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Yamuna Nagar News: मिड-डे-मील का राशन एक साथ आने से भंडारण में आ रही परेशानी

संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 04 May 2026 01:26 AM IST
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Storage difficulties arising due to the simultaneous arrival of Mid-Day Meal rations
विद्यालय में मिड-डे-मील खाते बच्चे। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। विद्यालय में मिड-डे-मील की व्यवस्था चरमरा रही है। चूंकि सरकार की ओर से विद्यालयों को एक साथ सामान भेजने से भंडारण की समस्या पैदा हो गई है। हालात ऐसे हैं कि विद्यालयों के पास भंडारण की उचित व्यवस्था नहीं है। सबसे ज्यादा दिक्कत गेहूं और चावल रहने में हो रही है।
एफसीआई की ओर से तीन-चार महीने के लिए अनाज एक साथ दिया जा रहा है। इससे उन्हें सामान रखने की दिक्कत हो रही है। ऐसे में स्कूलों ने अपने स्तर टंकियां इत्यादि लेकर व्यवस्था की है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन विद्यालयों में है जहां मिड-डे-मील खाने वाले विद्यार्थियों की संख्या अधिक है।
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इन विद्यालयों में क्विंटलों के हिसाब से अनाज दिया जाता है, जिसके भंडारण में दिक्कत हो रही है। अधिकांश विद्यालयों के पास ज्यादा जगह नहीं है। विद्यालयों में रसोई छोटी है और इसमें सामान ज्यादा रखने की दिक्कत रहती है। इस कारण वर्कर्स और शिक्षकों को राशन जमीन पर ही रखना पड़ जाता है।
इससे यह दिक्कत हो रही है कि कई बार राशन खराब हो जाता है और इसकी जिम्मेदारी विद्यालय मुखिया के सिर होती है। इससे पहले यह सामान विद्यालय स्तर पर ही खरीदा जाता था। विद्यालय मुखिया व शिक्षक अपने स्तर पर स्थानीय दुकानदार से बात करते थे और देख परख कर सामान मंगवाते थे। परंतु अब ऐसा नहीं हो रहा है, जिससे उपयोग होने से पहले ही काफी सामान खराब हो जाता है।
स्कूलों में खराब हो गया था गुड़ : संजय कांबोज
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला प्रधान संजय कांबोज ने बताया कि विद्यालयों में बच्चों के भोजन के लिए सरकार की ओर से गुड़ भेजा गया था। विद्यालयों में गुड़ दो महीने के लिए एक साथ ही गुड़ दे दिया गया। कई विद्यालयों में तीन-तीन क्विंटल गुड़ की सप्लाई दी गई थी। अब गुड़ रखने की विद्यालयों में व्यवस्था नहीं थी। सही भंडारण न होने के कारण गुड़ में चिंटियां और मकौड़े पड़ गए। कई स्थानों पर गुड़ पिंघल गया और तरल बनने लगा। इससे बना भोजन बच्चों को नहीं दिया जा सकता था। अधिकांश विद्यालयों में काफी गुड़ खराब हो गया था। इसके बाद शिक्षकों ने निदेशालय से व्यवस्था पूर्व की तरह करने की मांग की थी, लेकिन कोई अमल नहीं किया गया।

विद्यालयों में भंडारण की व्यवस्था बनाने की मुखियाओं को निर्देश दिए गए हैं। सामान सरकारी एजेंसी की ओर से भेजा जाता है। सिर्फ दूध और सब्जी इत्यादि शिक्षक अपने स्तर पर खरीदते हैं। विद्यालयों में सामान रखने की व्यवस्था का निरीक्षण किया जाएगा। जहां कमियां होंगी दूर करवाई जाएंगी। अशोक राणा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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