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Yamuna Nagar News: अब और सटीक होगी कैंसर, लीवर, पेट और टीबी रोग की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 02 Mar 2026 01:22 AM IST
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जिला नागरिक अस्पताल में आई टिश्यू प्रोसेसर मशीन। संवाद
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राजेश कुमार
यमुनानगर। राज्य के 10 जिला नागरिक अस्पतालों की लैब में यूएसए निर्मित ऑटोमेटिक वैक्यूम टिश्यू प्रोसेसर मशीनें स्थापित की जाएंगी। वही सात अस्पतालों में टिश्यू एम्बेंडिंग स्टेशन मशीनें लगाई जाएंगी। इन अत्याधुनिक मशीनों के माध्यम से कैंसर, लीवर, पेट और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की जांच अब पहले से अधिक तेज, सटीक और विश्वसनीय हो सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अंबाला सिटी, अंबाला कैंट, भिवानी, फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, जींद, पंचकूला, रोहतक और यमुनानगर के जिला अस्पतालों की लैब में ऑटोमेटिक वैक्यूम टिश्यू प्रोसेसर मशीनें स्थापित की जा रही हैं। इन मशीनों की कुल लागत दो करोड़ 23 लाख रुपये से अधिक है।
वहीं अंबाला सिटी, अटल कैंसर केयर सेंटर अंबाला कैंट, जिला अस्पताल गुरुग्राम, हिसार, जींद, पंचकूला और मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल यमुनानगर में 58 लाख 80 हजार रुपये की लागत से टिश्यू एम्बेंडिंग स्टेशन मशीनें खरीदी गई हैं।
यह मशीनें अस्पतालों में पहुंच चुकी हैं। अब केवल इन्हें इंस्टॉल किया जाना बाकी है। यह मशीन बायोप्सी से प्राप्त टिश्यू सैंपल को माइक्रोस्कोप जांच के लिए तैयार करती है। प्रक्रिया के दौरान टिश्यू से पानी निकालकर उसे विशेष रसायनों और पैराफिन वैक्स के माध्यम से सख्त ब्लॉक में बदला जाता है।
वैक्यूम तकनीक के कारण रसायन टिश्यू के भीतर गहराई तक पहुंचते हैं, जिससे कोशिकाओं की संरचना स्पष्ट बनी रहती है। इस तकनीक से कैंसर की शुरुआती अवस्था की पहचान अधिक सटीकता से की जा सकती है।
लीवर सिरोसिस, पेट के अल्सर या ट्यूमर तथा टीबी से संबंधित ऊतक संक्रमण की पुष्टि भी माइक्रोस्कोपिक जांच से संभव होती है। टिश्यू एम्बेंडिंग स्टेशन मशीन प्रोसेस किए गए टिश्यू को पैराफिन ब्लॉक में सही दिशा में सेट करने का कार्य करती है। इससे बहुत पतली स्लाइस काटना आसान होता है और माइक्रोस्कोप में स्पष्ट छवि मिलती है। सही एम्बेडिंग से रिपोर्ट की गुणवत्ता बेहतर होती है और बीमारी की पहचान में त्रुटि की संभावना घटती है। इसका मरीजों का लाभ मिलेगा। संवाद
स्वचालित होगी जांच प्रक्रिया : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि कई मामलों में रिपोर्ट आने में लंबा समय लग जाता था, जिससे उपचार शुरू करने में देरी होती थी। नई मशीनों के लगने से जांच प्रक्रिया स्वचालित होगी और कम समय में अधिक सैंपल प्रोसेस किए जा सकेंगे। इन मशीनों से लैब में स्टाफ का काम तो आसान होगा ही, वहीं मरीजों को भी उनकी रिपोर्ट जल्द मिलेगी। मशीनें आ गई हैं। जल्द ही इन्हें इंस्टॉल करवा दिया जाएगा।
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यमुनानगर। राज्य के 10 जिला नागरिक अस्पतालों की लैब में यूएसए निर्मित ऑटोमेटिक वैक्यूम टिश्यू प्रोसेसर मशीनें स्थापित की जाएंगी। वही सात अस्पतालों में टिश्यू एम्बेंडिंग स्टेशन मशीनें लगाई जाएंगी। इन अत्याधुनिक मशीनों के माध्यम से कैंसर, लीवर, पेट और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की जांच अब पहले से अधिक तेज, सटीक और विश्वसनीय हो सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अंबाला सिटी, अंबाला कैंट, भिवानी, फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, जींद, पंचकूला, रोहतक और यमुनानगर के जिला अस्पतालों की लैब में ऑटोमेटिक वैक्यूम टिश्यू प्रोसेसर मशीनें स्थापित की जा रही हैं। इन मशीनों की कुल लागत दो करोड़ 23 लाख रुपये से अधिक है।
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वहीं अंबाला सिटी, अटल कैंसर केयर सेंटर अंबाला कैंट, जिला अस्पताल गुरुग्राम, हिसार, जींद, पंचकूला और मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल यमुनानगर में 58 लाख 80 हजार रुपये की लागत से टिश्यू एम्बेंडिंग स्टेशन मशीनें खरीदी गई हैं।
यह मशीनें अस्पतालों में पहुंच चुकी हैं। अब केवल इन्हें इंस्टॉल किया जाना बाकी है। यह मशीन बायोप्सी से प्राप्त टिश्यू सैंपल को माइक्रोस्कोप जांच के लिए तैयार करती है। प्रक्रिया के दौरान टिश्यू से पानी निकालकर उसे विशेष रसायनों और पैराफिन वैक्स के माध्यम से सख्त ब्लॉक में बदला जाता है।
वैक्यूम तकनीक के कारण रसायन टिश्यू के भीतर गहराई तक पहुंचते हैं, जिससे कोशिकाओं की संरचना स्पष्ट बनी रहती है। इस तकनीक से कैंसर की शुरुआती अवस्था की पहचान अधिक सटीकता से की जा सकती है।
लीवर सिरोसिस, पेट के अल्सर या ट्यूमर तथा टीबी से संबंधित ऊतक संक्रमण की पुष्टि भी माइक्रोस्कोपिक जांच से संभव होती है। टिश्यू एम्बेंडिंग स्टेशन मशीन प्रोसेस किए गए टिश्यू को पैराफिन ब्लॉक में सही दिशा में सेट करने का कार्य करती है। इससे बहुत पतली स्लाइस काटना आसान होता है और माइक्रोस्कोप में स्पष्ट छवि मिलती है। सही एम्बेडिंग से रिपोर्ट की गुणवत्ता बेहतर होती है और बीमारी की पहचान में त्रुटि की संभावना घटती है। इसका मरीजों का लाभ मिलेगा। संवाद
स्वचालित होगी जांच प्रक्रिया : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि कई मामलों में रिपोर्ट आने में लंबा समय लग जाता था, जिससे उपचार शुरू करने में देरी होती थी। नई मशीनों के लगने से जांच प्रक्रिया स्वचालित होगी और कम समय में अधिक सैंपल प्रोसेस किए जा सकेंगे। इन मशीनों से लैब में स्टाफ का काम तो आसान होगा ही, वहीं मरीजों को भी उनकी रिपोर्ट जल्द मिलेगी। मशीनें आ गई हैं। जल्द ही इन्हें इंस्टॉल करवा दिया जाएगा।