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Yamuna Nagar News: डंपर की टक्कर से दंपती और चार साल के बेटे की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 03 Feb 2026 01:47 AM IST
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घटनास्थल पर रखा सचिन का बैग।
- फोटो : भूपेंद्र कुमार सिंह।
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सहारनपुर मार्ग पर सोमवार दोपहर सड़क हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया। पांसरा रेलवे फाटक के पास तेज रफ्तार डंपर की टक्कर से बाइक सवार एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के झबरेड़ा गांव निवासी 29 वर्षीय सचिन, उनकी 27 वर्षीय पत्नी नेहा और चार साल के बेटे नोनू की जान चली गई।
तीनों बाइक पर सवार होकर पैतृक निवास झबरेड़ा गांव जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पीछे से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि सचिन, नेहा और नोनू सड़क पर दूर जा गिरे और खून से लथपथ हो गए। राहगीरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। थाना सदर पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से तीनों को मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
थाना प्रभारी सलिंद्र कुमार ने बताया कि हादसे के बाद चालक डंपर को मौके पर ही छोड़ कर भाग गया। उसकी तलाश की जा रही है। मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम मंगलवार को कराया जाएगा, जिसके बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। हादसे की सूचना मिलते ही मृतक के परिजन अस्पताल पहुंच गए।
सचिन के बड़े भाई रोहित ने बताया कि उन्हें मीरा बाजार स्थित कपड़े की दुकान के मालिक का फोन आया था, जिसने हादसे की जानकारी दी और तुरंत ट्रामा सेंटर पहुंचने को कहा। जब वह अस्पताल पहुंचे तो तीनों की मौत की खबर मिली। रोहित ने बताया कि नेहा सात माह की गर्भवती थी। परिवार के तीन लोगों की एक साथ मौत उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सचिन यमुनानगर शहर के चिट्टा मंदिर के पास किराये पर रहता था और मीरा बाजार में कपड़े की दुकान पर काम करता था। उसकी छह साल की बेटी फिलहाल गांव में दादी के पास रहती है। सचिन अपनी पत्नी और बेटे के साथ बाइक से पैतृक आ रहा था।
डंपर को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। चालक की तलाश की जा रही है। बच्चे समेत तीनों के शव पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिए हैं। मामले की जांच की जा रही है। - प्रदीप सिंह, जांच अधिकारी, थाना सदर यमुनानगर।
लापरवाह सिस्टम ने छीन ली पूरे परिवार की जिंदगी
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सहारनपुर रोड पर सोमवार को हुआ दर्दनाक हादसा सिस्टम की लापरवाही की वह तस्वीर थी, जिसने एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान ले ली। हादसे के बाद सड़क पर बिखरा सामान, खून से सना चार साल के नोनू का बैग और सहमे हुए राहगीर इस बात की गवाही दे रहे थे कि यह मौतें टाली जा सकती थीं।
उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के झबरेड़ा निवासी 29 वर्षीय सचिन, उसकी 27 वर्षीय पत्नी नेहा और चार वर्षीय बेटे नोनू की सोमवार दोपहर जान चली गई। तीनों बाइक पर सवार होकर शहर से अपने गांव झबरेड़ा जा रहे थे। पीछे से आए तेज रफ्तार डंपर ने उन्हें कुचल दिया। गनीमत यह रही कि परिवार की छह साल की बेटी उस दिन उनके साथ नहीं थी।
वह पहले ही गांव में अपनी दादी के पास गई थी। अगर वह भी साथ होती तो शायद यह हादसा और भी भयावह रूप ले लेता। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि शुगर मिल से लेकर यमुना पुल तक सड़क के दोनों ओर खराब ट्रक लंबे समय से खड़े रहते हैं।
इसके अलावा लकड़ी मंडी में आने वाली लकड़ी से भरी ट्रालियां भी सड़क किनारे खड़ी कर दी जाती हैं। इन वाहनों की वजह से सड़क पर चलने के लिए केवल एक लेन ही बचती है। दूसरी लेन पर या तो खराब ट्रक खड़े रहते हैं या फिर मैकेनिकों का सामान बिखरा होता है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों और दोपहिया सवारों के लिए सड़क किसी मौत के जाल से कम नहीं रह जाती। इसके अलावा सड़क के दोनों तरफ कीचड़ जमा है।
प्रशासन ने ट्रक हटाने से खड़े कर दिए थे हाथ
सहारनपुर रोड पर ट्रक खड़े होने का मुद्दा 30 जनवरी को जिला सचिवालय में हुई सड़क सुरक्षा की बैठक में भी उठाया गया था। इस बैठक में प्रशासन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि शहर में कोई ट्रक अड्डा नहीं है, इसलिए ट्रकों को सड़क से हटाना मुश्किल है। सवाल यह है कि क्या ट्रक अड्डा न होने की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी होगी? सोमवार का हादसा सिस्टम की इसी लापरवाही का नतीजा बन गया। सड़क पर बिखरे सामान के बीच मासूम नोनू के खून से सने कपड़े यह याद दिलाते रहे कि अगर समय रहते ट्रकों को हटाया जाता, तो शायद आज एक परिवार उजड़ने से बच जाता।
