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Himachal: 44.89 को 45 फीसदी नहीं मान सकते, अदालत ने न्यूनतम अंक राउंड ऑफ करने की याचिका को किया खारिज

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 24 Jun 2026 06:00 AM IST
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सार

हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती में न्यूनतम योग्यता के अंकों को राउंड ऑफ करने को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है।

44.89 cannot be considered 45 percent; court dismisses plea to round off minimum marks.
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती में न्यूनतम योग्यता के अंकों को राउंड ऑफ करने को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है। टीजीटी (आर्ट्स) के पद के लिए एक उम्मीदवार ने 44.89 अंकों को 45 फीसदी मानने की गुहार लगाई थी। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने सभी पक्षों और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद कहा कि जब भर्ती नियमों या विज्ञापन में न्यूनतम योग्यता के अंकों को राउंड ऑफ करने का कोई प्रावधान ही नहीं है, तो प्राधिकारी द्वारा 44.89 फीसदी को 45 फीसदी मानने से इन्कार करना बिल्कुल सही है। केवल भर्ती प्रक्रिया या दस्तावेज सत्यापन में शामिल हो जाने से किसी अयोग्य उम्मीदवार को अंतिम मेरिट सूची में जगह पाने का अधिकार नहीं मिल जाता।

राज्य चयन आयोग हमीरपुर ने 27 मई 2025 को टीजीटी (आर्ट्स) के पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें अनुसूचित जनजाति (एससी) के लिए 17 पद आरक्षित थे। उम्मीदवार ने एसटी कोटे के तहत आवेदन किया था। भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के बाद मेरिट के आधार पर उन्हें दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया, लेकिन अंतिम मेरिट सूची से उनका नाम बाहर कर दिया गया। जब उन्होंने इसका कारण पता किया, तो बताया गया कि ग्रेजुएशन में उनके अंक 45 फीसदी से कम हैं, जो इस पद के लिए न्यूनतम आवश्यक योग्यता थी।

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याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उनके बीकॉम में 44.89 फीसदी अंक हैं। उनका कहना था कि सामान्य गणितीय नियमों के अनुसार 0.5 प्रतिशत के करीब वाले अंकों को अगले अंक में बदल दिया जाता है। इसलिए उनके 44.89 प्रतिशत अंकों को राउंड ऑफ करके 45 फीसदी माना जाना चाहिए। नियमों के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम अंक 50 फीसदी निर्धारित थे और आरक्षित वर्गों के लिए 5 फीसदी की छूट दी गई थी, जिससे उनके लिए न्यूनतम अंक 45 फीसदी रह गए थे। याचिकाकर्ता का तर्क था कि चूंकि वे इस आंकड़े के बेहद करीब हैं। इसलिए उन्हें सफल घोषित किया जाए।

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