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Yamuna Nagar News: रोडवेज बस की सुविधा से अभी भी महरूम 60 गांव
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 01 Feb 2026 01:17 AM IST
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हरियाणा रोडवेज बस। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। रोडवेज भले ही 574 गांवों तक बस सेवा उपलब्ध कराने का दावा कर रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी जिले के 60 गांव ऐसे हैं, जहां रोडवेज बस नहीं पहुंच पा रही। इसकी रिपोर्ट भी मुख्यालय भेजी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार इन गांवों में बस न चलने के पीछे यात्रियों की संख्या कम होना और कई स्थानों पर सड़क का तंग होना प्रमुख कारण बताया गया है। इससे इन गांवों के लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए शहर या कस्बों में जाने वाले ग्रामीणों को निजी साधनों या महंगे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
यमुनानगर रोडवेज डिपो की स्थिति भी इस दिशा में बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। वर्तमान में डिपो के पास 160 बसें हैं, जिनमें से रोजाना करीब 150 बसें ऑनरूट रहती हैं, जबकि डिपो की स्वीकृत क्षमता 250 बसों की है। यानी लगभग 100 से अधिक बसों की कमी पहले से ही है।
वहीं डिपो से फिलहाल 9 लंबे रूट और 46 लोकल रूट संचालित किए जा रहे हैं, जिनसे रोजाना 13 से 14 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। अब शेष 60 गांवों को जोड़ने के लिए अलग से रोटेशन प्लान बनाना होगा। इसके साथ ही चालकों और परिचालकों की नई ड्यूटी तय करनी पड़ेगी, जिससे मौजूदा संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।
फकीर माजरा, शाहबुदिन पुर, सिपियों वाला, जांटा वाला, डाकवाला, कोट मुकारबपुर, बनसतौर व ताहरपुर कला में यात्रियों की संख्या कम होने का कारण दिया गया। भूड़ माजरा, कोहली वाला डोई वाला, डान्डी पुर, बल्लेवाला, कन्हैया वाला, मुजैहद वाला, शाहजंहापुर, रगड माजरा, शेखू माजरा, माली माजरा, हसनपुर, लाहोरी वाला, लाक्कड, बिचपडी, दडवा व मनभर वाला गांवों में सड़क तंग होने का कारण दिया गया।
छारी, पलाका, कलेसरा, डोली, भगवान गढ़, रपडी, रोडी, दौलरा, भीलपुर व घेसपुर में यात्रियों की संख्या कम होने के कारण दिया गया। इसी प्रकार छालापुर, हबीबपुर, नाईवाला, यारा, ताहरी, शेरगढ़, सनौर, रूलाहेडी, गौलनी, सुलतानपुर, मीर मीरजापुर, पानीवाला, माजरी, ककरौनी, दरियापुर, हैबतपुर व जुड्डा जादान में भी यात्रियों की संख्या कम होने व सड़क तंग होने के कारण दिया गया है।
रोडवेज यमुनानगर के महाप्रबंधक संजय रावल का कहना है कि कई गांवों में या तो सवारी नहीं मिलती या फिर बस जाने लायक रास्ता नहीं है। फिर भी मुख्यालय से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक गांवों को रोडवेज सेवा से जोड़ा जा सके।
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यमुनानगर। रोडवेज भले ही 574 गांवों तक बस सेवा उपलब्ध कराने का दावा कर रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी जिले के 60 गांव ऐसे हैं, जहां रोडवेज बस नहीं पहुंच पा रही। इसकी रिपोर्ट भी मुख्यालय भेजी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार इन गांवों में बस न चलने के पीछे यात्रियों की संख्या कम होना और कई स्थानों पर सड़क का तंग होना प्रमुख कारण बताया गया है। इससे इन गांवों के लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए शहर या कस्बों में जाने वाले ग्रामीणों को निजी साधनों या महंगे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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यमुनानगर रोडवेज डिपो की स्थिति भी इस दिशा में बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। वर्तमान में डिपो के पास 160 बसें हैं, जिनमें से रोजाना करीब 150 बसें ऑनरूट रहती हैं, जबकि डिपो की स्वीकृत क्षमता 250 बसों की है। यानी लगभग 100 से अधिक बसों की कमी पहले से ही है।
वहीं डिपो से फिलहाल 9 लंबे रूट और 46 लोकल रूट संचालित किए जा रहे हैं, जिनसे रोजाना 13 से 14 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। अब शेष 60 गांवों को जोड़ने के लिए अलग से रोटेशन प्लान बनाना होगा। इसके साथ ही चालकों और परिचालकों की नई ड्यूटी तय करनी पड़ेगी, जिससे मौजूदा संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।
फकीर माजरा, शाहबुदिन पुर, सिपियों वाला, जांटा वाला, डाकवाला, कोट मुकारबपुर, बनसतौर व ताहरपुर कला में यात्रियों की संख्या कम होने का कारण दिया गया। भूड़ माजरा, कोहली वाला डोई वाला, डान्डी पुर, बल्लेवाला, कन्हैया वाला, मुजैहद वाला, शाहजंहापुर, रगड माजरा, शेखू माजरा, माली माजरा, हसनपुर, लाहोरी वाला, लाक्कड, बिचपडी, दडवा व मनभर वाला गांवों में सड़क तंग होने का कारण दिया गया।
छारी, पलाका, कलेसरा, डोली, भगवान गढ़, रपडी, रोडी, दौलरा, भीलपुर व घेसपुर में यात्रियों की संख्या कम होने के कारण दिया गया। इसी प्रकार छालापुर, हबीबपुर, नाईवाला, यारा, ताहरी, शेरगढ़, सनौर, रूलाहेडी, गौलनी, सुलतानपुर, मीर मीरजापुर, पानीवाला, माजरी, ककरौनी, दरियापुर, हैबतपुर व जुड्डा जादान में भी यात्रियों की संख्या कम होने व सड़क तंग होने के कारण दिया गया है।
रोडवेज यमुनानगर के महाप्रबंधक संजय रावल का कहना है कि कई गांवों में या तो सवारी नहीं मिलती या फिर बस जाने लायक रास्ता नहीं है। फिर भी मुख्यालय से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक गांवों को रोडवेज सेवा से जोड़ा जा सके।
