{"_id":"6a7236aaca19da54d309af55","slug":"pathrala-track-breached-crops-submerged-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-160730-2026-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: पथराला की पटरी टूटी, फसल डूबी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: पथराला की पटरी टूटी, फसल डूबी
Wed, 05 Aug 2026 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 05 Aug 2026 12:29 AM IST
विज्ञापन
रायपुर डमौली गांव में पथराला नदीकी पटरी टूटने से खेतों में घुसा पानी। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। छछरौली क्षेत्र के गांव रायपुर डमौली में पथराला नदी की पटरी टूटने से सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई। खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। घटना के बाद किसानों में सिंचाई विभाग के प्रति गहरा रोष है।
किसान इलम सिंह, विनाेद कुमार, अमित कुमार, प्रमोद कुमार, कृपाल सिंह व बीरम पाल प्रभावित किसानों का कहना है कि बरसात के मौसम से पहले उन्होंने कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों को पटरी कमजोर होने और टूटने की आशंका से अवगत कराया था, लेकिन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
किसानों का आरोप है कि समय रहते मरम्मत कार्य कराया जाता तो आज उनकी फसलें बर्बाद नहीं होतीं।
किसानों ने बताया कि यह समस्या नई नहीं है। हर वर्ष बरसात के दौरान पथराला नदी की पटरी टूटने से खेत जलमग्न हो जाते हैं। उनका कहना है कि अब खेतों से पानी और सेम निकलने में लगभग एक वर्ष लग जाएगा, जिससे कृषि योग्य भूमि भी लंबे समय तक बंजर बनी रहेगी।
विज्ञापन
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि नुकसान के बाद हर साल पटवारी मौके पर आकर गिरदावरी तो करते हैं, लेकिन आज तक किसी भी किसान को फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला। किसानों ने प्रशासन से तत्काल राहत, उचित मुआवजा देने के साथ पथराला नदी की पटरी का स्थायी समाधान कराने की मांग उठाई है।
विज्ञापन
छछरौली। छछरौली क्षेत्र के गांव रायपुर डमौली में पथराला नदी की पटरी टूटने से सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई। खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। घटना के बाद किसानों में सिंचाई विभाग के प्रति गहरा रोष है।
किसान इलम सिंह, विनाेद कुमार, अमित कुमार, प्रमोद कुमार, कृपाल सिंह व बीरम पाल प्रभावित किसानों का कहना है कि बरसात के मौसम से पहले उन्होंने कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों को पटरी कमजोर होने और टूटने की आशंका से अवगत कराया था, लेकिन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
विज्ञापन
किसानों का आरोप है कि समय रहते मरम्मत कार्य कराया जाता तो आज उनकी फसलें बर्बाद नहीं होतीं।
किसानों ने बताया कि यह समस्या नई नहीं है। हर वर्ष बरसात के दौरान पथराला नदी की पटरी टूटने से खेत जलमग्न हो जाते हैं। उनका कहना है कि अब खेतों से पानी और सेम निकलने में लगभग एक वर्ष लग जाएगा, जिससे कृषि योग्य भूमि भी लंबे समय तक बंजर बनी रहेगी।
विज्ञापन
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि नुकसान के बाद हर साल पटवारी मौके पर आकर गिरदावरी तो करते हैं, लेकिन आज तक किसी भी किसान को फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला। किसानों ने प्रशासन से तत्काल राहत, उचित मुआवजा देने के साथ पथराला नदी की पटरी का स्थायी समाधान कराने की मांग उठाई है।