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Bilaspur News: फर्जी पंचायत आरक्षण रोस्टर वायरल, लोगों ने जताई नाराजगी
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सोशल मीडिया पर पंचायत रोस्टर वायरल होने के बाद प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से उपायुक्त को ज्ञाप
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आधिकारिक घोषणा से पहले पंचायत रोस्टर लीक होने पर नौणी के लोगों में रोष
उपायुक्त कार्यालय में सौंपा ज्ञापन, मिलान हुआ तो मानी जाएगी बड़ी लापरवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में सोमवार को फर्जी पंचायत रोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद खासतौर पर नौणी क्षेत्र के लोगों में इसको लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली। क्षेत्र के लोग एकजुट होकर उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान रमेश कौंडल, मराठा सहित कई अन्य स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।
ज्ञापन में लोगों ने बताया कि अभी तक बिलासपुर का पंचायत रोस्टर आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है, लेकिन इससे पहले ही एक कथित रोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इससे पंचायत प्रतिनिधियों और आम लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। लोगों का कहना है कि बिना आधिकारिक पुष्टि के इस तरह का रोस्टर सार्वजनिक होना गंभीर मामला है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यदि बाद में जारी होने वाला आधिकारिक रोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल सूची से मेल खाता है, तो यह स्पष्ट रूप से गोपनीय जानकारी के लीक होने का मामला होगा।
चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। लोगों ने कहा कि प्रशासनिक स्वीकृति से पहले दस्तावेजों का सार्वजनिक होना नियमों का उल्लंघन है और इसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता रमेश कौंडल ने बताया कि उपायुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर उचित कार्रवाई करने की मांग की गई है।
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उपायुक्त कार्यालय में सौंपा ज्ञापन, मिलान हुआ तो मानी जाएगी बड़ी लापरवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में सोमवार को फर्जी पंचायत रोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद खासतौर पर नौणी क्षेत्र के लोगों में इसको लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली। क्षेत्र के लोग एकजुट होकर उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान रमेश कौंडल, मराठा सहित कई अन्य स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।
ज्ञापन में लोगों ने बताया कि अभी तक बिलासपुर का पंचायत रोस्टर आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है, लेकिन इससे पहले ही एक कथित रोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इससे पंचायत प्रतिनिधियों और आम लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। लोगों का कहना है कि बिना आधिकारिक पुष्टि के इस तरह का रोस्टर सार्वजनिक होना गंभीर मामला है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यदि बाद में जारी होने वाला आधिकारिक रोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल सूची से मेल खाता है, तो यह स्पष्ट रूप से गोपनीय जानकारी के लीक होने का मामला होगा।
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चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। लोगों ने कहा कि प्रशासनिक स्वीकृति से पहले दस्तावेजों का सार्वजनिक होना नियमों का उल्लंघन है और इसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता रमेश कौंडल ने बताया कि उपायुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर उचित कार्रवाई करने की मांग की गई है।