{"_id":"6a26b4ef229794035503747e","slug":"night-laneless-traffic-on-the-highway-heavy-vehicle-drivers-breaking-rules-sonipat-news-c-197-1-snp1001-155145-2026-06-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonipat News: हाईवे पर रात का ‘लेनलेस ट्रैफिक’, नियम तोड़ रहे भारी वाहन चालक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonipat News: हाईवे पर रात का ‘लेनलेस ट्रैफिक’, नियम तोड़ रहे भारी वाहन चालक
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 09 Jun 2026 05:55 AM IST
विज्ञापन
फोटो :: सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास लेन तोड़कर तीसरी चौथी लेन में जाता ट्रक व न
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सोनीपत। एनएच-44 पर रात अंधेरा होते ही ‘लेनलेस ट्रैफिक’ लेन का अनुशासन तोड़ देता है। भारी वाहन चालक निर्धारित पहली लेन छोड़कर तीसरी और चौथी लेन में ट्रक-ट्राले दौड़ाते नजर आते हैं। ओवरटेकिंग की होड़ में बार-बार लेन बदलने से न केवल यातायात व्यवस्था प्रभावित होता है बल्कि सड़क पर हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है।
लेन उल्लंघन पर चालान होने के बावजूद रात को हाईवे पर ‘लेनलेस ट्रैफिक’ की स्थिति सड़क पर सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। नेशनल हाईवे पर हादसों को रोकने के लिए पुलिस ने सलाह जारी कर रखी है। इसमें हाईवे पर गति सीमा का निर्धारण करने के साथ ही वाहन चालकों को अपनी लेन में चलने की हिदायत दी जाती है।
हाईवे पर चार-चार लेन हैं। इसमें पहली लेन भारी वाहन चालकों के लिए निर्धारित है। पुलिस लेन तोड़ने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर दिन में उनके चालान करती है तो दिन में सब ठीक चलता है। रात होते ही हाईवे पर पुलिस की नाकाबंदी कम हो जाती है और ट्रक व ट्राला चालक बेलगाम हो जाते हैं।
विज्ञापन
ज्यादातर ट्रक व ट्राला तीसरी व चौथी लेन में फर्राटा भरते दिखते हैं। हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों का कहना है कि भारी वाहन चालक अक्सर लेन नियमों की अनदेखी करते हुए बीच में और फास्ट लेन में चलते हैं। इससे तेज गति से चल रहे छोटे वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और कई बार दुर्घटनाओं की स्थिति भी बन जाती है।
लेन बदलने की होड़ से बढ़ रहा जोखिम
हाईवे पर सबसे चिंताजनक स्थिति ओवरटेकिंग को लेकर देखने को मिल रही है। एक ट्रक दूसरे ट्रक को ओवरटेक करने के लिए अचानक लेन बदल देता है। कई बार यह प्रक्रिया कई किलोमीटर तक चलती रहती है जिससे पीछे आने वाले वाहनों की गति प्रभावित होती है। अचानक लेन बदलने के कारण कार और अन्य हल्के वाहन चालकों को ब्रेक लगाने पड़ते हैं जिससे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ संदीप बत्रा के अनुसार हाईवे पर लेन अनुशासन सड़क सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारी वाहनों के लिए निर्धारित लेन का पालन न करना दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल है। इसके बावजूद रात के समय इस नियम की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
पहली लेन खाली, बीच की लेन पर भारी वाहनों का कब्जा
हाईवे पर कई स्थानों पर देखा जा सकता है कि भारी वाहनों के लिए निर्धारित पहली लेन अपेक्षाकृत खाली रहती है जबकि दूसरी, तीसरी और चौथी लेन पर ट्रक व ट्राले चलते नजर आते हैं। इससे तेज रफ्तार से चलने वाले छोटे वाहन अपनी निर्धारित लेन में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर पाते। रोजाना सफर करने वाले वाहन चालक सुनील कुमार, राजेश व संजीव कौशिक का कहना है कि रात के समय कई ट्रक चालक बिना इंडिकेटर दिए लेन बदलते हैं। कुछ वाहन चालक मोबाइल के इस्तेमाल और थकान की स्थिति में भी वाहन चलाते दिखाई देते हैं इससे खतरा और बढ़ जाता है।
सीसीटीवी और निगरानी बढ़ाने की मांग
हाईवे का नियमित उपयोग करने वाले वाहन चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि रात के समय विशेष निगरानी अभियान चलाया जाए। लेन नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों के चालान किए जाएं और स्पीड मॉनिटरिंग कैमरों के साथ-साथ लेन मॉनिटरिंग सिस्टम भी प्रभावी बनाया जाए। यदि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए तो सड़क हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
एनएच-44 पर लेन नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई
माह
चालान
जनवरी
559
फरवरी
391
मार्च
541
अप्रैल
400
मई
200
कुल चालान (पांच माह) : 2,091
