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Bilaspur News: एफडीआर तकनीक से तरघेल–लदरौर और गाहर–केट संपर्क सड़क तैयार

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 11:49 PM IST
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Targhel-Ladrour and Gahar-Kate link roads completed using FDR technology
एफडीआर तकनीक से बनी तरघेल-लदरौर सड़क। स्रोत: डीपीआरओ
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11.52 करोड़ की लागत से 14 किलोमीटर का उन्नयन
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यातायात हुआ सुगम, आठ से अधिक गांवों को सीधा लाभ

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र में आधुनिक फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से दो महत्वपूर्ण सड़कों का उन्नयन कर दिया गया है। इन सड़कों के बनने से जहां क्षेत्र में यातायात व्यवस्था पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित हुई है, वहीं ग्रामीण आबादी को भी सीधा लाभ मिला है। करीब 14 किलोमीटर लंबी दो सड़कों पर 11.52 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई है।
एफडीआर तकनीक से उन्नत की गई सड़कों में तरघेल–लदरौर सड़क (करीब 7 किमी) और गाहर–केट संपर्क सड़क (करीब 7 किमी) शामिल हैं। तरघेल–लदरौर सड़क पर लगभग 6.5 करोड़ रुपये, जबकि गाहर–केट सड़क पर 5.16 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। गाहर–केट सड़क के उन्नयन से गाहर, मुहाणा, देहलवीं, पध्याण, केट, नसवाल और सेऊ सहित करीब आठ गांवों को लाभ हुआ है। वहीं तरघेल–लदरौर सड़क के सुधरने से लगभग एक दर्जन गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। सड़कों के उन्नयन के साथ ही आगामी पांच वर्षों तक रखरखाव के लिए भी प्रावधान किया गया है। एफडीआर तकनीक से बनी इन सड़कों में जरूरत के अनुसार पुलियों, कॉजवे और पेवर ब्लॉक का निर्माण किया गया है। साथ ही प्राइम कोट (एसएस-1), टैक कोट (वीजी-10), सेमी लेयर, बिटुमिन कंक्रीट और मिट्टी कार्य को भी शामिल किया गया है, जिससे सड़कों की मजबूती और टिकाऊपन में इजाफा हुआ है।
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इनसेट

सड़क की पुरानी सामग्री को करते हैं इस्तेमाल
फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) एक आधुनिक सड़क निर्माण तकनीक है, जिसमें पुरानी सड़क की सामग्री को ही पुनः उपयोग में लाकर नई सड़क तैयार की जाती है। इसमें सीमेंट और रासायनिक योजकों के माध्यम से सड़क की मजबूती बढ़ाई जाती है। इससे समय और लागत की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

कोट

एफडीआर तकनीक से बनी इन सड़कों से बड़ी आबादी को बेहतर आवागमन की सुविधा मिली है। इस तकनीक में पुराने मटेरियल का दोबारा उपयोग होता है, जिससे नए संसाधनों की जरूरत कम पड़ती है और पर्यावरण पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव भी घटता है।


राजेश धर्माणी, तकनीकी शिक्षा मंत्री
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