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विधि का शासन और समावेशी विकास लोकतंत्र की आधारशिला : कुलपति

Fri, 17 Jul 2026 08:01 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Fri, 17 Jul 2026 08:01 PM IST
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Rule of Law and Inclusive Development are the Cornerstones of Democracy: Vice-Chancellor
फोटो : सोनीपत के डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, राई में सम्मेलन के दौरान कुलपति
संवाद न्यूज एजेंसी
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सोनीपत। डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, राई में संयुक्त अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुक्रवार को समापन हो गया। इसमें भारत सहित विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विधि विशेषज्ञों और सार्वजनिक नीति के विद्वानों ने सुशासन, लोकतंत्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), जेंडर स्टडीज, स्थानीय शासन, सार्वजनिक नीति एवं संवैधानिक विषयों पर विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना और अनुसंधान एवं ज्ञान के आदान-प्रदान के नए अवसर विकसित करना रहा।कुलपति प्रो. देविंद्र सिंह ने कहा कि विधि का शासन, समान अवसर और समावेशी विकास किसी भी लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला हैं। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत की संस्थागत प्रगति, सामाजिक समावेशन व ई-गवर्नेंस के माध्यम से नागरिकों को सशक्त बनाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से संवैधानिक मूल्यों, न्याय और समानता के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया।
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सम्मेलन के दौरान मुख्य वक्ता जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी, अटलांटा (अमेरिका) के प्रो. चार्ल्स हैंकला ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्हें प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित किया। असममित संघवाद सहित अपने शोध कार्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
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इस अवसर पर डीबीआरएएनएलयू और जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी, अटलांटा (अमेरिका) के बीच आगामी पांच वर्ष के लिए शैक्षणिक सहयोग की रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श हुआ। प्रस्तावित सहयोग के अंतर्गत संयुक्त शोध, संकाय आदान-प्रदान, छात्र विनिमय कार्यक्रम और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन एवं शोध के अवसर प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों और सरकार के बीच विश्वास ही सुशासन की सबसे बड़ी शक्ति है। कुलपति प्रो. देविन्द्र सिंह ने जानकारी दी कि सम्मेलन के लिए अफ्रीका, संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों से शोध-सार प्राप्त हुए। 10 तकनीकी सत्रों में स्थानीय शासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जेंडर स्टडीज़, लोकतांत्रिक भागीदारी, सार्वजनिक नीति, संवैधानिक शासन एवं समावेशी विकास जैसे समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों ने अपने विचार साझा किए।

कुलसचिव प्रो. आशुतोष मिश्रा ने विश्वास जताया कि इस सम्मेलन से स्थापित वैश्विक शैक्षणिक संबंध भविष्य में अनुसंधान, नवाचार, छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए आयाम स्थापित करेंगे और डीबीआरएएनएलयू को वैश्विक शैक्षणिक मानचित्र पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाएंगे।
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