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Yamuna Nagar News: जनगणना ड्यूटी में शिक्षक, विद्यालयों का प्रवेश उत्सव फीका
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 10 Apr 2026 03:56 AM IST
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जिला शिक्षा सदन कार्यालय यमुनानगर। आर्काइव
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अभय सिंह
जगाधरी। राजकीय विद्यालयों में प्रवेश उत्सव चल रहा है, लेकिन वहां दाखिला करने के लिए शिक्षक नहीं है। जिले के करीब 3,000 शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगाई गई है और सिर्फ 600 शिक्षकों के भरोसे नामांकन अभियान है। ऐसे में प्रवेश उत्सव फीका नजर आ रहा है, चूंकि अधिकांश विद्यालयों में दाखिला करने के लिए शिक्षक नहीं है। शिक्षकों की कमी के कारण राजकीय विद्यालयों में दाखिले कम हो गए हैं और इसका लाभ निजी स्कूल संचालक उठा रहे हैं।
निजी स्कूल प्रबंधक अभिभावकों को राजकीय विद्यालयों में शिक्षक की कमी के कारण पढ़ाई न होने की बात कहकर बच्चों का दाखिला उनके स्कूल में करवाने के लिए बहला रहे हैं। यही कारण है कि प्रवेश उत्सव के 10 दिनाें में जिलेभर के राजकीय विद्यालयों में 25 फीसदी से भी कम दाखिले हुए हैं। जिले के सभी वरिष्ठ माध्यमिक, उच्च, माध्यमिक विद्यालय और प्राथमिक पाठशालाओं से करीब 3,000 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं, जिले में सभी राजकीय विद्यालयों में पिछले वर्ष के अंत तक कच्चे व पक्के कुल 3,640 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से अभी कुछ शिक्षक सेवा निवृत्त भी हो चुके हैं और करीब 10 शिक्षक अप्रैल और मई में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इससे शिक्षकों की और भी कमी हो जाएगी। जनगणना और बीएलओ ड्यूटी के लिए चयनित शिक्षकों को तीन दिन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। ऐसे में शिक्षक अभी प्रशिक्षण में व्यस्त हैं और नामांकन अभियान पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि ड्यूटी लगने के बाद जिले के दूसरे विद्यालयों से शिक्षक भेजे जा रहे हैं। अतिरिक्त ड्यूटी पर आए शिक्षकों को स्कूल रिकॉर्ड के बारे में जानकारी नहीं है। इसलिए ये शिक्षक दाखिले नहीं कर पा रहे हैं।
जिले में पहले ही करीब 1,200 शिक्षकों की कमी है। इस बीच जनगणना और बीएलओ कार्यों में ड्यूटी लगने से विद्यालयों में पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं रह गए हैं। जिले के कुल 916 राजकीय विद्यालय हैं। इसमें 592 प्राथमिक पाठशालाएं हैं। माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 211 है। वहीं, जिले में कुल 29 उच्च विद्यालय हैं और 82 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में कुल 3,640 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें 80 प्राचार्य, तीन मुख्याध्यापक, 68 माध्यमिक विद्यालय मुख्याध्यापक, 38 प्राथमिक विद्यालयों में मुख्य शिक्षक हैं। इसके अलावा कुल 1,038 पीजीटी, टीजीटी 1,258 और 1151 जेबीटी और सात वोकेशनल शिक्षक हैं। इनमें से 3,000 शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना और बीएलओ कार्यों में लगाई गई है। 18 स्कूल ऐसे हैं जिनमें एक ही शिक्षक है। संवाद
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वर्जन
जिले के लगभग सभी शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना और बीएलओ कार्यों में लगी है। ऐसे में विभाग की ओर से व्यवस्थाएं बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया बाधित न हो इसके लिए विभिन्न स्तर पर व्यवस्था की जा रही है।
अशोक राणा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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वर्जन
शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना और बीएलओ कार्यों में लगाई गई है। इससे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी हुई है, लेकिन इसका जिला, खंड और क्लस्टर स्तर पर प्रबंधन किया जा रहा है। प्रशिक्षण पर भी शिक्षकों को अलग-अलग दिन जाना है। उनके प्रशिक्षण के अनुसार व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं।
