सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   Daughters are touching the sky, becoming self-reliant and empowered

Sonipat News: आसमां छू रहीं बेटियां, बन रहीं आत्मनिर्भर और सशक्त

संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sun, 08 Mar 2026 01:22 AM IST
विज्ञापन
Daughters are touching the sky, becoming self-reliant and empowered
मेघा दिवान। 
विज्ञापन
सोनीपत। गुजरे जमाने की बात हो गई जब नारी को अबला कहा जाता था। अब महिला अबला नहीं, बल्कि सबला है। सामाजिक ताना-बाना बहुत हद तक बदल चुका है। बहन-बेटियों की उपलब्धियों की गौरवगाथा से कोई मंच अछूता नहीं है।
Trending Videos

इस गौरव को बरकरार रखने के लिए आधी आबादी को भी बहुत समझना होगा। मिल रही आजादी के दुरुपयोग से बचना होगा। अमर उजाला के सोनीपत ब्यूरो कार्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को लेकर संवाद में विभिन्न क्षेत्रों में नाम कमा चुकी महिलाओं ने यह संदेश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

डिजिटल द्रोणाचार्य की संस्थापक और निदेशक गौरी कपूर ने कहा कि महिलाएं और आत्मनिर्भर और सशक्त हैं। उन्होंने सोनीपत का ही उदाहरण देते हुए कहा कि पहले रात 8 बजे के बाद ऐसा लगता था जैसे कर्फ्यू लगा हुआ हो। आज ऐसा नहीं है।
अब अगर मैं रात 10 बजे या इसके बाद भी घर से निकलना चाहूं तो बेफिक्र निकल सकती हूं। आज महिलाओं को ज्यादा आजादी भी मिल रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि महिलाओं को भी इस आजादी का सम्मान करना चाहिए। इसका नाजायज फायदा नहीं उठाते हुए समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने में योगदान देना चाहिए।
गृहिणी सुनीता कपूर कहती हैं कि महिला के बिना कोई दिन नहीं होता है और महिलाओं के बिना समाज की कल्पना ही नहीं की जा सकती। महिलाओं को अपनी धरोहर, बेहतर संस्कार अपने बच्चों तक पहुंचाने होंगे। उन्होंने कोमल है, कमजोर नहीं तू, शक्ति का नाम ही नारी है, नए जीवन को देने वाली, मौत भी तुझ से हारी है शायरी सुनाकर महिला की शक्ति का एहसास कराया।
संवाद में छात्राओं ने भी खुलकर अपनी बात रखी। डिजिटल मार्केटिंग की छात्रा तनु भारद्वाज, अमरीन, काजल, कोमल, मानवी, मुस्कान, वंशिका ने एक स्वर में कहा कि नारी कभी अबला नहीं थी। सामाजिक परिवेश और आत्मनिर्भरता की कमी के कारण महिलाओं ने ही स्वयं को अबला मान लिया था। आज ऐसा नहीं है।
कोई फी फिल्ड को आप देख लें लड़कियां कहीं भी लड़कों से कमतर नहीं हैं बल्कि कई जगह तो वह पुरुषों से बेहतर हैं। महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं, जिससे उन पर अबला का लगा टैग समाप्त हो गया है। छात्रा मुशरा ने कहा कि हमारे मुस्लिम मान्यता में घर वाले लड़कियों को दहलीज लांघने की इजाजत नहीं देते थे लेकिन महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर होता देख अब उनमें भी बदलाव आ रहा है।
मेरे परिवार में मेरे पहनावे, मेरी पढ़ाई और मेरे काम करने को लेकर किसी तरह की कोई रोक-टोक नहीं है। जैसे मेरे परिवार की सोच बदली है ऐसे समाज के बहुत से परिवारों में बहुत बड़ा चेंज आया है।
बिजनेस वुमन परिणीति शर्मा ने कहा कि कुछ वक्त पहले तक उनके पिता इस बात के लिए सपोर्ट नहीं करते थे कि मैं बाहर अपना कोई काम करूं लेकिन मुझे वर्क फ्राॅम होम करते देखकर और महिलाओं में बढ़ता आत्मविश्वास व आत्मनिर्भरता देखकर उनमें काफी बदलाव आया।
स्थिति यह है कि अब मेरी मां भी अपना बिजनेस करने की सोच रही हैं। इसी प्रकार छात्रा ज्योति ने कहा कि शिक्षा, कामकाज और कहीं बाहर जाने के लिए पहले महिलाओं को कतई सपोर्ट नहीं किया जाता था।
अब बहुत बड़ा बदलाव आया है। मैं अपनी ही बात करूं तो मेरे परिवार के सहयोग से अगले कुछ महीने में हायर एजुकेशन के लिए विदेश जा रही हूं। सशक्त और आत्मनिर्भर महिलाओं के कारण ही आज यह बदलाव आया है और समाज की सोच बदली है।

मेघा दिवान। 

मेघा दिवान। 

मेघा दिवान। 

मेघा दिवान। 

मेघा दिवान। 

मेघा दिवान। 

मेघा दिवान। 

मेघा दिवान। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed