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Yamuna Nagar News: वाणिज्यिक सिलिंडर महंगा, थाली के दाम 20 प्रतिशत बढ़े
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 04 May 2026 01:31 AM IST
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यमुनानगर में ढाबे पर ग्राहकों के लिए भोजन तैयार करते कर्मचारी। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। वाणिज्यिक गैस सिलिंडर और पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब जिले के ढाबों और रेस्टोरेंट पर साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ती लागत के चलते कई ढाबा, रेस्टोरेंट संचालकों ने थाली और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं, जिससे आम आदमी के लिए बाहर खाना महंगा हो गया है।
रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों का कहना है कि सिलिंडर व पीएनजी महंगी होने से खाना बनाना पहले के मुकाबले काफी महंगा पड़ रहा है। जिन ढाबों का पीएनजी बिल पहले करीब 60 हजार रुपये आता था, वह अब बढ़कर 90 से 98 हजार रुपये तक पहुंच गया है।
शहर में करीब 120 छोटे-बड़े ढाबे और रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं। संचालकों के अनुसार गैस के अलावा अन्य खाद्य सामग्री के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे रोजाना का खर्च औसतन छह हजार रुपये तक बढ़ गया है। ऐसे में लंबे समय तक पुराने रेट पर भोजन उपलब्ध कराना संभव नहीं रह गया, जिसके चलते मजबूरी में दाम बढ़ाने पड़े हैं। बढ़ती लागत का असर सिर्फ कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि मेन्यू में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। कई ढाबों और रेस्टोरेंट्स ने हाफ प्लेट वाले विकल्प बंद कर दिए हैं। पहले जहां ग्राहक 100 रुपये में हाफ प्लेट लेकर काम चला लेते थे, अब उन्हें 180 रुपये तक खर्च कर फुल प्लेट लेनी पड़ेगी।
इससे खासकर मध्यम वर्ग और मजदूर वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। गैस और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने खाद्य व्यवसाय पर गहरा असर डाला है और इसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ रहा है। आने वाले समय में यदि कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो बाहर खाना और भी महंगा हो सकता है।
10 रुपये महंगी होगी प्लेट
गोबिंदपुरी रोड पर दुकान चलाने वाले रजत गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अब तक इस उम्मीद में दाम नहीं बढ़ाए थे कि शायद गैस की कीमतें कम हो जाएं, लेकिन लगातार बढ़ोतरी के कारण अब नुकसान सहना मुश्किल हो गया है। छोले-चावल की प्लेट, जो पहले 40 रुपये में मिलती थी, अब 50 रुपये में देनी पड़ेगी। वहीं चाय के दाम भी पहले ही पांच रुपये बढ़ाए जा चुके हैं। उनका यह भी कहना है कि यदि वाणिज्यिक सिलिंडर के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो घरेलू गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी बढ़ सकती है। कई लोग सस्ते घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल व्यवसायिक रूप से करने लगेंगे, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
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यमुनानगर। वाणिज्यिक गैस सिलिंडर और पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब जिले के ढाबों और रेस्टोरेंट पर साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ती लागत के चलते कई ढाबा, रेस्टोरेंट संचालकों ने थाली और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं, जिससे आम आदमी के लिए बाहर खाना महंगा हो गया है।
रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों का कहना है कि सिलिंडर व पीएनजी महंगी होने से खाना बनाना पहले के मुकाबले काफी महंगा पड़ रहा है। जिन ढाबों का पीएनजी बिल पहले करीब 60 हजार रुपये आता था, वह अब बढ़कर 90 से 98 हजार रुपये तक पहुंच गया है।
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शहर में करीब 120 छोटे-बड़े ढाबे और रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं। संचालकों के अनुसार गैस के अलावा अन्य खाद्य सामग्री के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे रोजाना का खर्च औसतन छह हजार रुपये तक बढ़ गया है। ऐसे में लंबे समय तक पुराने रेट पर भोजन उपलब्ध कराना संभव नहीं रह गया, जिसके चलते मजबूरी में दाम बढ़ाने पड़े हैं। बढ़ती लागत का असर सिर्फ कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि मेन्यू में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। कई ढाबों और रेस्टोरेंट्स ने हाफ प्लेट वाले विकल्प बंद कर दिए हैं। पहले जहां ग्राहक 100 रुपये में हाफ प्लेट लेकर काम चला लेते थे, अब उन्हें 180 रुपये तक खर्च कर फुल प्लेट लेनी पड़ेगी।
इससे खासकर मध्यम वर्ग और मजदूर वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। गैस और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने खाद्य व्यवसाय पर गहरा असर डाला है और इसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ रहा है। आने वाले समय में यदि कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो बाहर खाना और भी महंगा हो सकता है।
10 रुपये महंगी होगी प्लेट
गोबिंदपुरी रोड पर दुकान चलाने वाले रजत गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अब तक इस उम्मीद में दाम नहीं बढ़ाए थे कि शायद गैस की कीमतें कम हो जाएं, लेकिन लगातार बढ़ोतरी के कारण अब नुकसान सहना मुश्किल हो गया है। छोले-चावल की प्लेट, जो पहले 40 रुपये में मिलती थी, अब 50 रुपये में देनी पड़ेगी। वहीं चाय के दाम भी पहले ही पांच रुपये बढ़ाए जा चुके हैं। उनका यह भी कहना है कि यदि वाणिज्यिक सिलिंडर के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो घरेलू गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी बढ़ सकती है। कई लोग सस्ते घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल व्यवसायिक रूप से करने लगेंगे, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

यमुनानगर में ढाबे पर ग्राहकों के लिए भोजन तैयार करते कर्मचारी। संवाद
