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संस्कृत के विद्यार्थी बन सकते हैं भारतीय संस्कृति के सशक्त ब्रांड एंबेसडर : धर्माणी
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संस्कृत महाविद्यालय डंगार में बच्चों के साथ संवाद करते मंत्री राजेश धर्माणी। स्रोत: डीपीआरओ
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तकनीकी शिक्षा मंत्री ने संस्कृत महाविद्यालय डंगार में विद्यार्थियों से किया संवाद
विद्यार्थियों को नशामुक्त हिमाचल की दिलाई शपथ
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि संस्कृत विश्व की प्राचीनतम और ज्ञान-विज्ञान से समृद्ध भाषाओं में से एक है। संस्कृत के विद्यार्थी अंग्रेजी भाषा और कंप्यूटर तकनीक का ज्ञान हासिल कर दुनिया भर में भारतीय संस्कृति और संस्कृत के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं। वे भारतीय संस्कृति के सशक्त ब्रांड एंबेसडर बन सकते हैं। धर्माणी मंगलवार को राजकीय संस्कृत महाविद्यालय डंगार में विद्यार्थियों के साथ संवाद कर रहे थे।
उन्होंने विद्यार्थियों की मांग पर महाविद्यालय में ई-लाइब्रेरी के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाने, पांच सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाने, संगीत वाद्ययंत्र उपलब्ध करवाने और पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए हैंडपंप स्थापित करने की घोषणा की। महाविद्यालय के नाम के साथ श्री सरस्वती शब्द जोड़ने की मांग पर उन्होंने प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। धर्माणी ने कहा कि महाविद्यालय के जीर्णोद्धार कार्यों के लिए प्रदेश सरकार ने 25 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। इनमें करीब 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। खेल मैदान के लिए एफआरए का मामला संबंधित विभाग के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। कॉलेज में एनसीसी, एनएसएस और स्काउट्स एंड गाइड की इकाइयां शुरू करने का मामला भी सरकार के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए अपनी ओर से प्रतिवर्ष तीन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने की घोषणा की, जिसमें दो छात्राएं शामिल होंगी। इस दौरान मंत्री ने विद्यार्थियों को नशामुक्त हिमाचल की शपथ भी दिलाई। संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने मंत्री से उनके जीवन, राजनीतिक सफर और संवाद कार्यक्रम शुरू करने की प्रेरणा से जुड़े सवाल पूछे। धर्माणी ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बच्चे और युवा देश का भविष्य हैं और उनके माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। मंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल केवल मनोरंजन के लिए न करें, बल्कि इसे ज्ञान अर्जन और सीखने का माध्यम बनाएं। उन्होंने व्यक्तित्व विकास, प्रभावी संवाद कौशल, शारीरिक स्वास्थ्य और अच्छे साहित्य के अध्ययन पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या डिप्लोमा हासिल करना नहीं, बल्कि विषय का गहन ज्ञान प्राप्त कर स्वयं को कुशल और सक्षम बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अध्यात्म समाज को जोड़ने का काम करता है और घृणा, द्वेष और वैमनस्य जैसी नकारात्मक भावनाओं को दूर कर सद्भाव, दया और करुणा को मजबूत करता है। संस्कृत शिक्षा में संगीत के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को धार्मिक गुरुओं और महान विभूतियों की जीवनियों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। इससे पहले महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संदीप शर्मा ने राजेश धर्माणी का स्वागत किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के अध्यापक भी मौजूद रहे।
श्रेष्ठ दस निबंधों को सीर उत्सव में मिलेगा सम्मान
धर्माणी ने कहा कि जिला स्तरीय सीर उत्सव में संस्कृत विद्यार्थियों को मंत्रोच्चारण प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया जाएगा। विद्यार्थियों को आज से पांच या दस वर्ष बाद खुद को किस स्थान पर देखना चाहते हैं, इस विषय पर 25 सितंबर तक निबंध लिखने को कहा गया। सर्वश्रेष्ठ दस निबंधों का चयन कर उन्हें जिला स्तरीय सीर उत्सव में पुरस्कृत किया जाएगा।
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विद्यार्थियों को नशामुक्त हिमाचल की दिलाई शपथ
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि संस्कृत विश्व की प्राचीनतम और ज्ञान-विज्ञान से समृद्ध भाषाओं में से एक है। संस्कृत के विद्यार्थी अंग्रेजी भाषा और कंप्यूटर तकनीक का ज्ञान हासिल कर दुनिया भर में भारतीय संस्कृति और संस्कृत के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं। वे भारतीय संस्कृति के सशक्त ब्रांड एंबेसडर बन सकते हैं। धर्माणी मंगलवार को राजकीय संस्कृत महाविद्यालय डंगार में विद्यार्थियों के साथ संवाद कर रहे थे।
उन्होंने विद्यार्थियों की मांग पर महाविद्यालय में ई-लाइब्रेरी के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाने, पांच सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाने, संगीत वाद्ययंत्र उपलब्ध करवाने और पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए हैंडपंप स्थापित करने की घोषणा की। महाविद्यालय के नाम के साथ श्री सरस्वती शब्द जोड़ने की मांग पर उन्होंने प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। धर्माणी ने कहा कि महाविद्यालय के जीर्णोद्धार कार्यों के लिए प्रदेश सरकार ने 25 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। इनमें करीब 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। खेल मैदान के लिए एफआरए का मामला संबंधित विभाग के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। कॉलेज में एनसीसी, एनएसएस और स्काउट्स एंड गाइड की इकाइयां शुरू करने का मामला भी सरकार के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए अपनी ओर से प्रतिवर्ष तीन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने की घोषणा की, जिसमें दो छात्राएं शामिल होंगी। इस दौरान मंत्री ने विद्यार्थियों को नशामुक्त हिमाचल की शपथ भी दिलाई। संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने मंत्री से उनके जीवन, राजनीतिक सफर और संवाद कार्यक्रम शुरू करने की प्रेरणा से जुड़े सवाल पूछे। धर्माणी ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बच्चे और युवा देश का भविष्य हैं और उनके माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। मंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल केवल मनोरंजन के लिए न करें, बल्कि इसे ज्ञान अर्जन और सीखने का माध्यम बनाएं। उन्होंने व्यक्तित्व विकास, प्रभावी संवाद कौशल, शारीरिक स्वास्थ्य और अच्छे साहित्य के अध्ययन पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या डिप्लोमा हासिल करना नहीं, बल्कि विषय का गहन ज्ञान प्राप्त कर स्वयं को कुशल और सक्षम बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अध्यात्म समाज को जोड़ने का काम करता है और घृणा, द्वेष और वैमनस्य जैसी नकारात्मक भावनाओं को दूर कर सद्भाव, दया और करुणा को मजबूत करता है। संस्कृत शिक्षा में संगीत के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को धार्मिक गुरुओं और महान विभूतियों की जीवनियों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। इससे पहले महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संदीप शर्मा ने राजेश धर्माणी का स्वागत किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के अध्यापक भी मौजूद रहे।
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श्रेष्ठ दस निबंधों को सीर उत्सव में मिलेगा सम्मान
धर्माणी ने कहा कि जिला स्तरीय सीर उत्सव में संस्कृत विद्यार्थियों को मंत्रोच्चारण प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया जाएगा। विद्यार्थियों को आज से पांच या दस वर्ष बाद खुद को किस स्थान पर देखना चाहते हैं, इस विषय पर 25 सितंबर तक निबंध लिखने को कहा गया। सर्वश्रेष्ठ दस निबंधों का चयन कर उन्हें जिला स्तरीय सीर उत्सव में पुरस्कृत किया जाएगा।
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