लेन अनुशासन सड़क सुरक्षा की पहली शर्त है। भारी वाहनों को निर्धारित लेन में चलना चाहिए अन्यथा दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। पुलिस नियम तोड़ने वालों पर लगातार कार्रवाई कर रही है। रात को भी पुलिस समय-समय पर अभियान चलाकर नियम तोड़ने वालों पर सख्ती करती है। रात को लेन तोड़कर चलने वालों पर सख्ती करते हुए प्राथमिकी दर्ज करने तक का प्रावधान है। सीसीटीवी से भी निगरानी की जा रही है।
- नरेंद्र कादियान, डीसीपी सोनीपत
लेन उल्लंघन पर चालान होने के बावजूद रात को हाईवे पर ‘लेनलेस ट्रैफिक’ की स्थिति सड़क पर सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। नेशनल हाईवे पर हादसों को रोकने के लिए पुलिस ने सलाह जारी कर रखी है। इसमें हाईवे पर गति सीमा का निर्धारण करने के साथ ही वाहन चालकों को अपनी लेन में चलने की हिदायत दी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईवे पर चार-चार लेन हैं। इसमें पहली लेन भारी वाहन चालकों के लिए निर्धारित है। पुलिस लेन तोड़ने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर दिन में उनके चालान करती है तो दिन में सब ठीक चलता है। रात होते ही हाईवे पर पुलिस की नाकाबंदी कम हो जाती है और ट्रक व ट्राला चालक बेलगाम हो जाते हैं।
Trending Videos
ज्यादातर ट्रक व ट्राला तीसरी व चौथी लेन में फर्राटा भरते दिखते हैं। हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों का कहना है कि भारी वाहन चालक अक्सर लेन नियमों की अनदेखी करते हुए बीच में और फास्ट लेन में चलते हैं। इससे तेज गति से चल रहे छोटे वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और कई बार दुर्घटनाओं की स्थिति भी बन जाती है।
लेन बदलने की होड़ से बढ़ रहा जोखिम
हाईवे पर सबसे चिंताजनक स्थिति ओवरटेकिंग को लेकर देखने को मिल रही है। एक ट्रक दूसरे ट्रक को ओवरटेक करने के लिए अचानक लेन बदल देता है। कई बार यह प्रक्रिया कई किलोमीटर तक चलती रहती है जिससे पीछे आने वाले वाहनों की गति प्रभावित होती है। अचानक लेन बदलने के कारण कार और अन्य हल्के वाहन चालकों को ब्रेक लगाने पड़ते हैं जिससे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ संदीप बत्रा के अनुसार हाईवे पर लेन अनुशासन सड़क सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारी वाहनों के लिए निर्धारित लेन का पालन न करना दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल है। इसके बावजूद रात के समय इस नियम की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
पहली लेन खाली, बीच की लेन पर भारी वाहनों का कब्जा
हाईवे पर कई स्थानों पर देखा जा सकता है कि भारी वाहनों के लिए निर्धारित पहली लेन अपेक्षाकृत खाली रहती है जबकि दूसरी, तीसरी और चौथी लेन पर ट्रक व ट्राले चलते नजर आते हैं। इससे तेज रफ्तार से चलने वाले छोटे वाहन अपनी निर्धारित लेन में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर पाते। रोजाना सफर करने वाले वाहन चालक सुनील कुमार, राजेश व संजीव कौशिक का कहना है कि रात के समय कई ट्रक चालक बिना इंडिकेटर दिए लेन बदलते हैं। कुछ वाहन चालक मोबाइल के इस्तेमाल और थकान की स्थिति में भी वाहन चलाते दिखाई देते हैं इससे खतरा और बढ़ जाता है।
सीसीटीवी और निगरानी बढ़ाने की मांग
हाईवे का नियमित उपयोग करने वाले वाहन चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि रात के समय विशेष निगरानी अभियान चलाया जाए। लेन नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों के चालान किए जाएं और स्पीड मॉनिटरिंग कैमरों के साथ-साथ लेन मॉनिटरिंग सिस्टम भी प्रभावी बनाया जाए। यदि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए तो सड़क हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
एनएच-44 पर लेन नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई
माह
चालान
जनवरी
559
फरवरी
391
मार्च
541
अप्रैल
400
मई
200
कुल चालान (पांच माह) : 2,091
लेन अनुशासन सड़क सुरक्षा की पहली शर्त है। भारी वाहनों को निर्धारित लेन में चलना चाहिए अन्यथा दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। पुलिस नियम तोड़ने वालों पर लगातार कार्रवाई कर रही है। रात को भी पुलिस समय-समय पर अभियान चलाकर नियम तोड़ने वालों पर सख्ती करती है। रात को लेन तोड़कर चलने वालों पर सख्ती करते हुए प्राथमिकी दर्ज करने तक का प्रावधान है। सीसीटीवी से भी निगरानी की जा रही है।
- नरेंद्र कादियान, डीसीपी सोनीपत

फोटो :: सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास लेन तोड़कर तीसरी चौथी लेन में जाता ट्रक व न

फोटो :: सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास लेन तोड़कर तीसरी चौथी लेन में जाता ट्रक व न