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भगवान भाव के भूखे, भक्तों के बुलाने पर चले आते हैं : कालिंदी

संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Thu, 30 Apr 2026 03:42 AM IST
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God is hungry for devotion, he comes when his devotees call him: Kalindi
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आरती करते श्रद्धालु। संस्थान
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जगाधरी। शहर की इंदिरा कॉलोनी के नंद लाल मैदान में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन आशुतोष महाराज की शिष्या कालिंदी भारती ने प्रभु की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि भगवान भाव के भूखे हैं,भाव से पुकारने पर वह दौड़े चले आते हैं।इस दौरान उन्होंने महाभारत युद्ध के कारणों का वर्णन किया।
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उन्होंने कहा कि भक्तों के मन में कई बार ये सवाल आता है कि युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के साथ थे पर उन्होंने महाभारत का युद्ध नहीं रोका। महाभारत की कथा में इस बात का वर्णन है कि युद्ध से पूर्व वह शांतिदूत बनकर गए और दुर्योधन जैसे दुराचारी को भी विनम्रतापूर्वक समझाया। आधे राज्य की जगह मात्र पांच गांवों में समझौता करने तक को तैयार हो गए थे। भगवान ने उसे भय दिखाया। धनहानि, जनहानि, यहां तक की सर्वनाश की खरी चेतावनी भी दे दी पर दुर्योधन नहीं माना, तो विराट रूप दिखाया।
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साम-दाम-दंड-भेद सब नीतियों से उस दुर्बुद्धि को समझाने को सन्मार्ग दिखाने की भरपूर कोशिश की। यह सभी प्रयास युद्ध रोकने के ही थे। अब परमात्मा अपनी दिव्य शक्ति से किसी की कर्म करने की स्वतंत्रता को छीनता नहीं। उसने हर निर्णय लेने व कर्म करने की पूर्ण स्वतंत्रता दी है। वे तो केवल सही राह ही दिखाता है, वह श्रीकृष्ण ने किया। लेकिन मद में अंधा दुर्योधन श्रीकृष्ण की कोई बात नहीं मानी। इस तथ्य को हम एक रोगी के उदाहरण से समझते हैं, एक रोगी जिसकी देह का एक पूरा अंग गल-सड़ चुका है। वहीं, बाकी शरीर में से विष का प्रसार कर रहा है। अब एक कुशल चिकित्सक, वैद्य सर्वप्रथम तो इस अंग का उपचार करने का यथासंभव प्रयास करता है। जब किसी भी चिकित्सा पद्धति या औषधि से यह अंग स्वस्थ नहीं होता है तो हारकर उसे एक कठोर निर्णय लेना ही पड़ता है।
लाक्षागृह की भीषण अग्नि में अपने भाइयों को झोंक देने में जिन्हें कोई संकोच नहीं, भरी सभा में माता समान भाभी को निर्वस्त्र करने का प्रयास करते हुए उनके हाथ नहीं कांपे। इसके अलावा उसने जुए की कुचालें चलकर छलपूर्वक अपने भाइयों को सारा राजपाट हड़पकर उन्हें 13 वर्ष के अज्ञात वास में धकेल दिया। इतना ही नहीं वनवास पूर्ण होने के पश्चात भी उनका साम्राज्य नहीं लौटाया। इसलिए ऐसे धन-लोलुप व दुराचारी तत्व का विनाश हो गया है। कार्यक्रम का शुभारंभ ज्योति प्रज्ज्वलित करके किया गया। इस दौरान अमर सिंह, अशोक रोहिल्ला, विपुल गर्ग, सुंदर प्रताप, राज कुमार त्यागी, प्रेम मित्तल, हरीश कुमार, सीमा गुलाटी, दिव्या सिंघल, गीता कपूर, सत्यप्रकाश, कुमार निशांत यज्ञमान रहे। संवाद
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श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आरती करते श्रद्धालु। संस्थान

श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आरती करते श्रद्धालु। संस्थान

श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आरती करते श्रद्धालु। संस्थान

श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आरती करते श्रद्धालु। संस्थान

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