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Yamuna Nagar News: मुकारबपुर में सीबीजी प्लांट लगाने का विरोध, 15 गांवों के लोग हुए एकजुट
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 04 Feb 2026 01:41 AM IST
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मुकारबपुर में बायोगैस प्लांट का विरोध करते किसान व ग्रामीण। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। प्रदेश के पहले कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट लगाने का विरोध शुरू हो गया है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट के खिलाफ 15 गांवों के किसान और ग्रामीण खुलकर सामने आ गए हैं। भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह मोर्चा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने मंगलवार को प्लांट निर्माण की जगह पर नारेबाजी की। साथ ही एलान किया कि वे किसी भी सूरत में मुकारबपुर में इस प्लांट का निर्माण नहीं होने देंगे।
मुकारबपुर के पूर्व सरपंच बलदेव सिंह, राजेश, जसप्रीत सिंह, रमेश, जयपाल और रामकर्ण ने आरोप लगाया कि बायोगैस प्लांट लगने से आसपास के गांवों में प्रदूषण तेजी से बढ़ेगा। इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसके साथ ही मक्खी, मच्छर और अन्य जहरीले जीवों की संख्या में भारी इजाफा होगा, जिससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित होगा।
गंदगी के रिसाव से जमीन के अंदर पीने का पानी दूषित हो जाएगा। बायोगैस प्लांट से निकलने वाला कचरा, गैस और अपशिष्ट खेती योग्य भूमि, जल स्रोतों और वायु को नुकसान पहुंचाएंगे। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्लांट निर्माण में राक्षी नदी का करीब साढ़े चार कनाल रकबा शामिल कर लिया गया है।
नियमानुसार किसी भी नदी या नाले को बंद या उसके प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित नहीं किया जा सकता। चार गांव इस प्लांट के 500 मीटर के दायरे में आते हैं, जबकि दो गांव महज 250 से 300 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। इसके अलावा दो श्मशान घाट भी प्लांट के बेहद नजदीक हैं। ऐसे में प्लांट के शुरू होने के बाद इन गांवों के लोगों का यहां रहना मुश्किल हो जाएगा।
ग्रामीणों ने बताया कि 10 जनवरी को प्लांट लगाने वाली कंपनी ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया था, लेकिन ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर उसी दिन काम रुकवा दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम छछरौली भी जांच के लिए मौके पर पहुंचे थे। इसके बावजूद अब तक न तो ग्रामीणों की आपत्तियों का समाधान किया गया और न ही कोई स्पष्ट जवाब दिया गया।
बाक्स
खजूरी में आवंटित जमीन पर प्लांट बनाने की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि यदि बायोगैस प्लांट बनाना ही है तो उसे खजूरी गांव में उस स्थान पर बनाया जाए, जहां इसके लिए पहले से भूमि आवंटित की जा चुकी है। मुकारबपुर में इस परियोजना को शिफ्ट करना ग्रामीणों को किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। मुकारबपुर गांव में प्रस्तावित इस कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल को कैल गांव में आयोजित रैली के दौरान किया था। यह प्लांट प्रतिदिन 100 टन गोबर और 125 टन कचरे का प्रबंधन करेगा। करीब 10 एकड़ भूमि में बनने वाले इस प्लांट से सालाना 45 हजार मीट्रिक टन ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निपटान और 36 हजार मीट्रिक टन गोबर का उपयोग प्रस्तावित है। साथ ही प्रतिदिन 9500 मीट्रिक टन जैविक खाद के उत्पादन की योजना है। नगर निगम ने इस परियोजना को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
वर्जन:
मुकारबपुर में बायोगैस प्लांट किसी तरह का प्रदूषण नहीं फैलाएगा। विरोध कर रहे लोगों बात की जाएगी। लोगों की शंका को हर हाल में दूर किया जाएगा। - सुमन बहमनी, मेयर यमुनानगर जगाधरी नगर निगम।
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यमुनानगर। प्रदेश के पहले कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट लगाने का विरोध शुरू हो गया है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट के खिलाफ 15 गांवों के किसान और ग्रामीण खुलकर सामने आ गए हैं। भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह मोर्चा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने मंगलवार को प्लांट निर्माण की जगह पर नारेबाजी की। साथ ही एलान किया कि वे किसी भी सूरत में मुकारबपुर में इस प्लांट का निर्माण नहीं होने देंगे।
मुकारबपुर के पूर्व सरपंच बलदेव सिंह, राजेश, जसप्रीत सिंह, रमेश, जयपाल और रामकर्ण ने आरोप लगाया कि बायोगैस प्लांट लगने से आसपास के गांवों में प्रदूषण तेजी से बढ़ेगा। इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसके साथ ही मक्खी, मच्छर और अन्य जहरीले जीवों की संख्या में भारी इजाफा होगा, जिससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित होगा।
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गंदगी के रिसाव से जमीन के अंदर पीने का पानी दूषित हो जाएगा। बायोगैस प्लांट से निकलने वाला कचरा, गैस और अपशिष्ट खेती योग्य भूमि, जल स्रोतों और वायु को नुकसान पहुंचाएंगे। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्लांट निर्माण में राक्षी नदी का करीब साढ़े चार कनाल रकबा शामिल कर लिया गया है।
नियमानुसार किसी भी नदी या नाले को बंद या उसके प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित नहीं किया जा सकता। चार गांव इस प्लांट के 500 मीटर के दायरे में आते हैं, जबकि दो गांव महज 250 से 300 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। इसके अलावा दो श्मशान घाट भी प्लांट के बेहद नजदीक हैं। ऐसे में प्लांट के शुरू होने के बाद इन गांवों के लोगों का यहां रहना मुश्किल हो जाएगा।
ग्रामीणों ने बताया कि 10 जनवरी को प्लांट लगाने वाली कंपनी ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया था, लेकिन ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर उसी दिन काम रुकवा दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम छछरौली भी जांच के लिए मौके पर पहुंचे थे। इसके बावजूद अब तक न तो ग्रामीणों की आपत्तियों का समाधान किया गया और न ही कोई स्पष्ट जवाब दिया गया।
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खजूरी में आवंटित जमीन पर प्लांट बनाने की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि यदि बायोगैस प्लांट बनाना ही है तो उसे खजूरी गांव में उस स्थान पर बनाया जाए, जहां इसके लिए पहले से भूमि आवंटित की जा चुकी है। मुकारबपुर में इस परियोजना को शिफ्ट करना ग्रामीणों को किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। मुकारबपुर गांव में प्रस्तावित इस कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल को कैल गांव में आयोजित रैली के दौरान किया था। यह प्लांट प्रतिदिन 100 टन गोबर और 125 टन कचरे का प्रबंधन करेगा। करीब 10 एकड़ भूमि में बनने वाले इस प्लांट से सालाना 45 हजार मीट्रिक टन ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निपटान और 36 हजार मीट्रिक टन गोबर का उपयोग प्रस्तावित है। साथ ही प्रतिदिन 9500 मीट्रिक टन जैविक खाद के उत्पादन की योजना है। नगर निगम ने इस परियोजना को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
वर्जन:
मुकारबपुर में बायोगैस प्लांट किसी तरह का प्रदूषण नहीं फैलाएगा। विरोध कर रहे लोगों बात की जाएगी। लोगों की शंका को हर हाल में दूर किया जाएगा। - सुमन बहमनी, मेयर यमुनानगर जगाधरी नगर निगम।
