ञापन कार्यक्रम में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी), मुरथल में कर्मचारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 15 जून को एक सर्कुलर जारी कर सितंबर तक रैली, रोड शो और सार्वजनिक आयोजनों पर रोक लगाने की घोषणा की है।
वहीं, कर्मचारी यूनियन ने इस आदेश को कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश बताते हुए 16 जून को प्रस्तावित घेराव और ज्ञापन कार्यक्रम को हर हाल में आयोजित करने का एलान कर दिया है।
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दीनबंधु छोटूराम कर्मचारी यूनियन के प्रधान सुरेश कुमार ने कुलसचिव को भेजे पत्र में कहा है कि यूनियन ने 3 जून को ही 16 जून के शांतिपूर्ण घेराव और ज्ञापन कार्यक्रम की लिखित सूचना प्रशासन को दे दी थी। इसके बावजूद कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले प्रतिबंधात्मक सर्कुलर जारी किया जाना प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
यूनियन का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सरकार के निर्देशों की आड़ लेकर कर्मचारियों के आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी लंबित मांगों को लेकर 12 दिनों से प्रशासन ने किसी प्रकार का संवाद स्थापित करने की पहल नहीं की है।
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। प्रदर्शन के तहत लाइब्रेरी भवन के सामने से प्रशासनिक भवन तक पैदल मार्च निकाला जाएगा और ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसमें किसी प्रकार के वाहन या काफिले का इस्तेमाल नहीं होगा।
कर्मचारी नेताओं के अनुसार प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के स्थायी कर्मचारियों के अलावा एचकेआरएन कर्मी, डीसी रेट कर्मचारी, शिक्षक, छात्र तथा हॉस्टल कर्मचारी भी शामिल होंगे।
उनका कहना है कि सरकार के निर्देशों का उद्देश्य ईंधन और संसाधनों की बचत है जबकि प्रस्तावित कार्यक्रम पैदल आयोजित किया जा रहा है। ऐसे में इस पर प्रतिबंधात्मक सर्कुलर लागू नहीं होता।
यूनियन ने यह भी तर्क दिया कि प्रदर्शन के दौरान कार्यालयों और भवनों में बिजली व अन्य संसाधनों की खपत कम होगी, जिससे संसाधनों की बचत ही होगी। कर्मचारियों ने कहा कि अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत वे 16 जून का कार्यक्रम निर्धारित समय पर आयोजित करेंगे।
सर्कुलर की टाइमिंग पर उठाए सवाल
कर्मचारी यूनियन ने प्रशासन की ओर से जारी सर्कुलर के समय को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यूनियन का कहना है कि जब आंदोलन की सूचना 3 जून को ही दे दी गई थी तो कार्यक्रम से एक दिन पहले प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करना कर्मचारियों के आंदोलन को प्रभावित करने की कोशिश प्रतीत होता है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण घेराव और ज्ञापन कार्यक्रम में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।