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Sudhir Narwal, a brave son of Yamunanagar, was martyred in a road accident in Doda, Jammu and Kashmir; a pall of gloom hangs over his village, Sherpur.
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जम्मू-कश्मीर के डोडा सड़क हादसे में शहीद हुए यमुनानगर के वीर सपूत सुधीर नरवाल, गांव शेरपुर में मातम
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में 22 जनवरी को हुए भयानक सड़क हादसे में 10 भारतीय सेना के जवान शहीद हो गए, जिसमें यमुनानगर जिले के छछरौली ब्लॉक के शेरपुर गांव के निवासी नायक सुधीर नरवाल (उम्र करीब 26-28 वर्ष) भी शामिल हैं। भारतीय सेना की एक बुलेटप्रूफ वाहन (कैस्पिर) भादरवाह-चंबा अंतरराज्यीय सड़क पर खन्नी टॉप (9,000 फीट ऊंचाई) के पास खराब मौसम और बर्फबारी के कारण फिसलकर लगभग 200 फीट गहरी खाई में गिर गई। हादसे में 10 जवान शहीद हुए और 10-11 अन्य घायल हो गए, जिन्हें एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया।सेना ने इस घटना को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया है और शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। पूरे देश में इस हादसे से शोक की लहर दौड़ गई है।सुधीर नरवाल की कहानी – लगन और देशभक्ति का प्रतीक
साल 2016 में सेना में भर्ती हुए सुधीर नरवाल शुरू से ही आर्मी में जाने के जुनून के साथ जीते थे। 12वीं पास करने के बाद उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ दी और सेना जॉइन कर ली। रोजाना गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर जगाधरी के तेजली खेल परिसर में फिजिकल ट्रेनिंग के लिए जाते थे। उनकी लगन से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव को गर्व था। वे 27 आर्म्ड रेजिमेंट में नायक के पद पर तैनात थे।परिवार में सुधीर सबसे छोटे और इकलौते बेटे थे। पिता हरपाल का कुछ समय पहले निधन हो चुका था। उनकी पत्नी रूबी प्राइवेट नौकरी करती हैं और 4 साल का बेटा आयांश है। दो बहनें हैं – एक कविता न्यूजीलैंड में शादीशुदा है, दूसरी कुलविंदर की शादी हो चुकी है। सुधीर पर 2 एकड़ जमीन थी। वे तीन-चार महीने में घर आते थे। पिछली बार दिवाली पर आए थे और 12 नवंबर को एक शादी अटेंड कर लौट गए थे। परिवार को 27 जनवरी को उनकी आने की खुशी थी, लेकिन मौत की खबर ने सब कुछ सुनसान कर दिया।
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