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Yamuna Nagar News: सात साल से अटकी परियोजना होगी शुरू, जलभराव से मिलेगी राहत
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 06 Apr 2026 01:55 AM IST
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शहर में रेलवे लाइन के नीचे डालने के लिए रखे पाइप। संवाद
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राजेश कुमार
यमुनानगर। मानसून में होने वाले जलभराव को रोकने के लिए सात साल पहले शुरू की गई परियोजना अब सिरे चढ़ने जा रही है। रेलवे लाइन के नीचे से पाइप लाइन डालने का काम रेलवे इसी माह शुरू करेगा। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक इसके लिए रेलवे ने टेंडर लगाकर एजेंसी को वर्क अलॉट कर दिया है। उम्मीद है कि मानसून से पहले ही जगाधरी व यमुनानगर की कई कॉलोनियां पानी में डूबने से बच जाएगी।
दरअसल, जगाधरी शहर का बरसाती पानी यमुनानगर शहर में जलभराव का एक बड़ा कारण माना जाता है। इसी समस्या के समाधान के लिए अमरूत योजना के तहत 24 फरवरी 2019 को बारिश के पानी की निकासी के लिए बड़ी पाइपलाइन डालने का काम शुरू हुआ था।
योजना के तहत करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबी लाइन बिछाई जानी थी, जिस पर 9.15 करोड़ रुपये खर्च होने थे। योजना के तहत 900 एमएम से लेकर 1800 एमएम चौड़ाई वाले पाइप डाले गए हैं। करीब 100 मेनहोल बनाए गए हैं और लगभग 196 प्वाइंट से गंदा और बारिश का पानी इस लाइन में डाला जाना प्रस्तावित है। लक्ष्य था कि 15 अगस्त 2019 तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
रेलवे लाइन पर आकर रुक गया था काम : जगाधरी से एसटीपी तक पाइपलाइन डालने से पहले नगर निगम ने निजी एजेंसी से सर्वे कराया था। एजेंसी ने रिपोर्ट दी थी कि पाइपलाइन डालने में कोई अड़चन नहीं है लेकिन काम शुरू हुआ तो कमानी चौक से आगे रेलवे बाइपास के नजदीक आकर काम रुक गया। पहले यहां बाइपास के साथ लगती जमीन निजी व्यक्ति की निकल आई, जिन्होंने अपनी जमीन से पाइप दबाने से मना कर दिया। इसके बाद रेलवे ने बिना एनओसी पाइप दबाने से मना कर दिया। नगर निगम ने रेलवे को करीब चार करोड़ रुपये जमा करवाए थे परंतु पांच साल बाद भी रेलवे ने काम शुरू नहीं किया। समय बीतने पर खर्च बढ़ गया इसलिए रेलवे ने नया एस्टीमेट बनाकर करीब 68 लाख रुपये और लिए है। संवाद
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दरअसल, जगाधरी शहर का बरसाती पानी यमुनानगर शहर में जलभराव का एक बड़ा कारण माना जाता है। इसी समस्या के समाधान के लिए अमरूत योजना के तहत 24 फरवरी 2019 को बारिश के पानी की निकासी के लिए बड़ी पाइपलाइन डालने का काम शुरू हुआ था।
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योजना के तहत करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबी लाइन बिछाई जानी थी, जिस पर 9.15 करोड़ रुपये खर्च होने थे। योजना के तहत 900 एमएम से लेकर 1800 एमएम चौड़ाई वाले पाइप डाले गए हैं। करीब 100 मेनहोल बनाए गए हैं और लगभग 196 प्वाइंट से गंदा और बारिश का पानी इस लाइन में डाला जाना प्रस्तावित है। लक्ष्य था कि 15 अगस्त 2019 तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
रेलवे लाइन पर आकर रुक गया था काम : जगाधरी से एसटीपी तक पाइपलाइन डालने से पहले नगर निगम ने निजी एजेंसी से सर्वे कराया था। एजेंसी ने रिपोर्ट दी थी कि पाइपलाइन डालने में कोई अड़चन नहीं है लेकिन काम शुरू हुआ तो कमानी चौक से आगे रेलवे बाइपास के नजदीक आकर काम रुक गया। पहले यहां बाइपास के साथ लगती जमीन निजी व्यक्ति की निकल आई, जिन्होंने अपनी जमीन से पाइप दबाने से मना कर दिया। इसके बाद रेलवे ने बिना एनओसी पाइप दबाने से मना कर दिया। नगर निगम ने रेलवे को करीब चार करोड़ रुपये जमा करवाए थे परंतु पांच साल बाद भी रेलवे ने काम शुरू नहीं किया। समय बीतने पर खर्च बढ़ गया इसलिए रेलवे ने नया एस्टीमेट बनाकर करीब 68 लाख रुपये और लिए है। संवाद