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Sonipat News: नहर के निर्माण में भुगतान गड़बड़ी पर कार्रवाई, पांच जेई भी निलंबित
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 16 Jun 2026 01:41 AM IST
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गोहाना। भालौठ ब्रांच नहर के पुनर्निर्माण कार्य में कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए पांच जूनियर इंजीनियरों (जेई) को निलंबित कर दिया है। इससे पहले मामले में कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) प्रशांत कुमार और उपमंडल अधिकारी (एसडीओ) प्रियव्रत को भी निलंबित किया जा चुका है।
भालौठ ब्रांच नहर के आधुनिकीकरण कार्य के तहत नहर के किनारों और तल को कंक्रीट से मजबूत किया जा रहा था। हालांकि, नहर के तल को पूरी तरह कंक्रीट से बनाने के प्रस्ताव का किसानों ने विरोध किया था। किसानों का तर्क था कि इससे भूजल रिचार्ज प्रभावित होगा और क्षेत्र में जलस्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
इस मांग को लेकर किसानों ने 22 मई से निर्माण स्थल पर धरना शुरू कर दिया था। करीब दो सप्ताह तक चले आंदोलन के बाद विभाग ने किसानों की मांग मान ली और 6 जून को धरना समाप्त हुआ।
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इसी बीच किसानों की तरफ से उठाए गए सवालों के बाद विभाग ने निर्माण कार्य की दोबारा जांच और पैमाइश करवाई। जांच में सामने आया कि मौके पर हुए वास्तविक कार्य की तुलना में अधिक मात्रा दर्शाकर बिल तैयार किए गए। उसी के आधार पर निर्माण एजेंसी को भुगतान भी जारी कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि कुछ स्थानों पर कार्य पूरा हुए बिना ही उसकी पैमाइश दर्ज कर ली गई थी। इसके बाद तैयार बिलों को स्वीकृति देकर भुगतान प्रक्रिया पूरी की गई। वास्तविक कार्य और भुगतान के आंकड़ों में अंतर सामने आने पर विभाग ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करनी शुरू कर दी।
पहले चरण में एक्सईएन और एसडीओ को निलंबित किया गया था। अब जांच के दौरान जूनियर इंजीनियरों की भूमिका भी संदिग्ध पाए जाने पर पांच जेई के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।
विभाग में मामले की जांच अभी जारी है। भुगतान और तकनीकी स्वीकृति प्रक्रिया से जुड़े अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे और कार्रवाई हो सकती है।
भालौठ ब्रांच नहर के आधुनिकीकरण कार्य के तहत नहर के किनारों और तल को कंक्रीट से मजबूत किया जा रहा था। हालांकि, नहर के तल को पूरी तरह कंक्रीट से बनाने के प्रस्ताव का किसानों ने विरोध किया था। किसानों का तर्क था कि इससे भूजल रिचार्ज प्रभावित होगा और क्षेत्र में जलस्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
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इस मांग को लेकर किसानों ने 22 मई से निर्माण स्थल पर धरना शुरू कर दिया था। करीब दो सप्ताह तक चले आंदोलन के बाद विभाग ने किसानों की मांग मान ली और 6 जून को धरना समाप्त हुआ।
इसी बीच किसानों की तरफ से उठाए गए सवालों के बाद विभाग ने निर्माण कार्य की दोबारा जांच और पैमाइश करवाई। जांच में सामने आया कि मौके पर हुए वास्तविक कार्य की तुलना में अधिक मात्रा दर्शाकर बिल तैयार किए गए। उसी के आधार पर निर्माण एजेंसी को भुगतान भी जारी कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि कुछ स्थानों पर कार्य पूरा हुए बिना ही उसकी पैमाइश दर्ज कर ली गई थी। इसके बाद तैयार बिलों को स्वीकृति देकर भुगतान प्रक्रिया पूरी की गई। वास्तविक कार्य और भुगतान के आंकड़ों में अंतर सामने आने पर विभाग ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करनी शुरू कर दी।
पहले चरण में एक्सईएन और एसडीओ को निलंबित किया गया था। अब जांच के दौरान जूनियर इंजीनियरों की भूमिका भी संदिग्ध पाए जाने पर पांच जेई के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।
विभाग में मामले की जांच अभी जारी है। भुगतान और तकनीकी स्वीकृति प्रक्रिया से जुड़े अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे और कार्रवाई हो सकती है।