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अहंकार सभी विकारों की जड़ : अनुपमा
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:09 AM IST
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व्यासपुर में साप्ताहिक सत्संग में प्रवचन करती साध्वी अनुपमा भारती व अन्य। प्रवक्ता
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संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में साध्वी अनुपमा भारती ने मानवीय मन के विकारों से मुक्ति के लिए बहुमूल्य आध्यात्मिक सूत्र प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि अहंकार सभी विकारों की मूल जड़ है, क्योंकि इसमें ‘मैं’ का भाव अत्यंत प्रबल हो जाता है।
साध्वी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक विशाल और मजबूत वृक्ष को जड़ों में लगी दीमक नष्ट कर देती है, उसी प्रकार अहंकार रूपी दीमक व्यक्ति के व्यक्तित्व और साधना को भीतर से खोखला कर देती है। इतिहास के महान व्यक्तित्वों की महानता के पीछे विनम्रता, धैर्य और संतुलन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रार्थना और समर्पण के प्रकाश के अभाव में ही अहंकार का अंधकार जीवन में प्रवेश करता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संसार का त्याग करना सरल है, लेकिन त्याग के अहंकार को छोड़ पाना अत्यंत कठिन है। करता भाव ही अहंकार का वास्तविक मूल है। ब्रह्मज्ञान और ध्यान साधना के मार्ग पर चलते हुए जब साधक आत्म साक्षात्कार करता है, तब उसे अनुभव होता है कि वह कर्ता नहीं है। इसी भाव के लोप होने से सेवा और विनम्रता का जन्म होता है। साध्वी ने गुरु भक्ति और पूर्ण समर्पण को अहंकार से मुक्ति का सरल उपाय बताया।
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व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में साध्वी अनुपमा भारती ने मानवीय मन के विकारों से मुक्ति के लिए बहुमूल्य आध्यात्मिक सूत्र प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि अहंकार सभी विकारों की मूल जड़ है, क्योंकि इसमें ‘मैं’ का भाव अत्यंत प्रबल हो जाता है।
साध्वी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक विशाल और मजबूत वृक्ष को जड़ों में लगी दीमक नष्ट कर देती है, उसी प्रकार अहंकार रूपी दीमक व्यक्ति के व्यक्तित्व और साधना को भीतर से खोखला कर देती है। इतिहास के महान व्यक्तित्वों की महानता के पीछे विनम्रता, धैर्य और संतुलन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रार्थना और समर्पण के प्रकाश के अभाव में ही अहंकार का अंधकार जीवन में प्रवेश करता है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि संसार का त्याग करना सरल है, लेकिन त्याग के अहंकार को छोड़ पाना अत्यंत कठिन है। करता भाव ही अहंकार का वास्तविक मूल है। ब्रह्मज्ञान और ध्यान साधना के मार्ग पर चलते हुए जब साधक आत्म साक्षात्कार करता है, तब उसे अनुभव होता है कि वह कर्ता नहीं है। इसी भाव के लोप होने से सेवा और विनम्रता का जन्म होता है। साध्वी ने गुरु भक्ति और पूर्ण समर्पण को अहंकार से मुक्ति का सरल उपाय बताया।

व्यासपुर में साप्ताहिक सत्संग में प्रवचन करती साध्वी अनुपमा भारती व अन्य। प्रवक्ता
