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Bilaspur News: जमीन विवाद में राहत बरकरार, दोनों अपीलें खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 01 Apr 2026 11:56 PM IST
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अदालत से
एडीजे घुमारवीं कोर्ट का फैसला, ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराया
स्टे के बावजूद म्यूटेशन पर उठे सवाल, कोर्ट ने कहा-रिकॉर्ड में दर्ज मालिक को प्राथमिकता
अंतरिम राहत के लिए तीन शर्तें जरूरी, अपीलकर्ता साबित नहीं कर पाए प्रथम दृष्टया केस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जमीन के विवाद से जुड़े एक अहम मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दायर दोनों सिविल अपीलों को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत के 18 नवंबर 2025 के आदेश को सही ठहराते हुए अंतरिम राहत को बरकरार रखा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज स्वामित्व और कब्जे को प्राथमिकता दी जाएगी और इसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। मामला गांव क्षेत्र की करीब 4 बीघा जमीन से जुड़ा है, जिसमें वादिनी ने खुद को एकमात्र मालिक और कब्जाधारी बताते हुए आरोप लगाया था कि पड़ोसी जबरन कब्जा करने और निर्माण करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने अदालत में स्थायी निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) की मांग की। दूसरी ओर, प्रतिवादियों ने दावा किया कि पूरी जमीन करीब 7-18 बीघा है और वे भी उसके सह-मालिक व कब्जाधारी हैं। उन्होंने म्यूटेशन और नक्शा तैयार करने की प्रक्रिया को गलत बताते हुए काउंटर क्लेम भी दायर किया। ट्रायल कोर्ट ने वादिनी के पक्ष में फैसला देते हुए प्रतिवादियों को जमीन पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या निर्माण करने से रोक दिया था। वहीं, प्रतिवादियों की ओर से दायर अंतरिम राहत की मांग को खारिज कर दिया गया था। अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि म्यूटेशन स्टेटस-क्वो आदेश के बावजूद किया गया, गलत नक्शा बनाकर जमीन का बंटवारा किया गया, वे जमीन के एक हिस्से पर कब्जे में हैं। इसलिए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया जाना चाहिए।
अदालत ने सभी तर्कों को सुनने के बाद कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में वादिनी को मालिक व कब्जाधारी दिखाया गया है। म्यूटेशन को पहले ही कलेक्टर द्वारा सही ठहराया जा चुका है। अपीलकर्ता प्रथम दृष्टया केस, संतुलन और अपूरणीय क्षति साबित नहीं कर पाए। अदालत ने यह भी कहा कि इन बिंदुओं का अंतिम निर्णय मुख्य मुकदमे में साक्ष्यों के आधार पर होगा, न कि अंतरिम चरण में। अदालत ने दोनों अपीलों को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। साथ ही दोनों पक्षों को 18 अप्रैल 2026 को ट्रायल कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियां केवल अंतरिम राहत तक सीमित हैं और मुख्य मामले के अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज स्वामित्व और कब्जे को प्राथमिकता दी जाएगी और इसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। मामला गांव क्षेत्र की करीब 4 बीघा जमीन से जुड़ा है, जिसमें वादिनी ने खुद को एकमात्र मालिक और कब्जाधारी बताते हुए आरोप लगाया था कि पड़ोसी जबरन कब्जा करने और निर्माण करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने अदालत में स्थायी निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) की मांग की। दूसरी ओर, प्रतिवादियों ने दावा किया कि पूरी जमीन करीब 7-18 बीघा है और वे भी उसके सह-मालिक व कब्जाधारी हैं। उन्होंने म्यूटेशन और नक्शा तैयार करने की प्रक्रिया को गलत बताते हुए काउंटर क्लेम भी दायर किया। ट्रायल कोर्ट ने वादिनी के पक्ष में फैसला देते हुए प्रतिवादियों को जमीन पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या निर्माण करने से रोक दिया था। वहीं, प्रतिवादियों की ओर से दायर अंतरिम राहत की मांग को खारिज कर दिया गया था। अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि म्यूटेशन स्टेटस-क्वो आदेश के बावजूद किया गया, गलत नक्शा बनाकर जमीन का बंटवारा किया गया, वे जमीन के एक हिस्से पर कब्जे में हैं। इसलिए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया जाना चाहिए।
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अदालत ने सभी तर्कों को सुनने के बाद कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में वादिनी को मालिक व कब्जाधारी दिखाया गया है। म्यूटेशन को पहले ही कलेक्टर द्वारा सही ठहराया जा चुका है। अपीलकर्ता प्रथम दृष्टया केस, संतुलन और अपूरणीय क्षति साबित नहीं कर पाए। अदालत ने यह भी कहा कि इन बिंदुओं का अंतिम निर्णय मुख्य मुकदमे में साक्ष्यों के आधार पर होगा, न कि अंतरिम चरण में। अदालत ने दोनों अपीलों को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। साथ ही दोनों पक्षों को 18 अप्रैल 2026 को ट्रायल कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियां केवल अंतरिम राहत तक सीमित हैं और मुख्य मामले के अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगी।