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Sonipat News: पौधों से सजाया घर, प्रकृति प्रेम की मिसाल बनीं सुजाता
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फोटो :: सोनीपत के आदर्श नगर स्थित घर की बगिया में सुजाता। संवाद
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सोनीपत। बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के फैलते जंगलों के बीच आदर्श नगर निवासी सुजाता ने अपने घर को हरियाली से सजाकर प्रकृति प्रेम की अनूठी मिसाल पेश की है। उनके घर का आंगन अब किसी छोटे उपवन से कम नहीं लगता। यहां खिले फूलों की खुशबू और पौधे न केवल ताजगी देते हैं बल्कि प्रकृति के करीब रहने का अहसास भी कराती है।
सुजाता को पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का विशेष शौक है। उन्होंने अपने घर में गुड़हल, पारिजात, अपराजिता, गुलाब, गेंदा, रातरानी, तुलसी, करी पत्ता सहित कई सजावटी और औषधीय पौधे लगाए हैं। इसके अलावा बड़े पौधे, छायादार वृक्ष और दीवारों पर फैलने वाली बेलें भी उनके बगीचे की खूबसूरती बढ़ाती हैं। नियमित देखभाल, समय पर पानी देना, छंटाई और खाद डालने से उनका बगीचा वर्षभर हरा-भरा बना रहता है।
सुजाता बताती हैं कि पौधे उनके लिए केवल सजावट का साधन नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा हैं। सुबह और शाम पौधों को पानी देना, उनकी देखभाल करना और समय-समय पर छंटाई करना उनकी दिनचर्या में शामिल है। उनका मानना है कि हरियाली के बीच समय बिताने से मानसिक शांति मिलती है और तनाव कम होता है।
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वह कहती हैं कि बढ़ते प्रदूषण और घटती हरियाली को देखते हुए हर व्यक्ति को अपने घर, आंगन, छत या बालकनी में पौधे लगाने चाहिए। छोटी-सी शुरुआत से शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिल सकता है।
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सुजाता को पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का विशेष शौक है। उन्होंने अपने घर में गुड़हल, पारिजात, अपराजिता, गुलाब, गेंदा, रातरानी, तुलसी, करी पत्ता सहित कई सजावटी और औषधीय पौधे लगाए हैं। इसके अलावा बड़े पौधे, छायादार वृक्ष और दीवारों पर फैलने वाली बेलें भी उनके बगीचे की खूबसूरती बढ़ाती हैं। नियमित देखभाल, समय पर पानी देना, छंटाई और खाद डालने से उनका बगीचा वर्षभर हरा-भरा बना रहता है।
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सुजाता बताती हैं कि पौधे उनके लिए केवल सजावट का साधन नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा हैं। सुबह और शाम पौधों को पानी देना, उनकी देखभाल करना और समय-समय पर छंटाई करना उनकी दिनचर्या में शामिल है। उनका मानना है कि हरियाली के बीच समय बिताने से मानसिक शांति मिलती है और तनाव कम होता है।
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वह कहती हैं कि बढ़ते प्रदूषण और घटती हरियाली को देखते हुए हर व्यक्ति को अपने घर, आंगन, छत या बालकनी में पौधे लगाने चाहिए। छोटी-सी शुरुआत से शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिल सकता है।