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Bilaspur News: राम नाम से पत्थर भी तैरने लगे, रावण-अंगद संवाद ने मोहा मन
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डियारा में आयोजित रामलीला मंचन का दृश्य। स्रोत: समिति
डियारा सेक्टर में राम नाटक के सातवें दिन कलाकारों के शानदार अभिनय ने बांधा समां
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर में चल रहे राम नाटक के सातवें दिन कलाकारों ने राम नाम की महिमा, विभीषण निष्कासन और रावण-अंगद संवाद सहित विभिन्न दृश्यों का मंचन किया। इस दौरान डॉ. मल्लिका नड्डा और उनके सुपुत्र हरीश नड्डा ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की।
मंचन के पहले दृश्य में प्रभु श्रीराम की समुद्र देव से भेंट दिखाई गई। समुद्र पर सेतु निर्माण के दौरान पत्थर पानी में डूबने लगे तो हनुमान जी ने उन पर राम नाम लिखकर समुद्र में डालने का सुझाव दिया। राम नाम लिखे पत्थरों के तैरने लगे और सेतु निर्माण का कार्य आगे बढ़ा। इसके बाद रावण द्वारा विभीषण को लंका से निष्कासित करने का दृश्य प्रस्तुत किया गया।
तीसरे दृश्य में कुंभकरण की रत्न गुहा का मंचन किया गया। इसमें रावण अपने भाई कुंभकरण को नींद से जगाकर विभीषण के निष्कासन और लंका पर आने वाले संकट के बारे में बताता है। इसके बाद रावण-अंगद संवाद में अंगद शांति दूत बनकर रावण की सभा में पहुंचते हैं और माता सीता को सकुशल लौटाने का आग्रह करते हैं। रावण के आग्रह ठुकराने पर अंगद उसे युद्ध की चेतावनी देते हुए लौट जाते हैं। पांचवें दृश्य में अंगद के प्रभु श्रीराम के शिविर में वापस पहुंचने का मंचन किया गया। समिति के प्रवक्ता अनीश ठाकुर ने बताया कि रविवार को बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी करवाई गईं। इनमें कनिष्ठ, उपकनिष्ठ और वरिष्ठ वर्गों में चित्रकला, निबंध लेखन, फैंसी ड्रेस, एकल नृत्य, मेहंदी रचाओ और रंगोली प्रतियोगिताएं शामिल रहीं। बच्चों ने इन प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर में चल रहे राम नाटक के सातवें दिन कलाकारों ने राम नाम की महिमा, विभीषण निष्कासन और रावण-अंगद संवाद सहित विभिन्न दृश्यों का मंचन किया। इस दौरान डॉ. मल्लिका नड्डा और उनके सुपुत्र हरीश नड्डा ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की।
मंचन के पहले दृश्य में प्रभु श्रीराम की समुद्र देव से भेंट दिखाई गई। समुद्र पर सेतु निर्माण के दौरान पत्थर पानी में डूबने लगे तो हनुमान जी ने उन पर राम नाम लिखकर समुद्र में डालने का सुझाव दिया। राम नाम लिखे पत्थरों के तैरने लगे और सेतु निर्माण का कार्य आगे बढ़ा। इसके बाद रावण द्वारा विभीषण को लंका से निष्कासित करने का दृश्य प्रस्तुत किया गया।
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तीसरे दृश्य में कुंभकरण की रत्न गुहा का मंचन किया गया। इसमें रावण अपने भाई कुंभकरण को नींद से जगाकर विभीषण के निष्कासन और लंका पर आने वाले संकट के बारे में बताता है। इसके बाद रावण-अंगद संवाद में अंगद शांति दूत बनकर रावण की सभा में पहुंचते हैं और माता सीता को सकुशल लौटाने का आग्रह करते हैं। रावण के आग्रह ठुकराने पर अंगद उसे युद्ध की चेतावनी देते हुए लौट जाते हैं। पांचवें दृश्य में अंगद के प्रभु श्रीराम के शिविर में वापस पहुंचने का मंचन किया गया। समिति के प्रवक्ता अनीश ठाकुर ने बताया कि रविवार को बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी करवाई गईं। इनमें कनिष्ठ, उपकनिष्ठ और वरिष्ठ वर्गों में चित्रकला, निबंध लेखन, फैंसी ड्रेस, एकल नृत्य, मेहंदी रचाओ और रंगोली प्रतियोगिताएं शामिल रहीं। बच्चों ने इन प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
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