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Yamuna Nagar News: धान घोटाले में बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 25 Mar 2026 01:32 AM IST
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राइस मिल में रखी धान की बोरियों की जांच करते अधिकारी। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में सामने आए करीब 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले की जांच को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। मामला दर्ज होने के चार माह बाद भी विशेष जांच टीम (एसआईटी) की कार्रवाई बेहद धीमी बनी हुई है। अब तक इस मामले में केवल तीन गिरफ्तारियां हो सकी हैं बड़े अधिकारियों तक पुलिस की कार्रवाई नहीं पहुंच पाई है।
अब तक एसआईटी ने आरोपी राइस मिलर संदीप सिंगला, हैफेड के सीनियर मैनेजर सलेंद्र और परचेज अधिकारी अनिल कुमार को ही गिरफ्तार किया है। इनमें से दो गिरफ्तारियां भी हाल ही में करीब 10 दिनों के भीतर हुई हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या जांच केवल निचले स्तर तक सीमित रह गई है। जिन अधिकारियों की निगरानी में यह घोटाला हुआ, उन तक अभी तक पुलिस नहीं पहुंच पाई है।
मामले में राइस मिलर संदीप सिंगला की पत्नी और पार्टनर रितिका सिंगला भी अभी तक गिरफ्त से बाहर है। पुलिस उनके ठिकाने का पता नहीं लगा सकी है। दूसरी ओर, विभागीय स्तर पर इस मामले में पहले ही सख्त कार्रवाई की जा चुकी है। हैफेड ने दिसंबर 2025 में यमुनानगर में तैनात सीनियर मैनेजर सलेंद्र, दो फील्ड इंस्पेक्टर राजेश और चंद्रमोहन तथा परचेज अधिकारी अनिल कुमार को निलंबित कर दिया था। इ
सके बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने एएफएसओ देवेंद्र कुमार और प्रतापनगर में तैनात इंस्पेक्टर विनोद कुमार को निलंबित किया। विभाग ने 17 मार्च को ही एएफएसओ देवेंद्र कुमार, तीन इंस्पेक्टर मनोद यादव, सविता और विनोद कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया। विभागीय जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी गेट पास इंस्पेक्टरों की आईडी से ही काटे गए थे, जिससे घोटाले में उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं।
घोटाले में शामिल अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों के नाम भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इससे पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आमतौर पर हत्या, लूट और फिरौती जैसे मामलों को कम समय में सुलझाने वाली यमुनानगर पुलिस इस बड़े आर्थिक घोटाले में अब तक जड़ तक नहीं पहुंच पाई है।
जब धान घोटाला हुआ तो केस दर्ज होने के कुछ दिन बाद ही मामले की जांच के लिए एसपी कमलदीप गोयल ने डीएसपी रजत गुलिया के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था, जिसमें सीआईए-वन इंचार्ज राजकुमार और संबंधित थाना प्रभारी को शामिल किया गया था। बाद में डीएसपी रजत गुलिया ने एसआईटी से अपना नाम वापस ले लिया, जिसके बाद डीएसपी जगाधरी राजीव मिगलानी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। चार माह बीतने के बावजूद जांच की धीमी रफ्तार और बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई न होने से कई सवाल उठ रहे हैं।
बाक्स
निदेशक ने पकड़ा था घोटाला
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक अंशज कुमार ने 13 नवंबर 2025 को प्रतापनगर स्थित संदीप सिंगला की राइस मिल का औचक निरीक्षण किया था। भौतिक सत्यापन के दौरान धान की भारी कमी पाए जाने पर जांच का दायरा बढ़ाया गया, जिसके बाद सात राइस मिलों में फैले इस बड़े घोटाले का खुलासा हुआ था।
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यमुनानगर। जिले में सामने आए करीब 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले की जांच को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। मामला दर्ज होने के चार माह बाद भी विशेष जांच टीम (एसआईटी) की कार्रवाई बेहद धीमी बनी हुई है। अब तक इस मामले में केवल तीन गिरफ्तारियां हो सकी हैं बड़े अधिकारियों तक पुलिस की कार्रवाई नहीं पहुंच पाई है।
अब तक एसआईटी ने आरोपी राइस मिलर संदीप सिंगला, हैफेड के सीनियर मैनेजर सलेंद्र और परचेज अधिकारी अनिल कुमार को ही गिरफ्तार किया है। इनमें से दो गिरफ्तारियां भी हाल ही में करीब 10 दिनों के भीतर हुई हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या जांच केवल निचले स्तर तक सीमित रह गई है। जिन अधिकारियों की निगरानी में यह घोटाला हुआ, उन तक अभी तक पुलिस नहीं पहुंच पाई है।
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मामले में राइस मिलर संदीप सिंगला की पत्नी और पार्टनर रितिका सिंगला भी अभी तक गिरफ्त से बाहर है। पुलिस उनके ठिकाने का पता नहीं लगा सकी है। दूसरी ओर, विभागीय स्तर पर इस मामले में पहले ही सख्त कार्रवाई की जा चुकी है। हैफेड ने दिसंबर 2025 में यमुनानगर में तैनात सीनियर मैनेजर सलेंद्र, दो फील्ड इंस्पेक्टर राजेश और चंद्रमोहन तथा परचेज अधिकारी अनिल कुमार को निलंबित कर दिया था। इ
सके बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने एएफएसओ देवेंद्र कुमार और प्रतापनगर में तैनात इंस्पेक्टर विनोद कुमार को निलंबित किया। विभाग ने 17 मार्च को ही एएफएसओ देवेंद्र कुमार, तीन इंस्पेक्टर मनोद यादव, सविता और विनोद कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया। विभागीय जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी गेट पास इंस्पेक्टरों की आईडी से ही काटे गए थे, जिससे घोटाले में उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं।
घोटाले में शामिल अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों के नाम भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इससे पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आमतौर पर हत्या, लूट और फिरौती जैसे मामलों को कम समय में सुलझाने वाली यमुनानगर पुलिस इस बड़े आर्थिक घोटाले में अब तक जड़ तक नहीं पहुंच पाई है।
जब धान घोटाला हुआ तो केस दर्ज होने के कुछ दिन बाद ही मामले की जांच के लिए एसपी कमलदीप गोयल ने डीएसपी रजत गुलिया के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था, जिसमें सीआईए-वन इंचार्ज राजकुमार और संबंधित थाना प्रभारी को शामिल किया गया था। बाद में डीएसपी रजत गुलिया ने एसआईटी से अपना नाम वापस ले लिया, जिसके बाद डीएसपी जगाधरी राजीव मिगलानी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। चार माह बीतने के बावजूद जांच की धीमी रफ्तार और बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई न होने से कई सवाल उठ रहे हैं।
बाक्स
निदेशक ने पकड़ा था घोटाला
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक अंशज कुमार ने 13 नवंबर 2025 को प्रतापनगर स्थित संदीप सिंगला की राइस मिल का औचक निरीक्षण किया था। भौतिक सत्यापन के दौरान धान की भारी कमी पाए जाने पर जांच का दायरा बढ़ाया गया, जिसके बाद सात राइस मिलों में फैले इस बड़े घोटाले का खुलासा हुआ था।