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Bilaspur News: पेंशनरों के मेडिकल बिलों के भुगतान में देरी पर ज्वाइंट फ्रंट नाराज
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 20 Jun 2026 11:00 PM IST
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कहा, मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों की अधीनस्थ अधिकारियों पर कमजोर पकड़
11 मई के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश पेंशनर ज्वाइंट फ्रंट ने पेंशनरों के चिकित्सा बिलों के भुगतान में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए इसके लिए विभागीय स्तर पर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। फ्रंट के प्रदेशाध्यक्ष आत्माराम शर्मा, संयोजक हरीश शर्मा, महासचिव ठाकुर हुकम सिंह और अतिरिक्त महासचिव लेख राम कौंडल ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि चिकित्सा बिलों के भुगतान में हो रहे विलंब के लिए मुख्यमंत्री को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा कि संगठन के साथ 3 मई को हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने इस समस्या का संज्ञान लिया था और 11 मई को सभी विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए थे। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पेंशनरों के चिकित्सा बिल लंबित पड़े हैं। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश के मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों की अपने-अपने विभागों के अधीनस्थ आहरण एवं वितरण अधिकारियों पर पकड़ मजबूत नहीं है। इसी कारण संबंधित अधिकारी विभागाध्यक्षों और वित्त विभाग को आवश्यक बजट की मांग नहीं भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में शिक्षा विभाग सबसे अधिक प्रभावित विभागों में शामिल है। ज्वाइंट फ्रंट ने कहा कि प्रदेश के हजारों अस्वस्थ पेंशनर, जो नियमित दवाइयों पर निर्भर हैं, चिकित्सा बिलों का भुगतान न होने से आर्थिक और मानसिक परेशानी झेल रहे हैं। उन्होंने वित्त विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय से 11 मई की अधिसूचना की अनुपालना शीघ्र सुनिश्चित कराने की मांग की है। फ्रंट ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो पेंशनरों को अपने अधिकारों के लिए कड़ा कदम उठाने को विवश होना पड़ेगा।
11 मई के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश पेंशनर ज्वाइंट फ्रंट ने पेंशनरों के चिकित्सा बिलों के भुगतान में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए इसके लिए विभागीय स्तर पर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। फ्रंट के प्रदेशाध्यक्ष आत्माराम शर्मा, संयोजक हरीश शर्मा, महासचिव ठाकुर हुकम सिंह और अतिरिक्त महासचिव लेख राम कौंडल ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि चिकित्सा बिलों के भुगतान में हो रहे विलंब के लिए मुख्यमंत्री को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा कि संगठन के साथ 3 मई को हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने इस समस्या का संज्ञान लिया था और 11 मई को सभी विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए थे। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पेंशनरों के चिकित्सा बिल लंबित पड़े हैं। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश के मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों की अपने-अपने विभागों के अधीनस्थ आहरण एवं वितरण अधिकारियों पर पकड़ मजबूत नहीं है। इसी कारण संबंधित अधिकारी विभागाध्यक्षों और वित्त विभाग को आवश्यक बजट की मांग नहीं भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में शिक्षा विभाग सबसे अधिक प्रभावित विभागों में शामिल है। ज्वाइंट फ्रंट ने कहा कि प्रदेश के हजारों अस्वस्थ पेंशनर, जो नियमित दवाइयों पर निर्भर हैं, चिकित्सा बिलों का भुगतान न होने से आर्थिक और मानसिक परेशानी झेल रहे हैं। उन्होंने वित्त विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय से 11 मई की अधिसूचना की अनुपालना शीघ्र सुनिश्चित कराने की मांग की है। फ्रंट ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो पेंशनरों को अपने अधिकारों के लिए कड़ा कदम उठाने को विवश होना पड़ेगा।
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