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Sonipat News: सेक्टर 7 और 8 के लिए भूमि अधिग्रहण पर भू मालिकों की आपत्ति
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 25 Mar 2026 12:26 AM IST
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फोटो : सोनीपत के गन्नौर लघु सचिवालय में सेक्टर 7-8 भूमि अधिग्रहण मामले में भू-मालिकों के दावे अ
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गन्नौर। अंतरराष्ट्रीय बागवानी मंडी के सामने प्रस्तावित सेक्टर-7 और 8 के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई को लेकर मंगलवार को लघु सचिवालय में भूमि अर्जन कलेक्टर आशीष वशिष्ठ ने भू मालिकों के दावों और आपत्तियों को सुना। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे जमीन मालिकों ने अधिग्रहण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विस्तृत आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्हें नियमानुसार पूरा समय देने की मांग की।
भू मालिकों ने बताया कि 31 दिसंबर 2013 को सेक्टर-7 व 8 के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया था जबकि 6 जनवरी 2014 को इसका नोटिस समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ। उसकी प्रति उन्हें प्राप्त नहीं हुई। इसके विरोध में 13 मार्च 2014 को हाईकोर्ट में अपील की गई जिस पर 5 सितंबर 2017 को अदालत ने अधिग्रहण की धारा-4 को खारिज कर दिया।
इसके बाद सेक्टर को रद्द मान लिया गया। 11 नवंबर 2017 को रोजनामचा में भी इसे समाप्त दर्ज कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 27 अगस्त 2018 को सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट गई लेकिन वहां से कोई स्टे नहीं मिला।
21 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने मामला पुनः हाईकोर्ट को भेजते हुए छह माह में मेरिट के आधार पर निर्णय देने के निर्देश दिए। इसके बाद 27 मार्च 2025 को हाईकोर्ट ने अपने पूर्व फैसले को पलटते हुए 2013 की धारा-4 को ही बरकरार रखा। इस पर भू मालिकों ने आपत्ति जताई।
भू मालिकों का कहना है कि 15 मई 2025 को नोटिस जारी हुए और 22 मई को लड़सौली रेस्ट हाउस में सभी ने लिखित में अधिग्रहण का विरोध दर्ज कराया। बावजूद इसके 29 दिसंबर 2025 को सेक्शन-6 की कार्रवाई आगे बढ़ा दी गई।
इसके खिलाफ रमेश चंद व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की जिस पर अदालत ने 27 मार्च 2025 के हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे देते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।
भू मालिकों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 13 मार्च 2026 को अधिग्रहण की प्रक्रिया को और आगे बढ़ाते हुए सेक्शन-9 लगा दिया जिसकी सूचना उन्हें 19 मार्च को मिली जबकि बैठक 24 मार्च को रख दी गई। इससे उन्हें तैयारी का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।
उन्होंने मांग रखी कि सभी भू मालिकों को नोटिस की प्रतियां उपलब्ध करवाई जाएं। आपत्तियां दर्ज कराने के लिए कम से कम 15 दिन का समय दिया जाए ताकि वे अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें। इस पर भूमि अर्जन कलेक्टर आशीष वशिष्ठ ने भू मालिकों को उनकी मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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भू मालिकों ने बताया कि 31 दिसंबर 2013 को सेक्टर-7 व 8 के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया था जबकि 6 जनवरी 2014 को इसका नोटिस समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ। उसकी प्रति उन्हें प्राप्त नहीं हुई। इसके विरोध में 13 मार्च 2014 को हाईकोर्ट में अपील की गई जिस पर 5 सितंबर 2017 को अदालत ने अधिग्रहण की धारा-4 को खारिज कर दिया।
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इसके बाद सेक्टर को रद्द मान लिया गया। 11 नवंबर 2017 को रोजनामचा में भी इसे समाप्त दर्ज कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 27 अगस्त 2018 को सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट गई लेकिन वहां से कोई स्टे नहीं मिला।
21 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने मामला पुनः हाईकोर्ट को भेजते हुए छह माह में मेरिट के आधार पर निर्णय देने के निर्देश दिए। इसके बाद 27 मार्च 2025 को हाईकोर्ट ने अपने पूर्व फैसले को पलटते हुए 2013 की धारा-4 को ही बरकरार रखा। इस पर भू मालिकों ने आपत्ति जताई।
भू मालिकों का कहना है कि 15 मई 2025 को नोटिस जारी हुए और 22 मई को लड़सौली रेस्ट हाउस में सभी ने लिखित में अधिग्रहण का विरोध दर्ज कराया। बावजूद इसके 29 दिसंबर 2025 को सेक्शन-6 की कार्रवाई आगे बढ़ा दी गई।
इसके खिलाफ रमेश चंद व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की जिस पर अदालत ने 27 मार्च 2025 के हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे देते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।
भू मालिकों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 13 मार्च 2026 को अधिग्रहण की प्रक्रिया को और आगे बढ़ाते हुए सेक्शन-9 लगा दिया जिसकी सूचना उन्हें 19 मार्च को मिली जबकि बैठक 24 मार्च को रख दी गई। इससे उन्हें तैयारी का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।
उन्होंने मांग रखी कि सभी भू मालिकों को नोटिस की प्रतियां उपलब्ध करवाई जाएं। आपत्तियां दर्ज कराने के लिए कम से कम 15 दिन का समय दिया जाए ताकि वे अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें। इस पर भूमि अर्जन कलेक्टर आशीष वशिष्ठ ने भू मालिकों को उनकी मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।