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Bilaspur News: एम्स बिलासपुर में रचनात्मकता को मिला नया मंच, ब्लॉसम का हुआ विमोचन
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 27 Mar 2026 11:19 PM IST
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एम्स बिलासपुर में पुस्तक का विमोचन करते अधिकारी व चिकित्सक। स्रोत: एम्स प्रबंधन
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पहली साहित्यिक पत्रिका में छात्रों, फैकल्टी व स्टाफ की अभिव्यक्ति को स्थान
अध्यक्ष बोले- संस्थान के लोगों की रचनात्मकता और विचारों में झलकती है संस्थान की पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में शुक्रवार को पहली साहित्यिक पत्रिका ब्लॉसम का विमोचन किया गया। यह पत्रिका संस्थान के विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की रचनात्मकता, विचारों और संवेदनाओं का अनूठा संग्रह है। पत्रिका की परिकल्पना लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह ने की, जिसे प्रो. (डॉ.) रुपाली पारलेवार के मार्गदर्शन में मूर्त रूप दिया गया। पत्रिका का औपचारिक विमोचन संस्थान के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र कुमार अरोड़ा ने किया।
अपने संदेश में डॉ. नरेंद्र कुमार अरोड़ा ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को उसकी वैज्ञानिक उपलब्धियों और क्लीनिकल उत्कृष्टता से आंका जाता है, लेकिन उसकी असली पहचान वहां के लोगों की रचनात्मकता और विचारों में झलकती है। कहा कि ब्लॉसम नए विचारों के प्रस्फुटन और सामूहिक कल्पना शक्ति का प्रतीक है। यह पत्रिका संस्थान के भीतर मौजूद कवियों, लेखकों, विचारकों और कलाकारों की प्रतिभा को सामने लाती है और उन्हें अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करती है। पत्रिका की मुख्य संपादक डॉ. विभूति मित्तल ने ब्लॉसम को एक ऐसे बगीचे की संज्ञा दी, जहां विचारों के बीज अंकुरित होकर भावनाओं के रूप में खिलते हैं।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा की व्यस्त दिनचर्या के बीच भी रचनात्मकता शांत रूप से पनपती है और यह पत्रिका उसी अभिव्यक्ति का माध्यम है। उन्होंने सभी योगदानकर्ताओं और संपादकीय टीम का आभार जताते हुए इसे एक नई शुरुआत बताया। इस अवसर पर डॉ. अनुपम पराशर, डॉ. निधि पुरी, डॉ. दिनेश वर्मा, लेफ्टिनेंट कर्नल विश्वास पी. परांजपे और प्रो. (डॉ.) संजय विक्रांत सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
इनसेट
मानवीय मूल्यों के बिना शिक्षा अधूरी : डीन अकादमिक
प्रो. (डॉ.) रुपाली पारलेवार ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल वैज्ञानिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्लॉसम विश्लेषणात्मक सोच और रचनात्मकता के बीच सेतु का कार्य करेगा। बताया कि इस पत्रिका में शामिल रचनाएं छात्रों, स्टाफ और फैकल्टी की संवेदनशीलता, अवलोकन क्षमता और मानवीय अनुभवों को दर्शाती हैं, जो एक बेहतर चिकित्सक बनने के लिए बेहद जरूरी हैं।
इनसेट
संपादकीय टीम ने निभाई अहम भूमिका
पत्रिका के प्रकाशन में डॉ. अशोक दुबे, डॉ. विभूति मित्तल, डॉ. भूपेंद्र पटेल, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. ज्योति कथवाल, उमेश और अंकितेश सहित टीम के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि ब्लॉसम संस्थान के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में यह पत्रिका रचनात्मक अभिव्यक्ति का सशक्त मंच बनकर उभरेगी।
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अध्यक्ष बोले- संस्थान के लोगों की रचनात्मकता और विचारों में झलकती है संस्थान की पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में शुक्रवार को पहली साहित्यिक पत्रिका ब्लॉसम का विमोचन किया गया। यह पत्रिका संस्थान के विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की रचनात्मकता, विचारों और संवेदनाओं का अनूठा संग्रह है। पत्रिका की परिकल्पना लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह ने की, जिसे प्रो. (डॉ.) रुपाली पारलेवार के मार्गदर्शन में मूर्त रूप दिया गया। पत्रिका का औपचारिक विमोचन संस्थान के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र कुमार अरोड़ा ने किया।
अपने संदेश में डॉ. नरेंद्र कुमार अरोड़ा ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को उसकी वैज्ञानिक उपलब्धियों और क्लीनिकल उत्कृष्टता से आंका जाता है, लेकिन उसकी असली पहचान वहां के लोगों की रचनात्मकता और विचारों में झलकती है। कहा कि ब्लॉसम नए विचारों के प्रस्फुटन और सामूहिक कल्पना शक्ति का प्रतीक है। यह पत्रिका संस्थान के भीतर मौजूद कवियों, लेखकों, विचारकों और कलाकारों की प्रतिभा को सामने लाती है और उन्हें अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करती है। पत्रिका की मुख्य संपादक डॉ. विभूति मित्तल ने ब्लॉसम को एक ऐसे बगीचे की संज्ञा दी, जहां विचारों के बीज अंकुरित होकर भावनाओं के रूप में खिलते हैं।
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उन्होंने कहा कि चिकित्सा की व्यस्त दिनचर्या के बीच भी रचनात्मकता शांत रूप से पनपती है और यह पत्रिका उसी अभिव्यक्ति का माध्यम है। उन्होंने सभी योगदानकर्ताओं और संपादकीय टीम का आभार जताते हुए इसे एक नई शुरुआत बताया। इस अवसर पर डॉ. अनुपम पराशर, डॉ. निधि पुरी, डॉ. दिनेश वर्मा, लेफ्टिनेंट कर्नल विश्वास पी. परांजपे और प्रो. (डॉ.) संजय विक्रांत सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
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मानवीय मूल्यों के बिना शिक्षा अधूरी : डीन अकादमिक
प्रो. (डॉ.) रुपाली पारलेवार ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल वैज्ञानिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्लॉसम विश्लेषणात्मक सोच और रचनात्मकता के बीच सेतु का कार्य करेगा। बताया कि इस पत्रिका में शामिल रचनाएं छात्रों, स्टाफ और फैकल्टी की संवेदनशीलता, अवलोकन क्षमता और मानवीय अनुभवों को दर्शाती हैं, जो एक बेहतर चिकित्सक बनने के लिए बेहद जरूरी हैं।
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संपादकीय टीम ने निभाई अहम भूमिका
पत्रिका के प्रकाशन में डॉ. अशोक दुबे, डॉ. विभूति मित्तल, डॉ. भूपेंद्र पटेल, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. ज्योति कथवाल, उमेश और अंकितेश सहित टीम के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि ब्लॉसम संस्थान के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में यह पत्रिका रचनात्मक अभिव्यक्ति का सशक्त मंच बनकर उभरेगी।