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Bilaspur News: तलाई की रामलीला में श्रीराम जन्म और सीता अवतरण के प्रसंगों ने मोहा मन
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गुरु वशिष्ठ की सलाह पर दशरथ ने करवाया पुत्र यज्ञ, जनकपुरी में हल चलाते समय धरती से प्रकट हुईं माता सीता
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई (बिलासपुर)। श्री बाल रामलीला कमेटी तलाई की ओर से तपोस्थली बाबा बालक नाथ के प्रांगण में आयोजित 39वें रामलीला मंचन के दूसरे दिन पुत्र यज्ञ, भगवान श्रीराम के जन्म और माता सीता के अवतरण के प्रसंग प्रस्तुत किए गए। राम जन्म के दृश्य के दौरान पंडाल में मौजूद दर्शकों ने जय श्रीराम के जयघोष के साथ प्रभु का स्वागत किया। कलाकारों ने धार्मिक प्रसंगों का सजीव मंचन कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
मंचन में राजा दशरथ को पुत्र न होने के कारण चिंतित दिखाया गया। इस पर गुरु वशिष्ठ ने उन्हें पुत्र यज्ञ करवाने की सलाह दी। इसके बाद श्रृंगी ऋषि की ओर से यज्ञ संपन्न करवाने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। यज्ञ से प्रसन्न होकर अग्निदेव ने राजा दशरथ को चार पुत्रों की प्राप्ति का वरदान दिया।
अगले प्रसंग में भगवान विष्णु के माता कौशल्या के गर्भ से जन्म लेने और भगवान श्रीराम के अवतरण का मंचन किया गया। राम जन्म का दृश्य सामने आते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
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रामलीला के अगले प्रसंग में जनकपुरी में सूखे से चिंतित राजा जनक को गुरुजनों के आदेश पर भूमि पर हल चलाते हुए दिखाया गया। इसी दौरान धरती से माता सीता के प्रकट होने का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जो आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अलावा वेदवती लीला और पृथ्वी की पुकार के प्रसंग भी मंचित किए गए।
इससे पहले शनिवार को 39वें रामलीला मंचन का शुभारंभ विधिवत स्टेज पूजन के साथ हुआ था। पहले दिन नारद मोह लीला का मंचन किया गया। इस अवसर पर कमेटी प्रधान पवन कौशल, मुख्य निदेशक हरबंस लाल शर्मा, स्टेज सचिव महेंद्र ठाकुर, उपप्रधान राकेश शर्मा, सचिव सुरेश पंडित और राजकुमार कौशल उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई (बिलासपुर)। श्री बाल रामलीला कमेटी तलाई की ओर से तपोस्थली बाबा बालक नाथ के प्रांगण में आयोजित 39वें रामलीला मंचन के दूसरे दिन पुत्र यज्ञ, भगवान श्रीराम के जन्म और माता सीता के अवतरण के प्रसंग प्रस्तुत किए गए। राम जन्म के दृश्य के दौरान पंडाल में मौजूद दर्शकों ने जय श्रीराम के जयघोष के साथ प्रभु का स्वागत किया। कलाकारों ने धार्मिक प्रसंगों का सजीव मंचन कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
मंचन में राजा दशरथ को पुत्र न होने के कारण चिंतित दिखाया गया। इस पर गुरु वशिष्ठ ने उन्हें पुत्र यज्ञ करवाने की सलाह दी। इसके बाद श्रृंगी ऋषि की ओर से यज्ञ संपन्न करवाने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। यज्ञ से प्रसन्न होकर अग्निदेव ने राजा दशरथ को चार पुत्रों की प्राप्ति का वरदान दिया।
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अगले प्रसंग में भगवान विष्णु के माता कौशल्या के गर्भ से जन्म लेने और भगवान श्रीराम के अवतरण का मंचन किया गया। राम जन्म का दृश्य सामने आते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
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रामलीला के अगले प्रसंग में जनकपुरी में सूखे से चिंतित राजा जनक को गुरुजनों के आदेश पर भूमि पर हल चलाते हुए दिखाया गया। इसी दौरान धरती से माता सीता के प्रकट होने का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जो आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अलावा वेदवती लीला और पृथ्वी की पुकार के प्रसंग भी मंचित किए गए।
इससे पहले शनिवार को 39वें रामलीला मंचन का शुभारंभ विधिवत स्टेज पूजन के साथ हुआ था। पहले दिन नारद मोह लीला का मंचन किया गया। इस अवसर पर कमेटी प्रधान पवन कौशल, मुख्य निदेशक हरबंस लाल शर्मा, स्टेज सचिव महेंद्र ठाकुर, उपप्रधान राकेश शर्मा, सचिव सुरेश पंडित और राजकुमार कौशल उपस्थित रहे।