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Bilaspur: चोरी की गाड़ियों के अवैध पंजीकरण में एक और अधिकारी संदेह के घेरे में, कई गाड़ियों की फर्जी एंट्री

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 22 Jan 2026 06:00 AM IST
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सार

आरएलए बिलासपुर में चोरी की गाड़ियों के अवैध पंजीकरण मामले में आरएलए के ही एक पूर्व सीनियर असिस्टेंट संदेह के घेरे में हैं। पढ़ें पूरी खबर...

RLA Bilaspur Another officer under suspicion in illegal registration of stolen vehicles
फ्रॉड। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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क्षेत्रीय लाइसेंसिंग एवं पंजीकरण प्राधिकरण (आरएलए) बिलासपुर में चोरी की गाड़ियों के अवैध पंजीकरण की परतें खुलने के बाद विभाग में हड़कंच मचा है। एक अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद मामले में अब आरएलए के ही एक पूर्व सीनियर असिस्टेंट का नाम भी सामने आ रहा है। डीसी ऑफिस में तैनात इस पूर्व सीनियर असिस्टेंट का हाल ही में जिले के दूसरे आरएलए में तबादला हुआ है। सूत्रों के मुताबिक इसके पास आलीशान घर और लाखों की लग्जरी कारें हैं और संपत्ति बेहिसाब है, जो आय के मुकाबले काफी अधिक है। इसी के चलते यह संदेह के घेरे में है। वह विदेश और गोवा जैसे पर्यटन स्थलों पर छुट्टियां मनाने जाता है।

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मामले में अभी जिसकी गिरफ्तारी हुई है, उसके पास भी आलीशान मकान सहित करोड़ों की संपत्ति मिली है। बताया जा रहा है कि जब रजिस्ट्रेशन पोर्टल बीएस4 से बीएस6 में शिफ्ट हो रहा था, तब बैकएंड के जरिए पुरानी तारीख में सैकड़ों गाड़ियों की फर्जी एंट्री की गई। उस समय उक्त सीनियर असिसटेंट भी आरएलए में तैनात था। चर्चा है कि उसके पास उच्चाधिकारियों के लॉगिन आईडी और पासवर्ड थे। उसी के पास उस आरोपी का लॉगिन पासवर्ड भी था जो अभी दिल्ली क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में है। इन्हीं लॉगिन आईडी से पर्दे के पीछे छिपा यह अधिकारी खुद ही फर्जीवाड़े को अप्रूव कर देता था।

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गिरफ्तार आरोपी को पद से हटाकर किया चार्जशीट : एसडीएम
एसडीएम सदर डॉ. राजदीप सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी को पहले ही पद से हटाकर चार्जशीट किया जा चुका है और डीसी ऑफिस से नोटिस जारी किए गए हैं। दिल्ली पुलिस को मामले से संबंधित सारा रिकॉर्ड मुहैया करा दिया गया है। अगर वर्तमान में भी कोई शामिल पाया गया, तो उसे सीधे सेवा से बर्खास्त कर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। बताते चलें कि दिल्ली क्राइम ब्रांच ने मामले में आरएलए बिलासपुर के एक अधिकारी को गिरफ्तार किया है। वह सात दिन के पुलिस रिमांड पर है। रिमांड के दौरान हुए खुलासों के बाद जल्द ही मुख्य संदेही की गिरफ्तारी हो सकती है। जांच एजेंसी अब उन बड़े चेहरों को बेनकाब करने के करीब हैं, जिनकी शह पर यह करोड़ों का खेल चल रहा था।

हिमाचल, पंजाब, दिल्ली समेत कई राज्यों में नेटवर्क
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े अंतरराज्जीय अपराधी नेटवर्क की परतें खोली हैं, जो चोरी की लग्जरी गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों से नई दिखाकर बेचने में माहिर है। इस सिंडिकेट के तार हिमाचल के बिलासपुर आरएलए कार्यालय से सीधे जुड़े पाए गए, जहां आरएलए कर्मचारियों और एजेंटों की मिलीभगत से चोरी के वाहनों को नई पहचान दी जा रही थी। हालांकि अभी, तक एक ही आरोपी की गिरफ्तारी हुई है,लेकिन अभी इसमें कई बड़े चेहरों के तार जुड़ रहे हैं।

