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Sonipat News: सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाए जाने का वृतांत सुनाया
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फोटाे : सोनीपत की सिक्का काॅलोनी स्थित शिव मंदिर में आयोजित रामकथा के दौरान उपस्थित महिला
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सोनीपत। सिक्का कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में श्रीराम परिवार संस्था ने श्री सुंदरकांड पाठ, हरिनाम संकीर्तन और रामकथा का आयोजन किया। ओमप्रकाश अरोड़ा ने श्रीरामचरितमानस के किष्किंधा कांड में प्रभु श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता तथा बालि वध का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने बताया कि सीता की खोज के दौरान हनुमान ने श्रीराम की सुग्रीव से भेंट कराई। सुग्रीव ने बालि के अत्याचारों और पत्नी के अपहरण की व्यथा बताई। श्रीराम और सुग्रीव ने अग्नि को साक्षी मानकर सुख-दुख के साथी बनने का प्रण लिया। श्रीराम ने बालि के बल का प्रमाण मांगा जिसे उन्होंने सिद्ध कर दिया। श्रीराम की प्रेरणा से सुग्रीव ने किष्किंधा पहुंचकर बालि को युद्ध के लिए ललकारा।
युद्ध में श्रीराम ने छिपकर बालि के हृदय में तीर मारकर उसका वध कर दिया। मरणासन्न बालि को अपने कर्मों का बोध हुआ। श्रीराम ने उसे धर्म और ज्ञान का उपदेश दिया। बालि ने प्रभु के चरणों में शीश झुकाया, पुत्र अंगद को श्रीराम को सौंपा और प्राण त्याग दिए। इसके बाद श्रीराम की आज्ञा से सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाया गया। इस अवसर पर श्याम रहेजा, सूरज कांत, ललित बत्रा, महेश पांडे, मीनू बजाज, अशोक भुटानी, मुकेश, आनंद, मेहरचंद, महेश, रामनिवास, राजन मनचंदा, अश्विनी, विजय, धीरज और भूषण उपस्थित रहे।
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उन्होंने बताया कि सीता की खोज के दौरान हनुमान ने श्रीराम की सुग्रीव से भेंट कराई। सुग्रीव ने बालि के अत्याचारों और पत्नी के अपहरण की व्यथा बताई। श्रीराम और सुग्रीव ने अग्नि को साक्षी मानकर सुख-दुख के साथी बनने का प्रण लिया। श्रीराम ने बालि के बल का प्रमाण मांगा जिसे उन्होंने सिद्ध कर दिया। श्रीराम की प्रेरणा से सुग्रीव ने किष्किंधा पहुंचकर बालि को युद्ध के लिए ललकारा।
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युद्ध में श्रीराम ने छिपकर बालि के हृदय में तीर मारकर उसका वध कर दिया। मरणासन्न बालि को अपने कर्मों का बोध हुआ। श्रीराम ने उसे धर्म और ज्ञान का उपदेश दिया। बालि ने प्रभु के चरणों में शीश झुकाया, पुत्र अंगद को श्रीराम को सौंपा और प्राण त्याग दिए। इसके बाद श्रीराम की आज्ञा से सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाया गया। इस अवसर पर श्याम रहेजा, सूरज कांत, ललित बत्रा, महेश पांडे, मीनू बजाज, अशोक भुटानी, मुकेश, आनंद, मेहरचंद, महेश, रामनिवास, राजन मनचंदा, अश्विनी, विजय, धीरज और भूषण उपस्थित रहे।
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