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Bilaspur News: एमएसएमई को एआई, आईओटी, डिजिटल तकनीकी की दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 28 Jan 2026 11:52 PM IST
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बिलासपुर में आयोजित स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्री 4.0 पर जागरूकता कार्यशाला में मौजूद अधि
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स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्री 4.0 पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित
संवाद न्यूज़ एजेंसी
बिलासपुर। जिला उद्योग केंद्र डीआईसी बिलासपुर की ओर से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग एवं इंडस्ट्री 4.0 विषय पर इंटरैक्टिव जागरूकता कार्यशाला हुई, जिसकी अध्यक्षता महाप्रबंधक डीआईसी जिया राम अभिलाषी ने की।
कार्यशाला का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र को आधुनिक डिजिटल तकनीकों जैसे आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस ,एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स आईओटी, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और सीआरएम सिस्टम के उपयोग और उनके लाभों से अवगत कराना रहा, ताकि आरएएमपी योजना के अंतर्गत उद्योगों का डिजिटल परिवर्तन संभव हो सके।
कार्यक्रम के पहले सत्र में आरएएमपी पहल का परिचय देते हुए एमएसएमई के डिजिटल सशक्तीकरण पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है, संसाधनों की बचत होती है और उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार संभव है। इस दौरान एआई आधारित प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, आईओटी सेंसरों के माध्यम से तापमान, दबाव और ऊर्जा खपत की रियल टाइम निगरानी, मशीन लर्निंग आधारित क्वालिटी कंट्रोल और मांग पूर्वानुमान जैसी तकनीकों के व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किए गए। डिजिटल ट्विन, स्मार्ट डैशबोर्ड और ऑटोमेटेड असेंबली लाइन जैसी आधुनिक औद्योगिक प्रणालियों का भी प्रदर्शन किया गया। दूसरे सत्र में एमएसएमई उद्यमियों, प्लांट मैनेजरों, औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों, डीआईसी बिलासपुर के अधिकारियों और मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रतिभागियों ने तकनीक अपनाने की लागत उपयुक्त समाधान प्रदाताओं के चयन और छोटे उद्योगों में तकनीकों की स्केलेबिलिटी से जुड़े प्रश्न रखे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान प्रस्तुत किया। चर्चा के दौरान बताया गया कि एमएसएमई चरणबद्ध तरीके से डिजिटल तकनीकें अपनाकर कम लागत में उत्पादन स्तर और गुणवत्ता दोनों में सुधार कर सकते हैं। कार्यशाला में मैनेजर डीआईसी मधु शर्मा सहित विभिन्न एमएसएमई उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इनसेट
कार्यशाला में यह सहमति भी बनी कि आगामी दिनों में एमएसएमई इकाइयों के व्यक्तिगत प्लांट विजिट किए जाएंगे, जिससे उनकी डिजिटल रेडीनेस का आकलन किया जा सके। प्रत्येक इकाई के लिए एक बेसलाइन असेसमेंट रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें त्वरित लाभ देने वाले समाधानों और भविष्य में स्केलेबल विकल्पों की पहचान की जाएगी। इसके साथ ही डीआईसी की ओर से प्रस्तुति सामग्री, केस स्टडी, लोकॉस्ट ऑटोमेशन, ईआरपी और आईओटी समाधान प्रदाताओं की सूची भी उद्योगों के साथ साझा की जाएगी।
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बिलासपुर। जिला उद्योग केंद्र डीआईसी बिलासपुर की ओर से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग एवं इंडस्ट्री 4.0 विषय पर इंटरैक्टिव जागरूकता कार्यशाला हुई, जिसकी अध्यक्षता महाप्रबंधक डीआईसी जिया राम अभिलाषी ने की।
कार्यशाला का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र को आधुनिक डिजिटल तकनीकों जैसे आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस ,एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स आईओटी, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और सीआरएम सिस्टम के उपयोग और उनके लाभों से अवगत कराना रहा, ताकि आरएएमपी योजना के अंतर्गत उद्योगों का डिजिटल परिवर्तन संभव हो सके।
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कार्यक्रम के पहले सत्र में आरएएमपी पहल का परिचय देते हुए एमएसएमई के डिजिटल सशक्तीकरण पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है, संसाधनों की बचत होती है और उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार संभव है। इस दौरान एआई आधारित प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, आईओटी सेंसरों के माध्यम से तापमान, दबाव और ऊर्जा खपत की रियल टाइम निगरानी, मशीन लर्निंग आधारित क्वालिटी कंट्रोल और मांग पूर्वानुमान जैसी तकनीकों के व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किए गए। डिजिटल ट्विन, स्मार्ट डैशबोर्ड और ऑटोमेटेड असेंबली लाइन जैसी आधुनिक औद्योगिक प्रणालियों का भी प्रदर्शन किया गया। दूसरे सत्र में एमएसएमई उद्यमियों, प्लांट मैनेजरों, औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों, डीआईसी बिलासपुर के अधिकारियों और मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रतिभागियों ने तकनीक अपनाने की लागत उपयुक्त समाधान प्रदाताओं के चयन और छोटे उद्योगों में तकनीकों की स्केलेबिलिटी से जुड़े प्रश्न रखे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान प्रस्तुत किया। चर्चा के दौरान बताया गया कि एमएसएमई चरणबद्ध तरीके से डिजिटल तकनीकें अपनाकर कम लागत में उत्पादन स्तर और गुणवत्ता दोनों में सुधार कर सकते हैं। कार्यशाला में मैनेजर डीआईसी मधु शर्मा सहित विभिन्न एमएसएमई उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इनसेट
कार्यशाला में यह सहमति भी बनी कि आगामी दिनों में एमएसएमई इकाइयों के व्यक्तिगत प्लांट विजिट किए जाएंगे, जिससे उनकी डिजिटल रेडीनेस का आकलन किया जा सके। प्रत्येक इकाई के लिए एक बेसलाइन असेसमेंट रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें त्वरित लाभ देने वाले समाधानों और भविष्य में स्केलेबल विकल्पों की पहचान की जाएगी। इसके साथ ही डीआईसी की ओर से प्रस्तुति सामग्री, केस स्टडी, लोकॉस्ट ऑटोमेशन, ईआरपी और आईओटी समाधान प्रदाताओं की सूची भी उद्योगों के साथ साझा की जाएगी।