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Sonipat News: ठसका की 85 एकड़ वन भूमि बचाने को ग्रामीण एकजुट
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोहाना। गांव ठसका में गोचरन और वन भूमि (बणी) को बचाने के लिए ग्राम सभा की बैठक बुलाई गई। आरोप लगाया कि गांव की 85 एकड़ वन भूमि और हजारों साल पुराने जाल (स्लोवेरा) के पेड़ों को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2023 की गणना में यहां 738 जाल के पेड़ थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर 645 रह गई है।
ग्रामीणों ने मौजूदा सरपंच पूनम और उनके पति योगेश उर्फ सोनू पर बिना ग्रामीणों की सहमति के फैसले लेने के आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि नंदलाला गौशाला को पहले 5 एकड़ जमीन शर्तों के साथ दी गई थी, लेकिन बाद में 26 एकड़ जमीन 33 साल की लीज पर दे दी गई।
ग्रामीणों ने कहा कि यह भूमि गांव के पशुओं के लिए चारागाह और प्रवासी पक्षियों का बसेरा है। बणी के बीच बना तालाब भी पशु-पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। आरोप है कि पेड़ों को काटकर दबाने के मामले सामने आए हैं, जिनकी पुलिस शिकायत दी गई लेकिन जाल के पेड़ काटने में उपयोग की गई जेसीबी और पेड़ काटने में संलिप्त व्यक्तियों पर कोई करवाही आज तक नहीं हुई।
मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जहां वन विभाग ने भी इन पेड़ों को लुप्त होती प्रजाति बताया। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस बणी और पेड़ों पर स्टे ऑर्डर जारी किया।
ट्रस्ट के अध्यक्ष रामकुमार ने कहा कि अगर गांव और पंचायत इस धरोहर को संभालकर संरक्षण करें तो आने वाले समय में यह क्षेत्र वैज्ञानिकों और अगली पीढ़ी के लिए जाल (स्लोवेरा) के दुर्लभ पेड़ों का बड़ा केंद्र बन सकता है।
इस मौके पर पूर्व सरपंच राज कुमार, सूबेदार मेजर जयभगवान कोषाध्यक्ष, महासचिव नरेश कुमार, उपप्रधान नरेंद्र, पूर्व सरपंच जोनी, पूर्व पंच दिलबाग, वर्तमान में पंच शिवकुमार, रमेश कुमार, उप प्रधान नरेन्द्र, राधेश्याम शर्मा,सत्यनारायण ठेकेदार, आनंद कुमार, सचिव ओम प्रकाश, संजय शर्मा, रोहतास, बुल्ला पंडित, जयभगवान ड्राइवर व अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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वर्जन
थसका गांव की बणी (वन) में मौजूद जाल के पेड़ लुप्त होती प्रजाति में आते हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इन पेड़ों को काटने पर सख्त रोक लगाने के आदेश दिए हैं। अगर जाल के पेड़ काटने की सूचना मिलती है तो भारतीय वन अधिनियम 1927 और हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। -जय किशन, वरिष्ठ वन राज्यिक अधिकारी, गोहाना
वर्जन
हमें कोई सूचना नहीं है ग्राम सभा का आयोजन कब और किस विषय पर हुआ। लोकल पंचायत गांव में कोई भी कर सकता है। हमारे संज्ञान में ऐसी कोई बात नहीं आई। -योगेश उर्फ सोनू, सरपंच के पति
गोहाना। गांव ठसका में गोचरन और वन भूमि (बणी) को बचाने के लिए ग्राम सभा की बैठक बुलाई गई। आरोप लगाया कि गांव की 85 एकड़ वन भूमि और हजारों साल पुराने जाल (स्लोवेरा) के पेड़ों को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2023 की गणना में यहां 738 जाल के पेड़ थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर 645 रह गई है।
ग्रामीणों ने मौजूदा सरपंच पूनम और उनके पति योगेश उर्फ सोनू पर बिना ग्रामीणों की सहमति के फैसले लेने के आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि नंदलाला गौशाला को पहले 5 एकड़ जमीन शर्तों के साथ दी गई थी, लेकिन बाद में 26 एकड़ जमीन 33 साल की लीज पर दे दी गई।
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ग्रामीणों ने कहा कि यह भूमि गांव के पशुओं के लिए चारागाह और प्रवासी पक्षियों का बसेरा है। बणी के बीच बना तालाब भी पशु-पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। आरोप है कि पेड़ों को काटकर दबाने के मामले सामने आए हैं, जिनकी पुलिस शिकायत दी गई लेकिन जाल के पेड़ काटने में उपयोग की गई जेसीबी और पेड़ काटने में संलिप्त व्यक्तियों पर कोई करवाही आज तक नहीं हुई।
मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जहां वन विभाग ने भी इन पेड़ों को लुप्त होती प्रजाति बताया। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस बणी और पेड़ों पर स्टे ऑर्डर जारी किया।
ट्रस्ट के अध्यक्ष रामकुमार ने कहा कि अगर गांव और पंचायत इस धरोहर को संभालकर संरक्षण करें तो आने वाले समय में यह क्षेत्र वैज्ञानिकों और अगली पीढ़ी के लिए जाल (स्लोवेरा) के दुर्लभ पेड़ों का बड़ा केंद्र बन सकता है।
इस मौके पर पूर्व सरपंच राज कुमार, सूबेदार मेजर जयभगवान कोषाध्यक्ष, महासचिव नरेश कुमार, उपप्रधान नरेंद्र, पूर्व सरपंच जोनी, पूर्व पंच दिलबाग, वर्तमान में पंच शिवकुमार, रमेश कुमार, उप प्रधान नरेन्द्र, राधेश्याम शर्मा,सत्यनारायण ठेकेदार, आनंद कुमार, सचिव ओम प्रकाश, संजय शर्मा, रोहतास, बुल्ला पंडित, जयभगवान ड्राइवर व अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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थसका गांव की बणी (वन) में मौजूद जाल के पेड़ लुप्त होती प्रजाति में आते हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इन पेड़ों को काटने पर सख्त रोक लगाने के आदेश दिए हैं। अगर जाल के पेड़ काटने की सूचना मिलती है तो भारतीय वन अधिनियम 1927 और हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। -जय किशन, वरिष्ठ वन राज्यिक अधिकारी, गोहाना
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हमें कोई सूचना नहीं है ग्राम सभा का आयोजन कब और किस विषय पर हुआ। लोकल पंचायत गांव में कोई भी कर सकता है। हमारे संज्ञान में ऐसी कोई बात नहीं आई। -योगेश उर्फ सोनू, सरपंच के पति