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यमुनानगर। सहारनपुर मार्ग पर सोमवार दोपहर सड़क हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया। पांसरा रेलवे फाटक के पास तेज रफ्तार डंपर की टक्कर से बाइक सवार एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के झबरेड़ा गांव निवासी 29 वर्षीय सचिन, उनकी 27 वर्षीय पत्नी नेहा और चार साल के बेटे नोनू की जान चली गई।
तीनों बाइक पर सवार होकर पैतृक निवास झबरेड़ा गांव जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पीछे से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि सचिन, नेहा और नोनू सड़क पर दूर जा गिरे और खून से लथपथ हो गए। राहगीरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। थाना सदर पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से तीनों को मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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थाना प्रभारी सलिंद्र कुमार ने बताया कि हादसे के बाद चालक डंपर को मौके पर ही छोड़ कर भाग गया। उसकी तलाश की जा रही है। मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम मंगलवार को कराया जाएगा, जिसके बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। हादसे की सूचना मिलते ही मृतक के परिजन अस्पताल पहुंच गए।
सचिन के बड़े भाई रोहित ने बताया कि उन्हें मीरा बाजार स्थित कपड़े की दुकान के मालिक का फोन आया था, जिसने हादसे की जानकारी दी और तुरंत ट्रामा सेंटर पहुंचने को कहा। जब वह अस्पताल पहुंचे तो तीनों की मौत की खबर मिली। रोहित ने बताया कि नेहा सात माह की गर्भवती थी। परिवार के तीन लोगों की एक साथ मौत उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सचिन यमुनानगर शहर के चिट्टा मंदिर के पास किराये पर रहता था और मीरा बाजार में कपड़े की दुकान पर काम करता था। उसकी छह साल की बेटी फिलहाल गांव में दादी के पास रहती है। सचिन अपनी पत्नी और बेटे के साथ बाइक से पैतृक आ रहा था।
डंपर को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। चालक की तलाश की जा रही है। बच्चे समेत तीनों के शव पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिए हैं। मामले की जांच की जा रही है। - प्रदीप सिंह, जांच अधिकारी, थाना सदर यमुनानगर।
लापरवाह सिस्टम ने छीन ली पूरे परिवार की जिंदगी
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सहारनपुर रोड पर सोमवार को हुआ दर्दनाक हादसा सिस्टम की लापरवाही की वह तस्वीर थी, जिसने एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान ले ली। हादसे के बाद सड़क पर बिखरा सामान, खून से सना चार साल के नोनू का बैग और सहमे हुए राहगीर इस बात की गवाही दे रहे थे कि यह मौतें टाली जा सकती थीं।
उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के झबरेड़ा निवासी 29 वर्षीय सचिन, उसकी 27 वर्षीय पत्नी नेहा और चार वर्षीय बेटे नोनू की सोमवार दोपहर जान चली गई। तीनों बाइक पर सवार होकर शहर से अपने गांव झबरेड़ा जा रहे थे। पीछे से आए तेज रफ्तार डंपर ने उन्हें कुचल दिया। गनीमत यह रही कि परिवार की छह साल की बेटी उस दिन उनके साथ नहीं थी।
वह पहले ही गांव में अपनी दादी के पास गई थी। अगर वह भी साथ होती तो शायद यह हादसा और भी भयावह रूप ले लेता। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि शुगर मिल से लेकर यमुना पुल तक सड़क के दोनों ओर खराब ट्रक लंबे समय से खड़े रहते हैं।
इसके अलावा लकड़ी मंडी में आने वाली लकड़ी से भरी ट्रालियां भी सड़क किनारे खड़ी कर दी जाती हैं। इन वाहनों की वजह से सड़क पर चलने के लिए केवल एक लेन ही बचती है। दूसरी लेन पर या तो खराब ट्रक खड़े रहते हैं या फिर मैकेनिकों का सामान बिखरा होता है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों और दोपहिया सवारों के लिए सड़क किसी मौत के जाल से कम नहीं रह जाती। इसके अलावा सड़क के दोनों तरफ कीचड़ जमा है।
प्रशासन ने ट्रक हटाने से खड़े कर दिए थे हाथ
सहारनपुर रोड पर ट्रक खड़े होने का मुद्दा 30 जनवरी को जिला सचिवालय में हुई सड़क सुरक्षा की बैठक में भी उठाया गया था। इस बैठक में प्रशासन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि शहर में कोई ट्रक अड्डा नहीं है, इसलिए ट्रकों को सड़क से हटाना मुश्किल है। सवाल यह है कि क्या ट्रक अड्डा न होने की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी होगी? सोमवार का हादसा सिस्टम की इसी लापरवाही का नतीजा बन गया। सड़क पर बिखरे सामान के बीच मासूम नोनू के खून से सने कपड़े यह याद दिलाते रहे कि अगर समय रहते ट्रकों को हटाया जाता, तो शायद आज एक परिवार उजड़ने से बच जाता।

घटनास्थल पर रखा सचिन का बैग।- फोटो : भूपेंद्र कुमार सिंह।

घटनास्थल पर रखा सचिन का बैग।- फोटो : भूपेंद्र कुमार सिंह।
