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Yamuna Nagar News: रिश्वत मामले में आरओ व एसडीओ जांच के दायरे में
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 23 Jan 2026 01:05 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। 30 हजार रुपये की रिश्वत लेने की आरोपी क्लर्क दिव्या जोशी और हरियाणा कौशल रोजगार निगम के कर्मी मनदीप को रिमांड अवधि पूरी होने पर जेल भेज दिया गया मामले में क्षेत्रीय अधिकारी (आरओ) प्रदीप सिंह और एसडीओ दीक्षा पांडे की भूमिका की जांच तेज कर दी गई है।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने आरओ प्रदीप सिंह सहित अन्य अधिकारियों को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया है। हालांकि, रिश्वत कांड उजागर होने के बाद से ही आरओ कार्यालय से नदारद बताए जा रहे हैं। हालात यह हैं कि प्रदूषण बोर्ड का कार्यालय बाहर से बंद मिला और मुख्य द्वार पर कुंडा लटका रहा। कार्यालय के भीतर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था और आरओ का मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा है। यह मामला 20 जनवरी को सामने आया था, जब अस्पताल निर्माण से संबंधित एनओसी जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में एसीबी ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग में तैनात महिला क्लर्क दिव्या जोशी को 30 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई करनाल जिले के गांव घरौंदा निवासी रिंकू की शिकायत पर की गई।
रिंकू यमुनानगर शहर के रेलवे रोड क्षेत्र में प्रभु अस्पताल का निर्माण करा रहे हैं। अस्पताल संचालन के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी आवश्यक होती है। आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने के बदले क्लर्क ने 30 हजार रुपये की मांग की और काम अटकाए रखने का दबाव बनाया।
जांच अधिकारी ईश्वर सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और मामले की गहन जांच जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांचा जा रहा है कि रिश्वत की मांग केवल निचले स्तर पर थी या इसमें अधिकारियों की जानकारी अथवा सहमति भी शामिल थी। आरओ और एसडीओ की भूमिका की जांच की जा रही है। यदि जांच में संलिप्तता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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यमुनानगर। 30 हजार रुपये की रिश्वत लेने की आरोपी क्लर्क दिव्या जोशी और हरियाणा कौशल रोजगार निगम के कर्मी मनदीप को रिमांड अवधि पूरी होने पर जेल भेज दिया गया मामले में क्षेत्रीय अधिकारी (आरओ) प्रदीप सिंह और एसडीओ दीक्षा पांडे की भूमिका की जांच तेज कर दी गई है।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने आरओ प्रदीप सिंह सहित अन्य अधिकारियों को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया है। हालांकि, रिश्वत कांड उजागर होने के बाद से ही आरओ कार्यालय से नदारद बताए जा रहे हैं। हालात यह हैं कि प्रदूषण बोर्ड का कार्यालय बाहर से बंद मिला और मुख्य द्वार पर कुंडा लटका रहा। कार्यालय के भीतर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था और आरओ का मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा है। यह मामला 20 जनवरी को सामने आया था, जब अस्पताल निर्माण से संबंधित एनओसी जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में एसीबी ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग में तैनात महिला क्लर्क दिव्या जोशी को 30 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई करनाल जिले के गांव घरौंदा निवासी रिंकू की शिकायत पर की गई।
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रिंकू यमुनानगर शहर के रेलवे रोड क्षेत्र में प्रभु अस्पताल का निर्माण करा रहे हैं। अस्पताल संचालन के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी आवश्यक होती है। आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने के बदले क्लर्क ने 30 हजार रुपये की मांग की और काम अटकाए रखने का दबाव बनाया।
जांच अधिकारी ईश्वर सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और मामले की गहन जांच जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांचा जा रहा है कि रिश्वत की मांग केवल निचले स्तर पर थी या इसमें अधिकारियों की जानकारी अथवा सहमति भी शामिल थी। आरओ और एसडीओ की भूमिका की जांच की जा रही है। यदि जांच में संलिप्तता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।