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Bilaspur News: जेबीटी (टेट) उत्तर कुंजी को चुनौती संबंधी याचिका खारिज
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अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया
कोर्ट ने कहा, विशेषज्ञों के निर्णय में दखल नहीं, धोखाधड़ी का कोई ठोस प्रमाण नहीं
सरोज पाठक
बिलासपुर। जेबीटी (टेट) परीक्षा की उत्तर कुंजी में बदलाव को लेकर दायर सिविल अपील में अदालत ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए अभ्यर्थी को राहत देने से इनकार कर दिया। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने सोमवार को सुनाए फैसले में अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया।
अदालत ने कहा कि उत्तर कुंजी में संशोधन विषय विशेषज्ञों की सिफारिश के आधार पर किया गया था और इसमें किसी प्रकार की धोखाधड़ी सिद्ध नहीं हुई है। ऐसे मामलों में न्यायालय विशेषज्ञ की भूमिका नहीं निभा सकता। गांव बिलौर तहसील घुमारवीं निवासी साहिल ठाकुर ने सिविल सूट दायर कर आरोप लगाया था कि उसने 24 जुलाई 2022 को आयोजित जेबीटी (टेट) परीक्षा दी थी।
30 अगस्त 2022 को जारी प्रारंभिक उत्तर कुंजी के अनुसार उसे 150 में से 90 अंक प्राप्त हुए थे और वह परीक्षा में उत्तीर्ण घोषित हुआ था। लेकिन 19 सितंबर 2022 को शिक्षा बोर्ड द्वारा संशोधित उत्तर कुंजी जारी की गई, जिसमें प्रश्न संख्या 75 के उत्तर को सी से बदलकर बी कर दिया गया। इसके चलते उसके अंक घटकर 89 रह गए और वह अनुत्तीर्ण हो गया।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि यह बदलाव मनमाना और अनुचित है, जिससे उसके कॅरिअर को नुकसान हुआ है। उसने अदालत से संशोधित उत्तर कुंजी को निरस्त करने और खुद को उत्तीर्ण घोषित करने की मांग की थी। सिविल जज कोर्ट नंबर-2, घुमारवीं ने 1 जुलाई 2024 को याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने पाया था कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि उत्तर कुंजी में बदलाव किसी धोखाधड़ी या दुर्भावना के तहत किया गया।
अपील में तर्क दिया गया था कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया और उसे पूरा अवसर भी नहीं दिया गया। साथ ही उसने आवेदन देकर विषय विशेषज्ञ (एनसीईआरटी हिंदी व्याकरण) को बुलाने की मांग की, ताकि सही उत्तर स्पष्ट हो सके। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से कहा गया कि आपत्तियों के बाद प्रश्नपत्र को विषय विशेषज्ञों के पास भेजा गया था। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही संशोधित उत्तर कुंजी जारी की गई। ऐसे में दोबारा विशेषज्ञ बुलाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद कहा कि उत्तर कुंजी में बदलाव एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, जो अभ्यर्थियों की आपत्तियों के बाद की जाती है। रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि बोर्ड ने मामला विषय विशेषज्ञों को भेजा और उनकी रिपोर्ट के आधार पर संशोधन किया। याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि उसके साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी हुई है। केवल शपथ पर बयान देना पर्याप्त नहीं होता, ठोस साक्ष्य जरूरी होते हैं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय सुपर एग्जामिनर नहीं बन सकता और उत्तर कुंजी के मूल्यांकन का अधिकार विशेषज्ञों के पास ही होता है। संवाद
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अतिरिक्त साक्ष्य पर भी लगी रोक
अदालत ने ऑर्डर 41 रूल 27 सीपीसी के तहत दायर उस आवेदन को भी खारिज कर दिया, जिसमें विषय विशेषज्ञ को बुलाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि जब पहले ही विशेषज्ञों की राय ली जा चुकी है, तो दोबारा वही प्रक्रिया अपनाने का औचित्य नहीं बनता। अपील को खारिज करते हुए 1 जुलाई 2024 के ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा। साथ ही स्पष्ट किया कि मामले में कोई हस्तक्षेप करने का आधार नहीं बनता।
