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Sonipat News: वैज्ञानिक पशुपालन, जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने पर दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 05 Jun 2026 06:00 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। पशु विज्ञान केंद्र की ओर से मिशन लाइफ के तहत पर्यावरण संरक्षण और सतत पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वैज्ञानिक डॉ. गौरी चंद्रात्रे ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी दी।
आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर पशुपालक अपनी आय में वृद्धि करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान पशुपालकों को पशुओं के नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार प्रबंधन, रोग नियंत्रण एवं प्राकृतिक उपचार पद्धति के बारे में जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि पशुओं के स्वास्थ्य का सीधा प्रभाव दूध उत्पादन एवं पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। इसलिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। इस दौरान किसानों को पशुओं के गोबर एवं मूत्र के प्रभावी उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) और बायोगैस निर्माण की तकनीकों से अवगत कराया गया जिससे वह अतिरिक्त आय अर्जित करने के साथ-साथ पर्यावरण को भी स्वच्छ रख सकें।
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इस दौरान किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में भी जागरूक किया गया। हरी खाद, जैविक खेती और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) और जल संरक्षण के महत्व पर भी चर्चा की गई। किसानों को बताया गया कि जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और वर्षा जल का संरक्षण भविष्य की कृषि और पशुपालन गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हें पानी की बर्बादी रोकने तथा जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। डॉ. गौरी चंद्रात्रे ने प्रतिभागियों को मिशन लाइफ के उद्देश्यों के अनुरूप पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने की शपथ दिलाई।
सोनीपत। पशु विज्ञान केंद्र की ओर से मिशन लाइफ के तहत पर्यावरण संरक्षण और सतत पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वैज्ञानिक डॉ. गौरी चंद्रात्रे ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी दी।
आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर पशुपालक अपनी आय में वृद्धि करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान पशुपालकों को पशुओं के नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार प्रबंधन, रोग नियंत्रण एवं प्राकृतिक उपचार पद्धति के बारे में जानकारी दी गई।
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विशेषज्ञों ने बताया कि पशुओं के स्वास्थ्य का सीधा प्रभाव दूध उत्पादन एवं पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। इसलिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। इस दौरान किसानों को पशुओं के गोबर एवं मूत्र के प्रभावी उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) और बायोगैस निर्माण की तकनीकों से अवगत कराया गया जिससे वह अतिरिक्त आय अर्जित करने के साथ-साथ पर्यावरण को भी स्वच्छ रख सकें।
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कार्यक्रम में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) और जल संरक्षण के महत्व पर भी चर्चा की गई। किसानों को बताया गया कि जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और वर्षा जल का संरक्षण भविष्य की कृषि और पशुपालन गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हें पानी की बर्बादी रोकने तथा जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। डॉ. गौरी चंद्रात्रे ने प्रतिभागियों को मिशन लाइफ के उद्देश्यों के अनुरूप पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने की शपथ दिलाई।