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Sonipat News: नगर निगम मेयर चुनाव के लिए 30 लाख व पार्षद के लिए 7.5 लाख रुपये निर्धारित की अधिकतम खर्च सीमा
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 28 Apr 2026 04:37 AM IST
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सोनीपत। हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग ने मेयर व पार्षद का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की ओर से चुनाव के दौरान किए जाने वाले अधिकतम खर्च की सीमा निर्धारित की है। नगर निगम मेयर के लिए 30 लाख रुपये तथा निगम पार्षद के 7.5 लाख रुपये अधिकतम खर्च सीमा निर्धारित की है।
व्यय पर्यवेक्षक चुनाव अवधि के दौरान पूर्ण रूप से राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे और उम्मीदवारों की ओर से किए जा रहे प्रत्येक प्रकार के खर्च पर कड़ी निगरानी रखेंगे। यह जानकारी जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त नेहा सिंह ने दी।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त ने बताया कि प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन पत्र दाखिल करने की तिथि से लेकर चुनाव परिणाम घोषित होने तक प्रतिदिन अपने चुनाव व्यय का विस्तृत एवं सत्य लेखा-जोखा रखना होगा। यह लेखा-जोखा सभी संबंधित बिल, वाउचर एवं सहायक दस्तावेजों सहित दर्ज किया जाएगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अपूर्ण विवरण को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
चुनाव व्यय में शामिल मद
चुनाव प्रचार से संबंधित सभी खर्च, चाहे वह प्रत्यक्ष हों या अप्रत्यक्ष, चुनाव व्यय में शामिल किए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से प्रचार के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहन (दोपहिया, चारपहिया, मालवाहक आदि), ईंधन (डीजल, पेट्रोल, सीएनजी, एलपीजी), वाहन किराया, पंपलेट, पोस्टर, बैनर एवं अन्य प्रचार सामग्री की छपाई, समाचार पत्रों एवं अन्य माध्यमों में विज्ञापन, डाक एवं स्टेशनरी खर्च, चुनावी सभाओं एवं कार्यक्रमों का खर्च, कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराया गया भोजन, नाश्ता, चाय/कॉफी व अन्य पेय पदार्थ शामिल हैं।
व्यय सीमा उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
यदि कोई उम्मीदवार निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करता है या निर्धारित समय व तरीके से व्यय विवरण प्रस्तुत करने में विफल रहता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। आयोग ऐसे उम्मीदवार को पांच वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर सकता है। साथ ही, प्रत्येक उम्मीदवार या उनके अधिकृत प्रतिनिधि को चुनाव परिणाम घोषित होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर अपना पूर्ण व्यय विवरण उपायुक्त अथवा अधिकृत अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
नियमित निरीक्षण एवं रिपोर्टिंग
व्यय पर्यवेक्षक की ओर से प्रत्येक उम्मीदवार के व्यय रजिस्टर का निरीक्षण कम से कम प्रत्येक तीन दिन में एक बार किया जाएगा। मतदान समाप्ति के अगले दिन आयोग को विस्तृत विश्लेषणात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
सख्त निगरानी एवं कानून व्यवस्था
चुनाव अवधि के दौरान जिले में शराब की दुकानों, देसी शराब एवं आईएमएफएल के थोक विक्रेताओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इससे किसी भी उम्मीदवार की ओर से चुनाव प्रचार में शराब का उपयोग न किया जा सके। इसके लिए पुलिस विभाग के सहयोग से विशेष नाकेबंदी एवं जांच अभियान भी चलाए जाएंगे जिससे अवैध गतिविधियों पर पूर्ण अंकुश लगाया जा सके।
उम्मीदवारों के लिए जागरूकता बैठक
उम्मीदवारों को व्यय रजिस्टर के रखरखाव व नियमों की जानकारी देने के उद्देश्य से विशेष बैठक की जाएगी। इस बैठक में उम्मीदवारों व उनके प्रतिनिधियों को व्यय सीमा, रजिस्टर संधारण की प्रक्रिया, निरीक्षण की तिथियां तथा संपर्क कार्यालय की जानकारी दी जाएगी। सभी उम्मीदवारों को आधिकारिक पत्र जारी कर उन्हें उनके कानूनी दायित्वों के बारे में अवगत कराया जाएगा। इसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि उन्हें निर्धारित तिथि से पूर्व अपना व्यय विवरण जमा करना अनिवार्य है। व्यय विवरण जमा करने पर उन्हें विधिवत रसीद भी प्रदान की जाएगी।
