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Bilaspur News: जिले में 2,800 लोगों ने दी साक्षर बनने के लिए परीक्षा
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 15 Mar 2026 11:57 PM IST
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जबली में बुजुर्ग महिला की घर पर परीक्षा लेते हुए शिक्षक। संवाद
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532 राजकीय प्राथमिक स्कूलों में हुआ आयोजन
परीक्षा पास करने पर साक्षर लोगों में होंगे शामिल
उल्लास कार्यक्रम के तहत छह महीने तक कराई गई है पढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में निरक्षर लोगों को साक्षर करने के लिए रविवार को परीक्षा का आयोजन किया गया। जिले भर में करीब 2,800 निरक्षर लोगों ने यह परीक्षा दी। बुजुर्गों ने उत्साह के साथ इस परीक्षा में भाग लिया।
इस परीक्षा को पास करने पर वह साक्षर लोगों में शामिल होंगे। यह परीक्षा जिले के 532 राजकीय प्राथमिक स्कूलों में शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से करवाई गई। जो बुजुर्ग चलने-फिरने में असमर्थ थे या किसी अन्य कारण की वजह से परीक्षा केंद्र में नहीं पहुंच पाएं, शिक्षा विभाग ने घर जाकर उनकी परीक्षा ली। परीक्षा सुबह 10 से शाम 5 बजे तक हुई। शिक्षार्थियों को परीक्षा के लिए तीन घंटे का समय दिया गया। यह परीक्षा 150 अंकों की थी, जिसमें पढ़ने, लिखने और संख्याओं के ज्ञान के आधारभूत प्रश्न आए थे। शिक्षार्थियों को परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए पढ़ने, लिखने और संख्या ज्ञान में 17 अंक हासिल करना आवश्यक होगा, हालांकि इनमें से किसी एक में भी कम अंक रहने पर कुल पांच अंक ग्रेस अंक के रूप में जोड़े जाएंगे। मूल्यांकन के बाद उत्तीर्ण होने पर सभी निरक्षरों को साक्षर घोषित किया जाएगा और उन्हें इस संदर्भ में प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। परीक्षा देने वाले निरक्षर लोगों को केंद्रीय शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत हजारों स्वयंसेवी अध्यापकों ने करीब छह माह तक पढ़ाई करवाई है। निरक्षर लोगों को एनसीईआरटी की ओर से विशेष रूप से प्रकाशित की गई उल्लास पुस्तक का अध्ययन करवाया गया है। जिला नोडल अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि यह पहल साक्षरता को बढ़ावा देने और समाज के प्रत्येक वर्ग को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अत्यंत प्रेरणादायक है कि बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक भी साक्षर बनने के लिए आगे आ रहे हैं। इससे समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश जाएगा और अन्य लोग भी इससे प्रेरित होंगे। जिला परियोजना अधिकारी निशा गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों की इस सराहनीय पहल की प्रशंसा करते हुए आशा व्यक्त की है कि इस अभियान से जिले में साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और लोग शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन को और बेहतर बना सकेंगे।
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उल्लास कार्यक्रम के तहत छह महीने तक कराई गई है पढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में निरक्षर लोगों को साक्षर करने के लिए रविवार को परीक्षा का आयोजन किया गया। जिले भर में करीब 2,800 निरक्षर लोगों ने यह परीक्षा दी। बुजुर्गों ने उत्साह के साथ इस परीक्षा में भाग लिया।
इस परीक्षा को पास करने पर वह साक्षर लोगों में शामिल होंगे। यह परीक्षा जिले के 532 राजकीय प्राथमिक स्कूलों में शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से करवाई गई। जो बुजुर्ग चलने-फिरने में असमर्थ थे या किसी अन्य कारण की वजह से परीक्षा केंद्र में नहीं पहुंच पाएं, शिक्षा विभाग ने घर जाकर उनकी परीक्षा ली। परीक्षा सुबह 10 से शाम 5 बजे तक हुई। शिक्षार्थियों को परीक्षा के लिए तीन घंटे का समय दिया गया। यह परीक्षा 150 अंकों की थी, जिसमें पढ़ने, लिखने और संख्याओं के ज्ञान के आधारभूत प्रश्न आए थे। शिक्षार्थियों को परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए पढ़ने, लिखने और संख्या ज्ञान में 17 अंक हासिल करना आवश्यक होगा, हालांकि इनमें से किसी एक में भी कम अंक रहने पर कुल पांच अंक ग्रेस अंक के रूप में जोड़े जाएंगे। मूल्यांकन के बाद उत्तीर्ण होने पर सभी निरक्षरों को साक्षर घोषित किया जाएगा और उन्हें इस संदर्भ में प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। परीक्षा देने वाले निरक्षर लोगों को केंद्रीय शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत हजारों स्वयंसेवी अध्यापकों ने करीब छह माह तक पढ़ाई करवाई है। निरक्षर लोगों को एनसीईआरटी की ओर से विशेष रूप से प्रकाशित की गई उल्लास पुस्तक का अध्ययन करवाया गया है। जिला नोडल अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि यह पहल साक्षरता को बढ़ावा देने और समाज के प्रत्येक वर्ग को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अत्यंत प्रेरणादायक है कि बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक भी साक्षर बनने के लिए आगे आ रहे हैं। इससे समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश जाएगा और अन्य लोग भी इससे प्रेरित होंगे। जिला परियोजना अधिकारी निशा गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों की इस सराहनीय पहल की प्रशंसा करते हुए आशा व्यक्त की है कि इस अभियान से जिले में साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और लोग शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन को और बेहतर बना सकेंगे।

जबली में बुजुर्ग महिला की घर पर परीक्षा लेते हुए शिक्षक। संवाद
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