प्रेमलता बक्शी, जिला शिक्षा अधिकारी।
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जगाधरी। राजकीय विद्यालयों में प्रवेश उत्सव चल रहा है, लेकिन वहां दाखिला करने के लिए शिक्षक नहीं है। जिले के करीब 3,000 शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगाई गई है और सिर्फ 600 शिक्षकों के भरोसे नामांकन अभियान है। ऐसे में प्रवेश उत्सव फीका नजर आ रहा है, चूंकि अधिकांश विद्यालयों में दाखिला करने के लिए शिक्षक नहीं है। शिक्षकों की कमी के कारण राजकीय विद्यालयों में दाखिले कम हो गए हैं और इसका लाभ निजी स्कूल संचालक उठा रहे हैं।
निजी स्कूल प्रबंधक अभिभावकों को राजकीय विद्यालयों में शिक्षक की कमी के कारण पढ़ाई न होने की बात कहकर बच्चों का दाखिला उनके स्कूल में करवाने के लिए बहला रहे हैं। यही कारण है कि प्रवेश उत्सव के 10 दिनाें में जिलेभर के राजकीय विद्यालयों में 25 फीसदी से भी कम दाखिले हुए हैं। जिले के सभी वरिष्ठ माध्यमिक, उच्च, माध्यमिक विद्यालय और प्राथमिक पाठशालाओं से करीब 3,000 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं, जिले में सभी राजकीय विद्यालयों में पिछले वर्ष के अंत तक कच्चे व पक्के कुल 3,640 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से अभी कुछ शिक्षक सेवा निवृत्त भी हो चुके हैं और करीब 10 शिक्षक अप्रैल और मई में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इससे शिक्षकों की और भी कमी हो जाएगी। जनगणना और बीएलओ ड्यूटी के लिए चयनित शिक्षकों को तीन दिन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। ऐसे में शिक्षक अभी प्रशिक्षण में व्यस्त हैं और नामांकन अभियान पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि ड्यूटी लगने के बाद जिले के दूसरे विद्यालयों से शिक्षक भेजे जा रहे हैं। अतिरिक्त ड्यूटी पर आए शिक्षकों को स्कूल रिकॉर्ड के बारे में जानकारी नहीं है। इसलिए ये शिक्षक दाखिले नहीं कर पा रहे हैं।
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जिले में पहले ही करीब 1,200 शिक्षकों की कमी है। इस बीच जनगणना और बीएलओ कार्यों में ड्यूटी लगने से विद्यालयों में पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं रह गए हैं। जिले के कुल 916 राजकीय विद्यालय हैं। इसमें 592 प्राथमिक पाठशालाएं हैं। माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 211 है। वहीं, जिले में कुल 29 उच्च विद्यालय हैं और 82 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में कुल 3,640 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें 80 प्राचार्य, तीन मुख्याध्यापक, 68 माध्यमिक विद्यालय मुख्याध्यापक, 38 प्राथमिक विद्यालयों में मुख्य शिक्षक हैं। इसके अलावा कुल 1,038 पीजीटी, टीजीटी 1,258 और 1151 जेबीटी और सात वोकेशनल शिक्षक हैं। इनमें से 3,000 शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना और बीएलओ कार्यों में लगाई गई है। 18 स्कूल ऐसे हैं जिनमें एक ही शिक्षक है। संवाद
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जिले के लगभग सभी शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना और बीएलओ कार्यों में लगी है। ऐसे में विभाग की ओर से व्यवस्थाएं बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया बाधित न हो इसके लिए विभिन्न स्तर पर व्यवस्था की जा रही है।
अशोक राणा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
वर्जन
शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना और बीएलओ कार्यों में लगाई गई है। इससे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी हुई है, लेकिन इसका जिला, खंड और क्लस्टर स्तर पर प्रबंधन किया जा रहा है। प्रशिक्षण पर भी शिक्षकों को अलग-अलग दिन जाना है। उनके प्रशिक्षण के अनुसार व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं।
प्रेमलता बक्शी, जिला शिक्षा अधिकारी।

जिला शिक्षा सदन कार्यालय यमुनानगर। आर्काइव