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Sonipat News: सीता की विदाई का प्रसंग सुन भक्त हुए भावुक
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श्रीकृष्ण मंदिर मोहनपुरा में श्री रामकथा का श्रवण करती श्रद्धालु महिलाएं। स्रोत : संस्था
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माई सिटी रिपोर्टर
सोनीपत। श्रीराम परिवार सोनीपत की ओर से शनिवार को श्री सुंदरकांड पाठ, हरिनाम संकीर्तन एवं श्री रामकथा का आयोजन श्रीकृष्ण मंदिर, मोहनपुरा में किया गया। इस दौरान हनुमान प्राकट्य महोत्सव के उपलक्ष्य में नित्यम हनुमान का स्वरूप धारण करने के लिए अनुष्ठान पर बैठे।
संस्था प्रमुख ओमप्रकाश अरोड़ा ने सीता विदाई का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि श्रीरामचरितमानस में सीता की विदाई एक अत्यंत भावुक और मार्मिक प्रसंग है। राजा जनक और सुनैना अपनी बेटियों को विदा करते समय गहरे दुख में डूबे नजर आते हैं।
माता सुनैना का धैर्य टूट जाता है और वे जनकपुर की सखियों के साथ भावुक विदाई देती हैं जिसे संसार की रीत मानकर स्वीकार किया जाता है। सुनैना अपनी बेटियों को विदा करते समय रो रही हैं और भावुक आशीर्वाद देती है कि उनका सुहाग अचल रहे।
सीता को शृंगार से सजे देख जनक का धैर्य टूट जाता है। वे भावुक होकर उन्हें हृदय से लगा लेते हैं। विदाई के समय सीता को सास-ससुर और गुरु की सेवा करने तथा पति के रुख के अनुसार चलने की सीख दी जाती है। श्रीराम स्वयं जनक से अयोध्या लौटने की अनुमति मांगते हैं जिसे सुनकर रनिवास उदास हो जाता है।
जनक ने श्रीराम से कहा कि वे सीता को दासी नहीं बल्कि अपनी प्राणप्रिय जानकर स्नेह बनाए रखें। यह प्रसंग एक बेटी के पराए घर जाने के दुख और माता-पिता के त्याग को दर्शाता है। इस अवसर पर पवन सहगल, श्याम रहेजा, ललित बत्रा, किंशन डुडेजा, शाम मक्कड़, प्रेम चांदना, महेश पांडे, अश्विनी, राजन मनचंदा आदि उपस्थित रहे।
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सोनीपत। श्रीराम परिवार सोनीपत की ओर से शनिवार को श्री सुंदरकांड पाठ, हरिनाम संकीर्तन एवं श्री रामकथा का आयोजन श्रीकृष्ण मंदिर, मोहनपुरा में किया गया। इस दौरान हनुमान प्राकट्य महोत्सव के उपलक्ष्य में नित्यम हनुमान का स्वरूप धारण करने के लिए अनुष्ठान पर बैठे।
संस्था प्रमुख ओमप्रकाश अरोड़ा ने सीता विदाई का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि श्रीरामचरितमानस में सीता की विदाई एक अत्यंत भावुक और मार्मिक प्रसंग है। राजा जनक और सुनैना अपनी बेटियों को विदा करते समय गहरे दुख में डूबे नजर आते हैं।
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माता सुनैना का धैर्य टूट जाता है और वे जनकपुर की सखियों के साथ भावुक विदाई देती हैं जिसे संसार की रीत मानकर स्वीकार किया जाता है। सुनैना अपनी बेटियों को विदा करते समय रो रही हैं और भावुक आशीर्वाद देती है कि उनका सुहाग अचल रहे।
सीता को शृंगार से सजे देख जनक का धैर्य टूट जाता है। वे भावुक होकर उन्हें हृदय से लगा लेते हैं। विदाई के समय सीता को सास-ससुर और गुरु की सेवा करने तथा पति के रुख के अनुसार चलने की सीख दी जाती है। श्रीराम स्वयं जनक से अयोध्या लौटने की अनुमति मांगते हैं जिसे सुनकर रनिवास उदास हो जाता है।
जनक ने श्रीराम से कहा कि वे सीता को दासी नहीं बल्कि अपनी प्राणप्रिय जानकर स्नेह बनाए रखें। यह प्रसंग एक बेटी के पराए घर जाने के दुख और माता-पिता के त्याग को दर्शाता है। इस अवसर पर पवन सहगल, श्याम रहेजा, ललित बत्रा, किंशन डुडेजा, शाम मक्कड़, प्रेम चांदना, महेश पांडे, अश्विनी, राजन मनचंदा आदि उपस्थित रहे।