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व्यय पर्यवेक्षक चुनाव अवधि के दौरान पूर्ण रूप से राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे और उम्मीदवारों की ओर से किए जा रहे प्रत्येक प्रकार के खर्च पर कड़ी निगरानी रखेंगे। यह जानकारी जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त नेहा सिंह ने दी।
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जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त ने बताया कि प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन पत्र दाखिल करने की तिथि से लेकर चुनाव परिणाम घोषित होने तक प्रतिदिन अपने चुनाव व्यय का विस्तृत एवं सत्य लेखा-जोखा रखना होगा। यह लेखा-जोखा सभी संबंधित बिल, वाउचर एवं सहायक दस्तावेजों सहित दर्ज किया जाएगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अपूर्ण विवरण को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
चुनाव व्यय में शामिल मद
चुनाव प्रचार से संबंधित सभी खर्च, चाहे वह प्रत्यक्ष हों या अप्रत्यक्ष, चुनाव व्यय में शामिल किए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से प्रचार के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहन (दोपहिया, चारपहिया, मालवाहक आदि), ईंधन (डीजल, पेट्रोल, सीएनजी, एलपीजी), वाहन किराया, पंपलेट, पोस्टर, बैनर एवं अन्य प्रचार सामग्री की छपाई, समाचार पत्रों एवं अन्य माध्यमों में विज्ञापन, डाक एवं स्टेशनरी खर्च, चुनावी सभाओं एवं कार्यक्रमों का खर्च, कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराया गया भोजन, नाश्ता, चाय/कॉफी व अन्य पेय पदार्थ शामिल हैं।
व्यय सीमा उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
यदि कोई उम्मीदवार निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करता है या निर्धारित समय व तरीके से व्यय विवरण प्रस्तुत करने में विफल रहता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। आयोग ऐसे उम्मीदवार को पांच वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर सकता है। साथ ही, प्रत्येक उम्मीदवार या उनके अधिकृत प्रतिनिधि को चुनाव परिणाम घोषित होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर अपना पूर्ण व्यय विवरण उपायुक्त अथवा अधिकृत अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
नियमित निरीक्षण एवं रिपोर्टिंग
व्यय पर्यवेक्षक की ओर से प्रत्येक उम्मीदवार के व्यय रजिस्टर का निरीक्षण कम से कम प्रत्येक तीन दिन में एक बार किया जाएगा। मतदान समाप्ति के अगले दिन आयोग को विस्तृत विश्लेषणात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
सख्त निगरानी एवं कानून व्यवस्था
चुनाव अवधि के दौरान जिले में शराब की दुकानों, देसी शराब एवं आईएमएफएल के थोक विक्रेताओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इससे किसी भी उम्मीदवार की ओर से चुनाव प्रचार में शराब का उपयोग न किया जा सके। इसके लिए पुलिस विभाग के सहयोग से विशेष नाकेबंदी एवं जांच अभियान भी चलाए जाएंगे जिससे अवैध गतिविधियों पर पूर्ण अंकुश लगाया जा सके।
उम्मीदवारों के लिए जागरूकता बैठक
उम्मीदवारों को व्यय रजिस्टर के रखरखाव व नियमों की जानकारी देने के उद्देश्य से विशेष बैठक की जाएगी। इस बैठक में उम्मीदवारों व उनके प्रतिनिधियों को व्यय सीमा, रजिस्टर संधारण की प्रक्रिया, निरीक्षण की तिथियां तथा संपर्क कार्यालय की जानकारी दी जाएगी। सभी उम्मीदवारों को आधिकारिक पत्र जारी कर उन्हें उनके कानूनी दायित्वों के बारे में अवगत कराया जाएगा। इसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि उन्हें निर्धारित तिथि से पूर्व अपना व्यय विवरण जमा करना अनिवार्य है। व्यय विवरण जमा करने पर उन्हें विधिवत रसीद भी प्रदान की जाएगी।

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