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Bilaspur News: खून के हस्ताक्षरों से उग्र हुआ जुखाला कॉलेज बचाओ आंदोलन
Sun, 28 Jun 2026 11:55 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 28 Jun 2026 11:55 PM IST
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जुखाला में कॉलेज बचाओ आंदोलन में खून से हस्ताक्षर करते बुजुर्ग। स्रोत: जागरूक पाठक
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दो घंटे का चक्का जाम, 90 वर्षीय बुजुर्ग समेत महिलाओं और युवाओं ने खून से किए हस्ताक्षर
राष्ट्रपति से मुख्यमंत्री तक भेजा जाएगा ज्ञापन, साइंस, कॉमर्स संकाय बहाल करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। राजकीय महाविद्यालय जुखाला में विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को दोबारा बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा जनआंदोलन अब उग्र होता नजर आ रहा है। आंदोलन के पांचवें दिन रविवार को प्रदर्शनकारियों ने दो घंटे तक चक्का जाम कर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इसके साथ ही आंदोलन को नया रूप देते हुए खूनी हस्ताक्षर अभियान शुरू किया गया, जिसमें 90 वर्षीय बुजुर्ग, महिलाओं, युवाओं और क्षेत्र के अन्य लोगों ने अपने खून से हस्ताक्षर कर सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का संकल्प लिया।
धरना स्थल पर जुटे लोगों ने कहा कि पिछले पांच दिनों से दावीं घाटी के लोग भीषण गर्मी के बावजूद शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक प्रशासन या सरकार का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उनसे बातचीत करने नहीं पहुंचा। इससे क्षेत्र के लोगों में सरकार के प्रति गहरा रोष है। रविवार को नम्होल वार्ड से जिला परिषद सदस्य सुरभि ठाकुर भी धरना स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने आंदोलन को समर्थन देते हुए खून से हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार को विज्ञान और वाणिज्य संकाय बंद करने का फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए।
आंदोलन मंच के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रमेश ठाकुर ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत से ही लोगों ने पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया। इस दौरान किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नारेबाजी भी नहीं की गई, लेकिन सरकार और प्रशासन की लगातार अनदेखी के कारण लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आगामी चरण में मंत्रियों का घेराव, शिमला कूच और सचिवालय का घेराव जैसे बड़े आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा खून से किए गए हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ई-मेल के माध्यम से भेजा जाएगा, जबकि मूल खूनी हस्ताक्षर मुख्यमंत्री को प्रेषित किए जाएंगे। आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि राजकीय महाविद्यालय जुखाला में विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को तत्काल प्रभाव से दोबारा बहाल किया जाए, ताकि क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए भटकना न पड़े और उनके भविष्य के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो।
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राष्ट्रपति से मुख्यमंत्री तक भेजा जाएगा ज्ञापन, साइंस, कॉमर्स संकाय बहाल करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। राजकीय महाविद्यालय जुखाला में विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को दोबारा बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा जनआंदोलन अब उग्र होता नजर आ रहा है। आंदोलन के पांचवें दिन रविवार को प्रदर्शनकारियों ने दो घंटे तक चक्का जाम कर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इसके साथ ही आंदोलन को नया रूप देते हुए खूनी हस्ताक्षर अभियान शुरू किया गया, जिसमें 90 वर्षीय बुजुर्ग, महिलाओं, युवाओं और क्षेत्र के अन्य लोगों ने अपने खून से हस्ताक्षर कर सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का संकल्प लिया।
धरना स्थल पर जुटे लोगों ने कहा कि पिछले पांच दिनों से दावीं घाटी के लोग भीषण गर्मी के बावजूद शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक प्रशासन या सरकार का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उनसे बातचीत करने नहीं पहुंचा। इससे क्षेत्र के लोगों में सरकार के प्रति गहरा रोष है। रविवार को नम्होल वार्ड से जिला परिषद सदस्य सुरभि ठाकुर भी धरना स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने आंदोलन को समर्थन देते हुए खून से हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार को विज्ञान और वाणिज्य संकाय बंद करने का फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए।
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आंदोलन मंच के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रमेश ठाकुर ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत से ही लोगों ने पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया। इस दौरान किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नारेबाजी भी नहीं की गई, लेकिन सरकार और प्रशासन की लगातार अनदेखी के कारण लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आगामी चरण में मंत्रियों का घेराव, शिमला कूच और सचिवालय का घेराव जैसे बड़े आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा खून से किए गए हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ई-मेल के माध्यम से भेजा जाएगा, जबकि मूल खूनी हस्ताक्षर मुख्यमंत्री को प्रेषित किए जाएंगे। आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि राजकीय महाविद्यालय जुखाला में विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को तत्काल प्रभाव से दोबारा बहाल किया जाए, ताकि क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए भटकना न पड़े और उनके भविष्य के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो।

जुखाला में कॉलेज बचाओ आंदोलन में खून से हस्ताक्षर करते बुजुर्ग। स्रोत: जागरूक पाठक

जुखाला में कॉलेज बचाओ आंदोलन में खून से हस्ताक्षर करते बुजुर्ग। स्रोत: जागरूक पाठक
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