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Yamuna Nagar News: मंदी की चपेट में प्लाईवुड उद्योग, 125 फैक्टरियों पर लटके ताले
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 16 Jan 2026 01:22 AM IST
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प्लाईवुड फैक्टरी की चिमनी से निकलता धुआं। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कभी उत्तर भारत में प्लाईवुड उद्योग के बड़े केंद्र के रूप में पहचाना जाने वाला यमुनानगर अब अपनी उसी पहचान को बचाने के लिए जूझ रहा है। बीते कुछ वर्षों से जारी मंदी, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और बाहरी राज्यों व देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण जिले का प्लाईवुड उद्योग गहरे संकट में फंस गया है। हालात यह हैं कि फैक्टरियों पर ताले लटक रहे हैं।
हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान जेके बिहानी के अनुसार जिले में करीब पौने 400 प्लाईवुड उद्योग स्थापित हैं, लेकिन इनमें से लगभग 125 इकाइयां अब तक बंद हो चुकी हैं। लगातार घाटा झेलने के बाद कई उद्यमियों ने यमुनानगर को अलविदा कह दिया और उत्तर प्रदेश या कर्नाटक में जाकर दोबारा अपनी इकाइयां स्थापित की हैं। इससे न केवल स्थानीय रोजगार प्रभावित हुआ है, बल्कि जिले की आर्थिक रफ्तार पर भी ब्रेक लगा है।
यमुनानगर की प्लाईवुड इंडस्ट्री मुख्य रूप से पाॅपुलर और सफेदा लकड़ी पर निर्भर है। बीते पांच वर्षों में इन दोनों लकड़ियों की कीमतों में तेज उछाल आया है। पांच साल पहले पाॅपुलर लकड़ी जहां 800 रुपये प्रति क्विंटल मिलती थी, वह अब 1400 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक है। इसी तरह सफेदा लकड़ी भी 600 रुपये से बढ़कर करीब 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक हो गई है।
कच्चे माल की महंगाई ने उत्पादन लागत को इतना बढ़ा दिया है कि उद्योगों के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है। उद्योग पर एक और बड़ा असर नेपाल से हो रहे प्लाईवुड आयात का पड़ा है।
बीते करीब एक साल से नेपाल की सस्ती प्लाईवुड बाजार में पहुंच रही है, जिससे स्थानीय उत्पादकों की मांग घट गई है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है और कई फैक्टरियों में उत्पादन घटकर महज 40 फीसदी रह गया है।
प्रदेश में प्लाईवुड उद्योग का सालाना टर्नओवर करीब 2000 करोड़ रुपये बताया जाता है। इसमें से 70 फीसदी फैक्टरियां यमुनानगर में स्थित हैं और यहां से लगभग 1400 करोड़ रुपये का कारोबार होता था। वर्तमान समय में नेपाल और केरल की फैक्टरियों के प्लाईवुड की बढ़ती मांग के चलते यमुनानगर से होने वाला निर्यात अब घटकर केवल एक तिहाई रह गया है।
उद्योग जगत का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में प्लाईवुड उद्योग और गहरे संकट में चला जाएगा।
लागत बढ़ने के कारण हो रहा घाटा : बिहानी
हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान जेके बिहानी के अनुसार पहले लकड़ी की एक ट्रॉली 80 से 90 हजार रुपये में मिल जाया करती थी, लेकिन अब उसी ट्रॉली की कीमत करीब ढाई से पौने तीन लाख रुपये तक पहुंच गई है। लागत बढ़ने के बावजूद तैयार माल की कीमतों में उतनी बढ़ोतरी नहीं हो पा रही, जिससे उद्योग लगातार घाटे में जा रहा है।
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यमुनानगर। कभी उत्तर भारत में प्लाईवुड उद्योग के बड़े केंद्र के रूप में पहचाना जाने वाला यमुनानगर अब अपनी उसी पहचान को बचाने के लिए जूझ रहा है। बीते कुछ वर्षों से जारी मंदी, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और बाहरी राज्यों व देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण जिले का प्लाईवुड उद्योग गहरे संकट में फंस गया है। हालात यह हैं कि फैक्टरियों पर ताले लटक रहे हैं।
हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान जेके बिहानी के अनुसार जिले में करीब पौने 400 प्लाईवुड उद्योग स्थापित हैं, लेकिन इनमें से लगभग 125 इकाइयां अब तक बंद हो चुकी हैं। लगातार घाटा झेलने के बाद कई उद्यमियों ने यमुनानगर को अलविदा कह दिया और उत्तर प्रदेश या कर्नाटक में जाकर दोबारा अपनी इकाइयां स्थापित की हैं। इससे न केवल स्थानीय रोजगार प्रभावित हुआ है, बल्कि जिले की आर्थिक रफ्तार पर भी ब्रेक लगा है।
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यमुनानगर की प्लाईवुड इंडस्ट्री मुख्य रूप से पाॅपुलर और सफेदा लकड़ी पर निर्भर है। बीते पांच वर्षों में इन दोनों लकड़ियों की कीमतों में तेज उछाल आया है। पांच साल पहले पाॅपुलर लकड़ी जहां 800 रुपये प्रति क्विंटल मिलती थी, वह अब 1400 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक है। इसी तरह सफेदा लकड़ी भी 600 रुपये से बढ़कर करीब 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक हो गई है।
कच्चे माल की महंगाई ने उत्पादन लागत को इतना बढ़ा दिया है कि उद्योगों के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है। उद्योग पर एक और बड़ा असर नेपाल से हो रहे प्लाईवुड आयात का पड़ा है।
बीते करीब एक साल से नेपाल की सस्ती प्लाईवुड बाजार में पहुंच रही है, जिससे स्थानीय उत्पादकों की मांग घट गई है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है और कई फैक्टरियों में उत्पादन घटकर महज 40 फीसदी रह गया है।
प्रदेश में प्लाईवुड उद्योग का सालाना टर्नओवर करीब 2000 करोड़ रुपये बताया जाता है। इसमें से 70 फीसदी फैक्टरियां यमुनानगर में स्थित हैं और यहां से लगभग 1400 करोड़ रुपये का कारोबार होता था। वर्तमान समय में नेपाल और केरल की फैक्टरियों के प्लाईवुड की बढ़ती मांग के चलते यमुनानगर से होने वाला निर्यात अब घटकर केवल एक तिहाई रह गया है।
उद्योग जगत का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में प्लाईवुड उद्योग और गहरे संकट में चला जाएगा।
लागत बढ़ने के कारण हो रहा घाटा : बिहानी
हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान जेके बिहानी के अनुसार पहले लकड़ी की एक ट्रॉली 80 से 90 हजार रुपये में मिल जाया करती थी, लेकिन अब उसी ट्रॉली की कीमत करीब ढाई से पौने तीन लाख रुपये तक पहुंच गई है। लागत बढ़ने के बावजूद तैयार माल की कीमतों में उतनी बढ़ोतरी नहीं हो पा रही, जिससे उद्योग लगातार घाटे में जा रहा है।