9 जनवरी को दिल्ली क्राइम ब्रांच में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गई जांच से पता चला कि यह गिरोह संगठित तरीके से चोरी, दस्तावेजों में जालसाजी, धोखाधड़ी और संपत्ति की पहचान बदलने जैसे अपराधों में लिप्त है। अपराधियों ने खरीदारों को ठगकर, बैंकों को लोन चुकता न करके और सरकारी राजस्व को चूना लगाकर करोड़ों की कमाई की। जांच से सामने आया कि यह नेटवर्क पंजाब, हिमाचल और दिल्ली सहित कई राज्यों में फैला हुआ है। इस रैकेट ने कम से कम दर्जनों वाहनों को वैध तरीके से बेचा, जिससे प्रभावित लोगों की संख्या सैकड़ों में हो सकती है। क्राइम ब्रांच के इंटर स्टेट सेल ने इस मामले की तह तक जाने के लिए 2025 में दिल्ली के एक थाने में दर्ज पुराने मामले से क्लू पकड़े। वहीं पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट पर नई एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें संगठित अपराध गिरोह के सदस्यों पर चोरी की संपत्ति को छिपाने, जाली दस्तावेज बनाने और धोखे से बेचने जैसे गंभीर अपराधों का जिक्र है।

जांच टीम ने पंजाब के जालंधर और चंडीगढ़ से दो मुख्य आरोपियों दमनदीप उर्फ लकी जालंधर और अरविंद शर्मा चंडीगढ़ को गिरफ्तार किया। इनके अलावा मनबीर उर्फ बिंटा और कंवलजीत उर्फ जॉली भी इस नेटवर्क का हिस्सा पाया गया है। पूछताछ से खुलासा हुआ कि दमनदीप जालंधर में सेकंड-हैंड कारों का शोरूम चलाता है, जो असल में चोरी की गाड़ियों को बेचने का अड्डा है। जांच में दिल्ली से चोरी हुई दो फॉर्च्यूनर, एसयूवी रजिस्ट्रेशन नंबर एचपी 24 ई 4948 और एचपी 24 ई 3974 की रिकवरी हुई, जिन्हें दिल्ली के खरीदारों ने खरीदा था, लेकिन जब इन गाड़ियों की जांच की गई, तो पता चला कि उनकी चेसिस नंबरों में हेरफेर किया गया था और फर्जी कागजों से बिलासपुर आरएलए में रजिस्टर करवाया गया था।

पहचान बदलना और जालसाजी
चुराई गई गाड़ियों के चेसिस नंबरों को टैंपर किया जाता। पुरानी या पानी में डूबी गाड़ियों के चेसिस नंबरों को चोरी वाली गाड़ियों पर पंच कर दिया जाता, ताकि वे नई लगें। फिर, फर्जी सेल लेटर्स, फॉर्म-21, एनओसी और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते। इस प्रक्रिया में दस्तावेजों में हेरफेर और संपत्ति की पहचान छिपाने जैसे अपराध होते। गिरोह के सदस्य इन जाली कागजों को इतनी सफाई से बनाते कि वे असली लगते।
 

फर्जी रजिस्ट्रेशन
बिलासपुर आरएलए में एजेंट्स और कुछ कर्मचारियों की सांठगांठ से फर्जी एनओसी, बैंक एनओसी और कागजों के आधार पर गाड़ियों को रजिस्टर करवाया गया। चोरी की गाड़ियां ''''फर्स्ट-हैंड'''' दिखाकर पंजीकृत की। गाड़ियों को दिल्ली जैसे बड़े बाजारों में खरीदारों को बेचा जाता। खरीदारों को जाली आरसी और दस्तावेज दिए जाते, जो बाद में चेकिंग में पकड़े गए।
 

बिलासपुर आरएलए घोटाले ने पूरे देश में हिमाचल को किया शर्मसार:  त्रिलोक जमवाल
भाजपा प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक जमवाल ने बिलासपुर स्थित आरएलए कार्यालय में सामने आए वाहन पंजीकरण घोटाले को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि दिल्ली क्राइम ब्रांच की ओर से हिमाचल के एक कर्मचारी की गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचार जड़ से लेकर शीर्ष तक फैल चुका है और आज पूरे देश में हिमाचल प्रदेश की किरकिरी हो रही है। त्रिलोक जमवाल ने कहा कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित और संगठित घोटाला है, जिसमें सेकंड और थर्ड हैंड वाहनों को फर्स्ट हैंड दिखाकर पंजीकरण किया गया, नियमों को ताक पर रखकर वीआईपी और फैंसी नंबर आवंटित किए गए और इसके बदले अवैध वसूली की गई। इससे भी गंभीर बात यह है कि दिल्ली में चोरी की वारदातों में इस्तेमाल हुआ वाहन बिलासपुर आरएलए से पंजीकृत पाया गया, जिसने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के इस भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है और यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भाजपा सड़क से सदन तक इस मुद्दे को पूरी ताकत से उठाएगी।

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