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Bilaspur News: चिट्टा रखने के दोषी को दो साल की कठोर कैद
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घुमारवीं की विशेष अदालत ने सुनाई सजा, 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं की विशेष अदालत ने चिट्टा रखने के मामले में अमृतसर निवासी जगजीत सिंह को दोषी करार देते हुए दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश डॉ. मोहित बंसल ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए दोषी पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। मामला पुलिस थाना तलाई में 28 मार्च 2024 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार पुलिस टीम गश्त पर थी। मलारी जंगल के पास पुलिस वाहन को देखकर एक व्यक्ति पीछे मुड़कर तेज चलने लगा। पुलिस के अनुसार उसने नीली लोअर की जेब से एक पुड़िया निकालकर झाड़ियों में फेंक दी। पुलिस ने उसे कुछ दूरी पर पकड़ लिया और झाड़ियों से पुड़िया बरामद की। पुड़िया में मटमैले रंग का पदार्थ मिला। पॉलीथिन समेत इसका वजन 6.21 ग्राम था। फोरेंसिक जांच में पदार्थ डायस्टाइल मॉर्फिन (हेरोइन) पाया गया। पॉलीथिन अलग करने पर वास्तविक वजन 5.498 ग्राम निकला, जो एनडीपीएस एक्ट के तहत इंटरमीडिएट मात्रा थी। मामले में अभियोजन ने 11 गवाह पेश किए। बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई और स्वतंत्र गवाह की भूमिका पर सवाल उठाए, लेकिन अदालत ने दलीलें खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी की गवाही स्पष्ट और भरोसेमंद है। केवल पुलिस कर्मचारियों के गवाह होने के आधार पर उनकी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने दोषी की हिरासत में बिताई अवधि को सजा में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार दोषी ने 25 हजार रुपये जुर्माना जमा कर दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं की विशेष अदालत ने चिट्टा रखने के मामले में अमृतसर निवासी जगजीत सिंह को दोषी करार देते हुए दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश डॉ. मोहित बंसल ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए दोषी पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। मामला पुलिस थाना तलाई में 28 मार्च 2024 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार पुलिस टीम गश्त पर थी। मलारी जंगल के पास पुलिस वाहन को देखकर एक व्यक्ति पीछे मुड़कर तेज चलने लगा। पुलिस के अनुसार उसने नीली लोअर की जेब से एक पुड़िया निकालकर झाड़ियों में फेंक दी। पुलिस ने उसे कुछ दूरी पर पकड़ लिया और झाड़ियों से पुड़िया बरामद की। पुड़िया में मटमैले रंग का पदार्थ मिला। पॉलीथिन समेत इसका वजन 6.21 ग्राम था। फोरेंसिक जांच में पदार्थ डायस्टाइल मॉर्फिन (हेरोइन) पाया गया। पॉलीथिन अलग करने पर वास्तविक वजन 5.498 ग्राम निकला, जो एनडीपीएस एक्ट के तहत इंटरमीडिएट मात्रा थी। मामले में अभियोजन ने 11 गवाह पेश किए। बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई और स्वतंत्र गवाह की भूमिका पर सवाल उठाए, लेकिन अदालत ने दलीलें खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी की गवाही स्पष्ट और भरोसेमंद है। केवल पुलिस कर्मचारियों के गवाह होने के आधार पर उनकी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने दोषी की हिरासत में बिताई अवधि को सजा में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार दोषी ने 25 हजार रुपये जुर्माना जमा कर दिया है।