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कोर्ट ने कहा, विशेषज्ञों के निर्णय में दखल नहीं, धोखाधड़ी का कोई ठोस प्रमाण नहीं
सरोज पाठक
बिलासपुर। जेबीटी (टेट) परीक्षा की उत्तर कुंजी में बदलाव को लेकर दायर सिविल अपील में अदालत ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए अभ्यर्थी को राहत देने से इनकार कर दिया। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने सोमवार को सुनाए फैसले में अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया।
अदालत ने कहा कि उत्तर कुंजी में संशोधन विषय विशेषज्ञों की सिफारिश के आधार पर किया गया था और इसमें किसी प्रकार की धोखाधड़ी सिद्ध नहीं हुई है। ऐसे मामलों में न्यायालय विशेषज्ञ की भूमिका नहीं निभा सकता। गांव बिलौर तहसील घुमारवीं निवासी साहिल ठाकुर ने सिविल सूट दायर कर आरोप लगाया था कि उसने 24 जुलाई 2022 को आयोजित जेबीटी (टेट) परीक्षा दी थी।
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30 अगस्त 2022 को जारी प्रारंभिक उत्तर कुंजी के अनुसार उसे 150 में से 90 अंक प्राप्त हुए थे और वह परीक्षा में उत्तीर्ण घोषित हुआ था। लेकिन 19 सितंबर 2022 को शिक्षा बोर्ड द्वारा संशोधित उत्तर कुंजी जारी की गई, जिसमें प्रश्न संख्या 75 के उत्तर को सी से बदलकर बी कर दिया गया। इसके चलते उसके अंक घटकर 89 रह गए और वह अनुत्तीर्ण हो गया।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि यह बदलाव मनमाना और अनुचित है, जिससे उसके कॅरिअर को नुकसान हुआ है। उसने अदालत से संशोधित उत्तर कुंजी को निरस्त करने और खुद को उत्तीर्ण घोषित करने की मांग की थी। सिविल जज कोर्ट नंबर-2, घुमारवीं ने 1 जुलाई 2024 को याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने पाया था कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि उत्तर कुंजी में बदलाव किसी धोखाधड़ी या दुर्भावना के तहत किया गया।
अपील में तर्क दिया गया था कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया और उसे पूरा अवसर भी नहीं दिया गया। साथ ही उसने आवेदन देकर विषय विशेषज्ञ (एनसीईआरटी हिंदी व्याकरण) को बुलाने की मांग की, ताकि सही उत्तर स्पष्ट हो सके। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से कहा गया कि आपत्तियों के बाद प्रश्नपत्र को विषय विशेषज्ञों के पास भेजा गया था। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही संशोधित उत्तर कुंजी जारी की गई। ऐसे में दोबारा विशेषज्ञ बुलाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद कहा कि उत्तर कुंजी में बदलाव एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, जो अभ्यर्थियों की आपत्तियों के बाद की जाती है। रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि बोर्ड ने मामला विषय विशेषज्ञों को भेजा और उनकी रिपोर्ट के आधार पर संशोधन किया। याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि उसके साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी हुई है। केवल शपथ पर बयान देना पर्याप्त नहीं होता, ठोस साक्ष्य जरूरी होते हैं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय सुपर एग्जामिनर नहीं बन सकता और उत्तर कुंजी के मूल्यांकन का अधिकार विशेषज्ञों के पास ही होता है। संवाद
अतिरिक्त साक्ष्य पर भी लगी रोक
अदालत ने ऑर्डर 41 रूल 27 सीपीसी के तहत दायर उस आवेदन को भी खारिज कर दिया, जिसमें विषय विशेषज्ञ को बुलाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि जब पहले ही विशेषज्ञों की राय ली जा चुकी है, तो दोबारा वही प्रक्रिया अपनाने का औचित्य नहीं बनता। अपील को खारिज करते हुए 1 जुलाई 2024 के ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा। साथ ही स्पष्ट किया कि मामले में कोई हस्तक्षेप करने का आधार नहीं बनता।