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Bilaspur News: राज्य स्तरीय ग्रीष्मोत्सव घुमारवीं झेल रहा है मौसम की मार
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 08 Apr 2026 11:37 PM IST
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ग्रीष्मोत्सव घुमारवीं में बारिश के बाद जमा पानी। संवाद
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लगातार बारिश से ग्रीष्मोत्सव घुमारवीं फीका, कारोबार ठप होने की कगार पर
दुकानदारों की टूटी उम्मीदें, झूले सूने पड़े, दो दिन से हो रही बारिश
संजीव शामा
घुमारवीं(बिलासपुर)। राज्य स्तरीय ग्रीष्मोत्सव घुमारवीं इस बार मौसम की मार झेल रहा है। पिछले दो दिन से लगातार हो रही बारिश ने जहां मेले की रौनक को फीका कर दिया है, वहीं कारोबार पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। दूर-दराज से आए दुकानदारों और व्यापारियों के चेहरों पर मायूसी साफ झलक रही है।
बारिश के चलते मेले में लोगों की संख्या में भारी कमी आई है। आमतौर पर शाम होते ही जहां मेला मैदान में हजारों की भीड़ उमड़ती थी और हर स्टॉल पर ग्राहकों की चहल-पहल रहती थी, वहीं अब सूना माहौल देखने को मिल रहा है। लगातार हो रही बारिश के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, जिससे व्यापारियों की बिक्री लगभग ठप हो गई है। मेले में स्टॉल लगाने पहुंचे व्यापारियों ने बताया कि उन्होंने हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च कर यहां अपनी दुकानें लगाई हैं। कई व्यापारी हिमाचल के अन्य जिलों के अलावा पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी लंबा सफर तय कर यहां पहुंचे हैं। उनका कहना है कि ग्रीष्मोत्सव जैसे बड़े आयोजनों से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद रहती है, लेकिन इस बार मौसम ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। एक दुकानदार ने बताया कि उन्होंने बच्चों के खिलौनों और घरेलू सामान का स्टॉल लगाया है, लेकिन दो दिन में खर्च का आधा भी नहीं निकल पाया है। वहीं खान-पान के स्टॉल लगाने वाले व्यापारियों का कहना है कि बारिश के कारण ग्राहकों की संख्या बेहद कम है, जिससे सामान खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। उधर, झूले और अन्य मनोरंजन साधन लगाने वाले बाहरी व्यापारी भी खासे परेशान हैं। उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर बड़े-बड़े झूले और गेम जोन तैयार किए हैं, लेकिन लोगों की कमी के कारण झूले खाली पड़े हैं। जहां पहले बच्चों और युवाओं की भीड़ लगी रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। झूला संचालकों का कहना है कि रोजाना होने वाली कमाई न के बराबर रह गई है, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहा है।
व्यापारियों ने प्रशासन से भी उम्मीद जताई है कि यदि संभव हो तो मेले की अवधि बढ़ाई जाए या उन्हें किसी तरह राहत दी जाए, ताकि वे अपने नुकसान की कुछ भरपाई कर सकें। हालांकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रीष्मोत्सव क्षेत्र का प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें हर साल बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। इस बार मौसम खराब होने के कारण न तो लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का पूरा आनंद ले पा रहे हैं, न ही मेले का उत्साह पहले जैसा दिखाई दे रहा है। कुल मिलाकर, लगातार बारिश ने ग्रीष्मोत्सव की चमक को फीका कर दिया है और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें वीरवार को होने वाले समापन दिवस पर टिकी हैं। यदि मौसम साफ रहता है, तो मेले में एक बार फिर भीड़ उमड़ने की उम्मीद है और व्यापारियों को कुछ राहत मिल सकती है। संवाद
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दुकानदारों की टूटी उम्मीदें, झूले सूने पड़े, दो दिन से हो रही बारिश
संजीव शामा
घुमारवीं(बिलासपुर)। राज्य स्तरीय ग्रीष्मोत्सव घुमारवीं इस बार मौसम की मार झेल रहा है। पिछले दो दिन से लगातार हो रही बारिश ने जहां मेले की रौनक को फीका कर दिया है, वहीं कारोबार पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। दूर-दराज से आए दुकानदारों और व्यापारियों के चेहरों पर मायूसी साफ झलक रही है।
बारिश के चलते मेले में लोगों की संख्या में भारी कमी आई है। आमतौर पर शाम होते ही जहां मेला मैदान में हजारों की भीड़ उमड़ती थी और हर स्टॉल पर ग्राहकों की चहल-पहल रहती थी, वहीं अब सूना माहौल देखने को मिल रहा है। लगातार हो रही बारिश के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, जिससे व्यापारियों की बिक्री लगभग ठप हो गई है। मेले में स्टॉल लगाने पहुंचे व्यापारियों ने बताया कि उन्होंने हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च कर यहां अपनी दुकानें लगाई हैं। कई व्यापारी हिमाचल के अन्य जिलों के अलावा पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी लंबा सफर तय कर यहां पहुंचे हैं। उनका कहना है कि ग्रीष्मोत्सव जैसे बड़े आयोजनों से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद रहती है, लेकिन इस बार मौसम ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। एक दुकानदार ने बताया कि उन्होंने बच्चों के खिलौनों और घरेलू सामान का स्टॉल लगाया है, लेकिन दो दिन में खर्च का आधा भी नहीं निकल पाया है। वहीं खान-पान के स्टॉल लगाने वाले व्यापारियों का कहना है कि बारिश के कारण ग्राहकों की संख्या बेहद कम है, जिससे सामान खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। उधर, झूले और अन्य मनोरंजन साधन लगाने वाले बाहरी व्यापारी भी खासे परेशान हैं। उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर बड़े-बड़े झूले और गेम जोन तैयार किए हैं, लेकिन लोगों की कमी के कारण झूले खाली पड़े हैं। जहां पहले बच्चों और युवाओं की भीड़ लगी रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। झूला संचालकों का कहना है कि रोजाना होने वाली कमाई न के बराबर रह गई है, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहा है।
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व्यापारियों ने प्रशासन से भी उम्मीद जताई है कि यदि संभव हो तो मेले की अवधि बढ़ाई जाए या उन्हें किसी तरह राहत दी जाए, ताकि वे अपने नुकसान की कुछ भरपाई कर सकें। हालांकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रीष्मोत्सव क्षेत्र का प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें हर साल बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। इस बार मौसम खराब होने के कारण न तो लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का पूरा आनंद ले पा रहे हैं, न ही मेले का उत्साह पहले जैसा दिखाई दे रहा है। कुल मिलाकर, लगातार बारिश ने ग्रीष्मोत्सव की चमक को फीका कर दिया है और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें वीरवार को होने वाले समापन दिवस पर टिकी हैं। यदि मौसम साफ रहता है, तो मेले में एक बार फिर भीड़ उमड़ने की उम्मीद है और व्यापारियों को कुछ राहत मिल सकती है। संवाद